prem samandar hota hai

ऊपर से कुछ दिख न पाए , अंदर अंदर होता है
गहराई में नप न पाए , प्रेम समंदर होता है
लोगो ने है कितना लूटा प्रेम तो फिर भी पावन है
जिसमे आंख से आंसू छलके, प्रेम वो सूंदर होता है
प्रेम का देखो साधक बनकर, व्याकुल ब्यथित कबीरा है
लोक लाज को त्याग के नाची , प्रेम दीवानी मीरा है
बिन देखे ही बिन परखे ही करते लोग समर्पण है
दिल में तक जो घाब बनादे ,पेना खंजर होता है
सहज सहज सा भलापन है ,सहज है इसमें कठिनाई
प्रियतम को तुम भले भुला दो , पीछा करती परछाई
जिसको वादा मिला ख़ुशी का नयन तो उसके गीले है
छोटी बदरि नहीं प्रेम की , पूरा अम्बर होता है
शेखर कुमार

Comments

4 responses to “prem samandar hota hai”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

  3. Abhishek kumar

    Nice

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