soch

अपनी उलझनों के हम यूँ आदी हो गए है
कभी मुजरिम तो कभी फरियादी हो गए है
न होता कुछ तो कुछ और जरूर होता
बस इसी सोच में कोई बर्बादी हो गए है
राजेश’अरमान’

Comments

4 responses to “soch”

  1. UE Vijay Sharma Avatar
    UE Vijay Sharma

    कभी मुजरिम तो कभी फरियादी हो गए है ..nice

  2. Abhishek kumar

    वाह वाह

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