पूस की रात

पुस की रात

पुस की रात जरा सा ठहर जा। तेरे तेज चलने से, मैं भूल जाता हूँ अपनो को, उनके दिये जख्मों को, उन पर छिड़के नमको को। पुस की रात जरा ……………. तेरी ठंड की कसक , कुछ पल तक ही सिहराती हैं। अपनों की दी जख्में, वक्त-वेवक्त मुझे रुलाती हैं। पुस की रात जरा ……………. पुस की रात तुम तो बस, चंद लम्हों के लिए आती हैं। अपने की वेवफाई मुझे, हर वक्त सुई चुभों जात... »

पूस की रात

फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। पत्तों से ओस की बूँदें टपकना याद है मुझे। आँखों से आँसूओं का बहना याद है मुझे। सन्नाटे को चीरती, तेज धड़कनों की आवाज़, ख़ामोश ज़ुबाँ, कुछ ना कहना याद है मुझे। हमारे मोहब्बत के गवाह थे जो सारे, नदारद हैं वो चाँद तारों की बारात। फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। कोहरे से धुंधला हुआ वो मंज़र याद है मुझे। चीरती सर्द हव... »

पूस की रात को

आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को ? झकझोर रहा है मेरे दिल की जज़्बात को । आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को? घनघोर अंधेरा छाया है देख मेरा मन घबराया है सनसन करती सर्द हवाएँ कपकपा रही मेरे गात को। आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को ? टाट पुराने को लपेटा खेतों में मंगरु है लेटा सर्दी और चिंता के कारण नींद कहाँ उस गात को? आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को ? फसल बचाने को पशुओं से जाग रहा है खेत में। डर आशंका औ... »

पूस की रात।

पूस की रात। थरथरा रहा बदन जमा हुआ लगे सदन, नींद भी उचट गयी रात बैठ कट गयी। ठंड का आघात पूस की रात। हवा भी सर्द है बही लगे कि बर्फ की मही, धुंध भी दिशा – दिशा कि काँपने लगी निशा। पीत हुए पात पूस की रात। वृद्ध सब जकड़ गये पोर-पोर अड़ गये, जिन्दगी उदास है बची न उम्र पास है। सुने भी कौन बात पूस की रात। रात अब कटे नहीं ठंड भी घटे नहीं, है सिकुड़ गयी शकल कुंद हो गयी अकल। न ठंड से निजात पूस की रात।... »

पूस की रात

पूस की रात मे दुनिया देख रही थी सपने आलस फैला था चहु ओर रात भी लगी थी ऊँघने. मैंने छत्त से देखा बतखों के झुण्ड को तलाब मे तीर सी ठण्डी हवा चलने लगी थी रात के आखरी पहर मे. मछलिया खूब उछल रही थी तेर रही थी इधर -उधर सोचा हाथ लगाउ उनको पर ना जाने छुप गई किधर. तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान मे बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति मे जैसे वो सब आजाद है मेने भी खुद को आजाद महसूस किया उनकी स्वछंद संगती मे. ….. ... »

पूस की रात

शायरों का हुआ गर्म हर लफ़्ज़ इस सर्द पूस की रात के महीने में दिल भी बहका बहका सा लागे इस सर्द पूस की रात के महीने में गुड़ सा मीठा अदरक सा तीखा पूस की रात का यह महीना मैं भी रहूं खोया खोया इश्क में तेरे इस पूस की रात के महीने में »

पूस की रात

कभी ना भूलेगी वो पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर की सिलवट वैसी ही थी जैसी मैनें छोड़ी थी ….. मौसम कितना भीगा सा था उस पूस की रात में बारिश की बूंदों ने मन के सारे घावों पर मरहम लगा दिया था……. मैं और मेरी तन्हाई बस डूबने वाले ही थे तुम्हारी यादों के समंदर में……… अचानक मैंने देखा कि एक बुलबुल काफी भीगी हुई कांप... »

🌹🌹 वो पूस की रात 🌹🌹

🌹🌹कभी ना भूलेगी वो 🌹🌹 पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… ⚘⚘⚘ मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। ⚘⚘⚘ उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर की सिलवट वैसी ही थी जैसी मैनें छोड़ी थी ….. ⚘⚘⚘ मौसम कितना भीगा सा था उस पूस की रात में बारिश की बूंदों ने मन के सारे घावों पर मरहम लगा दिया था……. ⚘⚘⚘ मैं और मेरी तन्हाई बस डूबने वाले ही थे तुम्हारी यादों क... »

ऐ बेदर्द सर्दी! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं

ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं। कहीं मंद शीतल हवाएँ । कहीं शबनम की ऱवाएँ ।। दिन को रात किया कोहरे का कोई जवाब नहीं। ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं।। कोई चिथड़े में लिपटा । कोई घर में है सिमटा ।। कोई कोट पैंट में भी आके बनता नवाब नहीं। ऐ बेदर्द सर्दी,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।। रंग बिरंगे कपड़ों में बच्चे । आँगन में खेले लगते अच्छे ।। दादा -दादी के प... »

सर्दी

रज़ाई ओढ़ जब चैन की नींद हम सोते हैं। ठण्ड की मार सहते, ऐसे भी कुछ होते हैं।। जिनके न घर-बार, ना ठौर-ठिकाना। मुश्किल दो वक़्त कि रोटी जुटाना। दिन तो जैसे – तैसे कट ही जाता है, रूह काँपती सोच, सर्द रातें बिताना। गरीबी का अभिशाप ये सर अपने ढोते हैं। ठण्ड की मार सहते, ऐसे भी कुछ होते हैं।। भले हम छत का इंतज़ाम न कर सकें। पर जो कर सकते भलाई से क्यों चूकें। ठंड से बचने में मदद कर ही सकते हैं, ताक... »

बेवफाई की ठण्ड

ये दोस्त!देखो आखिर लग ही गयी तुम्हे बेवफाई की ठण्ड। कितना कहा था कि मेरे प्यार और वफ़ा की चादर ओढ़ कर रखना। »

सर्दी का मौसम

तुम मुझे ओढ़ लो और मैं तुम्हें ओढ़ लेता हूँ, सर्दी के मौसम को मैं एक नया मोड़ देता दूँ। ये लिहाफ ये कम्बल तुम्हें बचा नहीं पाएंगे, अब देख लो तुम मैं सब तुमपे छोड़ देता हूँ। सर्द हवाओ का पहरा है दूर तलक कोहरा है, जो देख न पाये तुम्हे मैं वो नज़र तोड़ देता हूँ। लकड़ियाँ जलाकर भी माहोल गर्म हुआ नहीं, एक बार कहदो मैं नर्म हाथों को जोड़ देता हूँ। ज़रूरत नहीं है कि पुराने बिस्तर निकाले जाएँ, सहज ये रहेगा मैं जिस... »

सर्दी

वसंत को कहा अलविदा, ग्रीष्म और वर्षा काल बीता अब शरद और हेमंत अायी, सर्दी शिशिर तक छाई ये सर्द सर्द सी राते, इसकी बड़ी अजीब है बातें कहीं मुस्कान अोस सी फैलायी, कहीं दर्द दिल को दे आयी जब संग ये मावठ लाती, बारिश संग उम्मीद जगाती रबी की फसले हर इक, खेतों की शान बढ़ाती बर्फिली हवाओं बीच, करता किसान रखवाली लेकिन जब पाला गिरता, फिकी हो जाती दीवाली माना व्यापार है बढ़ता, शादी का सीजन खुलता संक्रांत क्र... »

सर्दी

तेरा चुपके से आना गजब, घंटो धूप में बिताना गजब। आग के पास सुस्ताने लगे हैं, तुझे हर वक्त पास पाने लगे हैं। तेरे यादों को मन में समेटे बैठे हैं तन को कम्बल में लपेटे बैठे हैं। तु आती हर साल हमें मिलाने के लिए, मिठी यादो को जिंदगी में घुलानें के लिए। सर्दी सिर्फ तु ही मेरे साथ वफा करती हैं, प्रेयसी के यादों को जिंदा करती हैं। »

Ai sardi suhani si

किसी नाजुक कली सी, आंखें कुछ झुकी हुई शरमाई सी, हौले हौले दबे पांव आई ही गई सर्दी सलोनी सी, खिली हुई मखमली धूप में, आई किसी की याद सुहानी सी, दबी दबी मुस्कुराहट, होठों पर छाई सी, पता चला नहीं कब ढल गया दिन यूं ही, आई ठिठुरन की रात लिए कुहासों की चादर सी, सुबह धुंध का पहरा है, लगता बादलों का जमावड़ा सा, ढकी है चादर धुंध की राहों में, दूर-दूर तक कुछ भी नजर नहीं आता राहों में, गर्म चाय की चुस्की दे र... »

सर्दी और बेबस गरीब बच्चे

रूह भी कांपती है ठंडक मे कभी- कभी, याद आती है हर मजबूरियाँ सभी तभी।  इन्सान को ज़िन्दगी की कीमत समझनी चाहिये,  जो हो सके मुनासिब वह रहम करना चाहिये।  जीवन है बहुत कठिन कैसे यह सब बताऊँ?  मजारों पर शबाब के लिए चादर क्यों चढ़ाऊँ?  ठिठुरता हुआ मुफलिस दुआयें कम न देगा,  खुदा क्या इस बात पर मुझे रहमत न देगा।। »

सर्दियों की धूप-सी

सर्दियों की धूप सी लग रही है यह घड़ी यह जो नया एहसास है अजनबी है अजनबी सुना है मन वीरान है मेरा जहां आज क्यूं यादों में है डूबा दिल ना आ रहा है बाज क्यूं नजरें कर रही है इज़हार दिल में दबा है राज क्यूं कहने थे जो लफ्ज़ बदला है हर अल्फाज क्यूं सर्दियों की धूप में भी इतनी धुंध छाई आज क्यूँ सर्दियों ने ओढ़ ली है धूप की चादर अभी धूप है आँगन में उतरी बन के दुल्हन आज क्यूँ धीमी-धीमी उजली-उजली महकती है आज ... »