Tag: नया साल पर कविताएं

  • कहानी – हर साल की

    जनवरी आता है , नयी उम्मीदों को पंख लगाता है,
    फरवरी फर्र फर्र न जाने कब बीत जाता है ,
    मार्च सुहाना मौसम लेकर आता है,
    उम्मीदों को परवाज देते देते पहला तिमाही गुजर जाता है।

    अप्रैल में चहुँओर फूल खिल जाते है ,
    मई में सूरज देवता आग बरसाते है ,
    जून का महीना पसीना पोछने में बीत जाता है,
    आधा साल यूँ ही रीत जाता है।

    जुलाई में रिमझिम मानसून बरसता है ,
    अगस्त में नदी – नालो में उफान होता है ,
    सितम्बर नयी अंगड़ाई लाता है ,
    साल के नौ महीने बीत गए – धीरे से कहता है।

    अक्टूबर में पेड़ो के पत्ते साख से झड़ जाते है ,
    नवंबर में त्यौहार शुरू हो जाते है ,
    दिसम्बर फिर सर्द हो जाता है ,
    एक साल यूँ ही बीत जाता है।

    हर साल कुछ दे जाता है ,
    हर साल कुछ ले जाता है ,
    समय का चक्र है ,
    वक्त का पहिया चलता जाता है।

  • नव

    नव

    नभ के अरुण कपोलों पर,

    नव आशा की मुस्कान लिए,

    आती उषाकाल नव जीवन की प्यास लिए,

    दिनकर की अरुणिम किरणों का आलिंगन कर,

    पुष्प दल मदमस्त हुए,डोल रहे भौंरे अपनी मस्ती में,

    मकरन्द का आनंद लिए,

    नदियों के सूने अधरों पर ,चंचल किरणें भर रहीं ,

    नव आकांक्षाओं का कोलाहल,

    जीव सहज हीं नित्य नवीन​ आशाओं के पंख लगाकर

    भरते उन्मुक्त गगन में स्वपनों की उड़ाने,

    नये-नये नजरिए से भरते जीवन में नव उन्माद सारे ,

    चकित और कोरे नयनो में लिए सुख का संसार ,

    डोल रहे हम सब धरा पर,

    भरने को नव जीवन का संचार ।।

  • Naya saal

    नये साल की पवन बेला पर पहुचे तुम्हे बधाई..
    देश प्रेम है धर्म हमारा,हम सब हैं भाई भाई ..

    मान और सम्मान बढे,जीवन हो श्रेष्ठ शिखर पर..
    मानवता हो कर्म हमारा,हर जाती धर्म से बढ़कर..
    भेद भाव और छुआ छूत का नाम ना हो वसुधा पर ..
    हिन्दू मुसलिम सब साथ रहे, देश बढे उन्नति के पथ पर ..
    आपस में हम गले मिले है रूत मिलने की आई ..

    देश के कोने कोने में नारी को अब सम्मान मिले ..
    हर बाला लक्ष्मी बाई हो, हर बेटी को शिक्षा ग्यान मिले.
    हर जाति धर्म हर मानव को नित नुतन संयम ग्यान मिले ..
    देश के हर वीर सिपाही को, सत से ज्यादा सम्मान मिले..

    हर बला हो राधा जैसी, हर बच्चा हो कृष्ण कन्हाई ..

    Surendra kumar

  • नया साल

    नया साल

    पल महीने दिन यूँ गुजरे,
    कितने सुबह और साँझ के पहरे ,
    कितनी रातें उन्नीदीं सी,
    चाँदनी रात की ध्वलित किरणें,
    कितने सपने बिखरे-बिखरे,
    सिमटी-सिमटी धुँधली यादें,
    कुछ कर जाती हैं आघाते ,
    कभी सहला ,कर जातीं मीठी बातें,
    हौले-हौले साल यूँ गुजरा,
    जाते-जाते रूला गया,
    नये साल की नयी सुबह से,
    दामन अपना छुड़ा गया,
    कितने सपने दिखा गया ।

    नये साल की नयी सुबह के ,
    दहलीज पर आ गए हम,
    अनगिनत उम्मिदें बाँध खड़े हम,
    कितने सपने इन आँखो के,
    धुँधले कुछ है रंग भरे,
    उम्मीदों की दरिया में ,
    सब,बहने को आतुर बड़े ,
    मन बाँवरा गोते खाता,
    डूबता और फिर उतराता ।

    चलो ठीक है बहने दो,
    पल, महीने,दिन में डलने दो,
    किस्मत किसकी कब खुल जाए,
    मेहनत तो करने दो,
    आशाओं की दरिया में ,
    जीवन को बहने दो ।

    चलो काल के गर्त में सीपियाँ ढूंढे,
    कब कोई अनमोल मोती हाथ लग जाये ,
    बहते-बहते क्या पता कोई नया तट मिल जाए,
    चलो नये साल के पल, महीने,दिन में ढलते हैं,
    सुबह-साँझ के पहरे से हम कब डरते हैं,
    चलो आशाओं की दरिया में ,जीवन संग बहते हैं ।।

  • नया साल

    ये नये साल का मौसम भी खुशगवार नही
    ऐसा लगता है मुझे अब किसी से प्यार नही

    कई सालो से मुझे ग़म बहुत सताते है
    कई सालो से मेरे साथ में ग़मख्वार नही

    जान दे दूँ उसे तोहफे में नये साल को मै
    उससे मिलने के मगर कोई भी आसार नही

    बदलते साल से तो ज़ख्म नही भरते है
    और फिर मै भी पिघल जाऊं वो लाचार नही

    बहुत जल्दी से गुजरता है यहाँ हर साल
    और कदमों में मिरे पहली सी रफ्तार नही

    खरीद लूँ मै ‘लकी’ इक खुशी तेरी खातिर
    पर मेरे शहर खुशियों का वो बाज़ार नही

  • कविता

    नव वर्ष आया,नील गगन मे नव सुरभि बिखराया।
    शीतल शीतल ये हवाए,कह रही है खुशियॉ आया।

  • नया साल और मेरा प्यार

    अब तो तुम मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो,
    मोहब्बत का सफर नये साल पे छोड़ दो !
    आने लगी है प्यार की खुश्बू मेरे शर्ट से ,
    जो मुझसे न हो उस सवाल पे छोड़ दो !!
    राह से गुजरने वाली को बेतहाशा देखते हैं,
    मेरी बर्बादी का कुछ लोग तमाशा देखते हैं !
    स्वप्न का मेरा महल अब खंडहर हो गया है,
    इन्तजार करते अब शाम से सहर हो गया है !!
    हर रात मेरे सपने में तुम यूँ आया न करो,
    खामखाँ मेरा दिल तुम यूँ दुखाया न करो !
    कैसे बताउँ तुमको मैं कितना चाहता हूँ,
    नये साल में खुदा से मैं तुम्हे मांगता हूँ !!
    निगाहें-तलब से देखकर एलान करता हूँ,
    प्यार का इजहार मैं सरेआम करता हूँ !
    निशातकदे की खोज में चलता हूँ कहीं दूर,
    नये साल में जल्दी से मैं ये काम करता हूँ !!

  • नव वर्ष आने को है

    नव वर्ष आने को है,
    कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है,
    सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है,
    छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ,
    उन उम्मीदों से पर्दा हटाने को है,
    नया वर्ष आने को है,
    सपनों की हकीकत बताने को है,
    नए रिश्तों के चेहरा दिखाने को है,
    टूट गई थी कभी जो राहें कहीँ,
    उन राहों पर पगडण्डी बनाने को है,
    नव वर्ष आने को है,
    उड़ने को काफी नहीं पंख देखो,
    हौंसलो के घने पंख फैलाने को है,
    बीती बातों का आँगन भुलाने को है,
    फिर नई आशा मन में जगाने को है,
    नव वर्ष आने को है।।
    राही (अंजाना)

  • नव वर्ष

    आया है नव वर्ष
    साथ लाया है
    नई उम्मीदें नया हर्ष

  • नव वर्ष आई

    गुजं उठी चहू दिश
    नव वर्ष की नव शहनाई।
    करवट बदलती आसमां पे छाई,
    नव किरण लै पुरवाई आई।
    उमंगों भरा उत्सव गीत आज,
    चहकती चहचहाती चिडि़यों ने गाई।
    नव वर्ष देख बागों की,
    खिल उठी मादक पुष्पाई।
    रवि लिये नया सबेरा,
    स्वर्णिम किरण बिखराई।
    नव वर्ष आई- नव वर्ष आई,
    गुजं उठी नव शहनाई।

    योगेन्द्र कुमार निषाद ,घरघोड़ा ( छ.ग.)

  • नया साल

    नया साल

    ग़ज़ल
    कुछ एेसा नया साल हो।
    अपने आप मे बेमिशाल हो।
    महगी थी यह वर्ष बीत गई,
    कुछ सस्ता नया साल हो।
    कुछ तो यादें रहेंगें नये नये,
    कुछ सपनों का उडता गुलाल हो।
    नई गीत हो ,नया ग़ज़ल हो,
    नये सरगम पे नया ताल हो।
    रंगीन – ए- महपिल में योगेन्द्र,
    कुछ उम्मिदों का नया साल हो
    योगेन्द्र कुमार निषाद
    घरघोड़ा (छ़ग़)

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