Tag: स्वतंत्रता दिवस पर कविता

  • स्वतंत्रता दिवस

    धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं
    आतंकी गद्दारों से,
    खेल लाल रंग की होली अब,
    धरती माँ को मुक्त करो,
    बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब,
    इन दुश्मन मक्कारों से,
    धरती माँ फिर त्रस्त हुई है आतंकी गद्दारों से॥
    घाटी में घट घट में फैले
    आतंकी शैतानों को,
    मार गिराओ इस माटी के,
    घुसपैठी गद्दारों को,
    धरती माँ फिर त्रस्त हुई है आतंकी गद्दारों से॥
    बढ़ो वीर तुम आगे बढ़कर,
    आतंकी टेंक को नष्ट करो,
    फेहराकर घाटी में विजय तिरंगा,
    आतंकी मनसूबा ध्वस्त करो,
    धरती माँ फिर त्रस्त हुई है आतंकी गद्दारों से॥
    राही (अंजाना)

  • देश के इसी हालात पर रोना है

    देश के इसी हालात पर तो रोना है,
    69 साल हो गए आजादी के
    फिर भी आँखें भिगोना है,
    रो रहा कोई रोटी को
    और किसी के पास सोना-ही-सोना है,
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।

    भारत के वीर सपूतों ने आज़ादी के लिए
    दिए थे अपने प्राण,
    पर आज लग रहा है
    व्यर्थ चला गया उनका बलिदान,
    आज देश में
    चारो ओर फैला है भ्रष्टाचार,
    लोग भूल गए हैं
    अपनी सभ्यता-संस्कृति और संस्कार,
    बापू ने कहा था
    हिंसा छोड़,अहिंसा के बीज बोना है,
    हम भूल गए उनकी बात
    और सोचा, देखेंगे जो भी होना है,
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।

    चंद्रशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मार
    दिलाई हमें स्वतंत्रता,
    पर आज स्वतंत्रता दिवस मनाना
    रह गयी महज एक औपचारिकता,
    आज़ादी के दिन हम
    फहराते हैं अपना तिरंगा प्यारा,
    पर कितना प्यार है हमें तिरंगे से
    ये बताता है कर्म हमारा,
    नहीं जानते हम महिला स्वतंत्रता सेनानियों के नाम
    और सोचते हैं,उनसे हमें क्या लेना है,
    पर इतना जरूर जानते हम
    किस फ़िल्म में आलिया और किसमें कैटरीना है,
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।

    नेताजी सुभाषचंद्रबोस ने हमारे लिए
    लड़ा था स्वतंत्रता संग्राम,
    पर आज के नेताओं ने तो
    नेता शब्द को ही कर दिया है बदनाम,
    नेताओं ने काफी ठेस पहुंचाई है
    इस देश की गरिमा और आन को,
    तभी तो नेता बनने में हिचक होती है
    एक अच्छे इंसान को,
    नेताओं ने यह ठान लिया है
    देश की संपत्ति को जितना हो सके
    ढोना है,
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।

    अब हमें ही अपने देश के लिए
    पड़ेगा कुछ करना
    भ्रष्टाचारियों के खिलाफ
    हमें ही पड़ेगा लड़ना,
    ऐसा तभी संभव है
    जब बदल जाएँ लोगों के विचार,
    लोगों को रखनी होगी सहयोग भावना
    भूलकर अपनी जीत और हार,
    आज़ाद हो गए हम
    पर हमारी सोच को अभी भी
    आज़ाद होना है,
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।
    देश के इसी हालात पर तो रोना है।

    ©विनायक शर्मा

  • दिल में हिन्दुस्तान है

    दिल में हिन्दुस्तान है

    है जिगर शेरों सा मेरा बाज़ुओं में जान है।
    दिल में हिंदुस्तान है साँसों में हिंदुस्तान है।

    देश भक्ती की लहर नस नस में भर दे जो मिरी।
    सारी दुनिया से निराला मेरा राष्ट्रीय गान है।

    देश की खातिर लुटाना हमको अपनी जान है।
    देश भक्तों से हमारे देश की पहचान है।

    हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई दुनियावी पहचान है।
    रब ने पैदा ऐक जैसा ही किया इंसान है।

    सब सुभाशो चंद्र शेखर और भगत जैसे है हम।
    सर कटाना देश की खातिर हमारी शान है।

    सब लरज़ जाएंगे दुश्मन जब दहाड़ेगा तलत।
    दिल में हिंदुस्तान है नस नस में हिंदुस्तान है।

    “डॉ तलत खान”
    कोटा राजस्थान

  • आजाद तेरी आजादी

    भारत मां के अमर पुत्र “चन्द्रशेखर आजाद” की पुण्य तिथि पर मेरी एक तुच्छ सी रचना l

    रचना का भाव समझने के लिये पूरी रचना पढेl”

    **आजाद तेरी आज़ादी की अस्मत चौराहों पर लूटी जाती है**

    शत बार नमन ऐ हिंद पुत्र!

    शत बार तुम्हें अभिराम रहे,

    आज़ाद रहे ये हिंद तुम्हारा,

    आज़ाद तुम्हारा नाम रहे l

    याद बखूबी है मुझको कि तुमने क्या कुर्बान किया,

    आजाद थे तुम और अन्तिम क्षण तक आज़ादी का गान किया,

    बचपन, यौवन, संगी-साथी, सब तुमने वतन को दे डाला,

    अपनी हर इक सांस को तुमने हिंद पे ही बलिदान किया,

    मगर सुनो ऐ हिंद पुत्र-

                                 अब तो उस आजादी की बस गरिमा टूटी जाती है,

    और भरे चौराहों पर उसकी इज्जत लूटी जाती है l

    जिसकी खातिर लाखों वीरों ने अपना सर्वस्व मिटा डाला,

    निष्प्राण किया खुद को फ़िर उसके अभिनन्दन को बिछा डाला,

    आजाद हिंद का आसमान अब उसपर  कौंधा जाता है,

    और उसी आजादी को अब पैरों से रौंदा जाता है,

    उस आजादी को लिखने पर आंख से नदियां फूटी जाती हैं,

    आजाद तेरी आजादी की इज्जत चौराहों पर लूटी जाती है ll

    तुमने शीश चढाया था कि हिंद ये जिन्दाबाद रहे,

    तुम ना भी रहो फ़िर भी ये रहे, आजाद रहे आबाद रहे,

    तुम्हारा इंकलाब अब देशद्रोह के पलडो में तोला जाता है,

    और हिंद की मुर्दाबादी का नारा खुलकर बोला जाता है,

    अब हिंद के जिन्दाबाद पे तेरी जनता रूठी जाती है,

    आजाद तेरी आजादी की इज्जत चौराहों पर लूटी जाती है l

    जिस आजादी के सपनों में तुमने सुबह-ओ-शाम किया,

    राजदुलारों ने उसको चौराहों पर नीलाम किया,

    संसद के दुस्साशन उसका चीरहरण कर लेते है,

    और हवस की ज्वाला अपनी आंखों में भर लेते हैं ,

    सर्वेश्वर श्री कृष्ण की गाथा अब बस झूठी जाती है,

    आजाद तेरी आजादी की इज्जत चौराहों पर लूटी जाती है ll

    आज तुम्हारी पुण्य तिथि पर ये सब सोच के आंखें रोयी थीं,

    इसी हिंद की मिट्टी में तुमने अपनी शहादत बोयी थी,

    आज तुम्हारी कुर्बानी पर ये लोग तो ताने कसते हैं,

    ये आस्तीन के सांप हैं अपने रखवालों को डंसते हैं,

    और भला क्या लिखूं?

                                कलम हाथ से छूटी जाती है,

    आजाद तेरी आजादी की इज्जत चौराहों पर लूटी जाती है ll

    All rights reserved.

                         -Er Anand Sagar Pandey

  • Happy Independence Day

    Watan hamara misaal mohabat ki,
    Todta hai deewaar nafrat ki,
    Meri Khush naseebi,
    Mili zindagi is chaman mein Bhula na
    Sake koi iski khushbo saton janam mein.
    Happy Independence Day!

    – Yash

  • आज़ादी

    खून से मिली आज़ादी हैं ,
    जूनून से मिली आज़ादी हैं ,
    बलिदान से मिली आज़ादी हैं
    सोचने की आज़ादी हैं ,
    लिखने की आज़ादी हैं ,
    इस देश मैं आज़ादी ही आज़ादी हैं

    भूल हम जाते हैं बस ऐसे की ,
    कितने बलिदानों के बाद मिली हैं यह आज़ादी हैं ,
    चलो हम याद करे उन सपूतो को ,
    जिनके लिए मिली हमे यह आज़ादी हैं

  • मैं आज़ाद हूँ

    मैं आज़ाद हूँ

    मैं आज़ाद हूँ ,
    तुम लोग मुझे पागल कहोगे ,
    मैं आज़ाद हूँ आपसी घृणा से ,
    आपसी बैर से ,
    मैं आज़ाद हूँ

    मैं आज़ाद हूँ ,
    धन का मेरा कोई मोल नहीं हैं ,
    मन का मोल ही सब कुछ मेरा हैं ,
    मैं आज़ाद हूँ ,
    तुम लोग मुझे पागल कहोगे

  • क्या आप राष्ट्र वादी हैं?

    क्या आप राष्ट्र वादी हैं?

    आज सुबह से मैं,
    राष्ट्रवादी खोज रहा हूँ।
    कौन-कौन है देशभक्त
    ये सोच रहा हूँ॥
    सुबह-सुबह किसी ने
    दरवाजा खटखटाया,
    देखा तो कन्हैया आया।
    उसके हाथ में दूध के डिब्बा था।
    उसके पास अपना ही किस्सा था।
    देखकर -मुझे कहने लगा
    कवि साहेब- बर्तन लेकर आओ।
    चुपचाप क्यों खड़े हो, बताओ?
    मैं तो
    आज राष्ट्रवादीयों को खोज रहा हूँ।
    कौन-कौन है राष्ट्रवादी सोच रहा हूँ।।
    इसीलिए दूध वाले पूछ बैठा,
    कन्हैया- क्या तुम राष्ट्र वादी हो?
    देशभक्ति का पहचान बताओ?
    देश के लिए क्या हमें समझाओ?
    कन्हैया को शायद कुछ समझ आया।
    लेकिन वो जल्दी में था
    कहने लगा- अरे! दुध लेबे त चुपचाप ले।
    नहीं ते पाछु महीना के पैसा बाचे हे, तेला दे।
    सुत के उठे हवं तब ले परेशान हवं।
    बिहनिया-बिहनिया नोनी के दाई जगा दिस।
    भईस हा बीमार हे मोला बता दिस॥
    दऊड़त-दऊड़त जाके डाक्टर ल लाये हवं।
    तभे भईस ल मेहा दुहु पाये हवं।
    तब तो देरी से आय हवं।
    तेहाँ आठ के बजत ले सुते हस।
    मोर उठाय मा उठे हस।
    अब पुछत हस
    कोनो देशभक्ति के काम करे हवं।
    ये तोर दरवाजा मा आके दुध ल धरे हवं।
    समझ ले इही राष्ट्र वादी काम मय ह करे हवं।
    उसके जवाब से मैं
    संतुष्ट नहीं हो पाया।
    इसलिए क्योंकि
    शायद मुँह भर जवाब पाया।

    अब मैं नहाधोकर तैयार हूँ।
    पूछने के लिए बेकरार हूँ।
    क्या आप राष्ट्रवादी हैं?
    लो! अब सब्जी वाली आई है।
    पालक, गोभी, भिंड़ी लाई है।।
    मैंने उनसे तपाक से पूछ ही लिया।
    क्या आप राष्ट्र वादी हैं।
    हमको जरा बताइये।
    मन में उलझन है सुलझाईये।
    अब सब्जी वाली कहने लगी-
    ये गौटनीन सुन तो वो
    तुहंर घर के गौटिया ह संझा किन
    चढ़ाय रहीस का?
    जा तो जा वोकर घर बेचाथे,
    उतरा हर,
    ले के आ।
    बिहनिया-बिहनिया ले काय-काय
    पुछत हे।
    भगवान जाने ये मरद मन काय-काय
    सुझत हे।
    काला बताववं दाई
    हमर घरवाला हर रात किन पी के आय रहीस।
    एकेला कुकरा चुरोके खाय रीहीस।
    किराहा ह रात-भर बडबडाईस हे।
    बिहानिया ले उतारा बर मोला ठठाईस हे।
    कनिहा मा लोर पर गे हाबय,
    तभो ले साग बेचे बर आय हवं
    भूखे-प्यासे हाबवं, कुछू न ई खाय हवं।
    लागथे तुंहरो घर मा उही हाल हे।
    गौटिया घलो दारु के बीमार हे।
    अब तो शराबी होने का घूट भी पी गया।
    जाने कैसे मैं जी गया।

    अभी भी तलाश जारी है
    राह चलते लोगों से
    पूछने की बारी है।
    कि क्या आप राष्ट्रवादी हैं?
    रामु अपने कंधे में हल
    सिर पर बोरी लेकर
    दो बैलों के पीछे-पीछे जा रहा था।
    मोर खेती-खार रुमझुम
    गुनगुना रहा था।
    मैं भी उसके पीछे हो लिया।
    और वही सवाल उसे भी दिया।
    रामु भैय्या बताओ क्या आप राष्ट्र वादी हैं।
    रामु कहने लगा- राष्ट्र ल त समझत हवं।
    फेर वादी समझ नई आवत हे।
    बता तो भैय्या ये कोन दुकान मा बेचावत हे का?
    नहीं त बता भैय्या सरकार ह
    कोनो नवा योजना चलावत हे का?
    काला दुख ल बताववं भैय्या
    छेरी ल बेच के शौचालय ल बनाय हवं ।
    बारा हजार मिलही किहीस
    फेर एको किस्त नई पाय हवं।
    भुरवा के दाई ह रोज झगरा मतावत हे।
    छेरी के मोहो मा दु दिन होगे न ई खावत हे।
    एसो बादर-पानी बने गिर जाय।
    हम किसान मन के दिन फिर जाय।
    तहान सबो वाद ल अपनाबो।
    एक ठन उहूँ ल दू तीन ठन बनाबो।
    यहाँ भी मैं उदास हो गया।
    लगा सारा दिन बरबाद हो गया।
    सवाल अभी भी बाकी है।
    क्या आप राष्ट्र वादी हैं।

    अभी रात के नौ बज रहे हैं।
    टीवी पर प्राईम टाईम चल रहा हैं।
    वाट्स अप से एक-एक करके
    मैसेज निकल रहा है।
    मैं फेसबुक पर व्यस्त हूँ।
    दिन भर काम-धाम के बाद मस्त हूँ।
    अब महसूस हो रहा है कि
    मैं राष्टवादियों के बीच हूँ।
    समझ गया मैं भी क्या चीज हूँ।
    लेकिन मैं सोच रहा हूँ
    राष्ट्र वादी कौन है
    वो जो मुझे दिन में मिले,
    या फिर जो रात के नौ बजे के बाद
    टी वी पर फेसबुक या वाट्स अप मिल रहे हैं।
    लेकिन सवाल अभी भी बाकी है।
    क्या आप राष्ट्रवादी हैं?
    ओमप्रकाश चंदेल “अवसर”
    पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़

    7693919758

  • तुम वीर मेरे

    तुम वीर मेरे तुम वीर मेरे
    हम साथ तेरे मनमीत मेरे

    जिस पल लगे तुम हार गये
    समझो उस पल तुम जीते गये

    आजा के अब अँखिया तरस गई
    आँखों के आँसू सूख गये

    तुम हो और रहोगे हमेशा दिल में
    आवाम ये कहते रह गये..

    #UniqueMaya

  • भारत माँ

    चूड़ियाँ पहनी जिन हाथों में,
    मैं तलवार उठा सकती हूँ।

    नहीं देश का एक कोना दूँगी,
    बदले में जां दे सकती हूँ।

    जिन्होंने मुझे खोटा समझा,
    उन्हें गर्व करा सकती हूँ।

    पापा ने समझा खोटा सिक्का,
    भारत माँ, मैं खरा बन सकती हूँ।

    #UniqueMaya

  • एक संवाद तिरंगे के साथ।

    जब घर का परायों का संगी हुआ।

    क्रोधित तेरा शीश नारंगी हुआ।

    ये नारंगी नासमझी करवा न दे।

    गद्दारों की गर्दने कटवा न दे।।

    साँझ को अम्बर जब श्वेत हुआ।

    देख लेहराते लंगड़ा उत्साहित हुआ।।

    श्वेताम्बर गुस्ताखी करवा न दे।

    मेरे हाथों ये तलवारें चलवा न दे।।

    तल पे हरियाली यूँ बिखरी पड़ी।

    खस्ता खंडहरों में इमारत गड़ी।।

    ये हरियाली मनमानी करवा न दे।

    गुलमटों को अपने में गड़वा न दे।।

    तेरा लहराना मुसलसल कमाल ही है।

    तेरी भक्ति करूँ क्यूँ?निरुत्तर सवाल ही है।।

    तेरी लहरें मेरे रक्त को लहरा न दें।

    कहीं हर तराने में तुझे हम लहरा न दें।।

  • वन डे मातरम

    स्वतंत्र हैं हम देश सबका।

    आते इसमें हम सारे

    हर जाती हर तबका।।

     

    सोई हुई ये देशभक्ति

    सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी।

    एक है पंद्रह अगस्त और

    दूसरा छब्बीस जनवरी।।

     

    देश रो रहा रोज़ रोज़

    फिर एक ही दिन क्यों आँखे नम

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्

     

    देखो कितना गहरा सबपर

    दिखावे का ये रंग चढ़ा।

    एक दिन तिरंगा दिल में

    अगले ही दिन ज़मीन पे पड़ा।।

     

    उठते तो हो हर सुबह

    चलो उठ भी जाओ अब तुम

    सो रहे हो अब भी अगर तो खा लो थोड़ी सी शरम।

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    सब बातें बोले गोल गोल

    सोच कड़वी,कड़वे बोल

    एक दिन हो जाते मीठे खा के लड्डू नरम नरम।

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    राष्ट्र ध्वज में तीन रंग

    तीन बातों के प्रतीक हैं।

    सम्मान करना है इन्ही का

    ये जान ले ये सीख लें।।

     

    सफ़ेद कहता रखो शांति

    साथ दो सच्चाई का।

    पर झूठा शान से फिर रहा और

    सच्चा मोहताज पाई पाई का।।

     

    केसरिया हम सभी को

    देता एक उपदेश है।

    हिम्मती बनो तुम सारे

    बलिदानो का ये देश है।।

     

    हरा निशानी समृद्धि का

    देता विविधता का ज्ञान है।

    मगर भारतीय होने से पहले

    लोग हिन्दू-मुसलमान है।।

     

    ये रंग हवा में लहरा रहे

    इन्हें मन में भी फैला ले हम।

    चलो बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    देश के हर ज़ख्म का

    हमारे पास मरहम है।

    इन निहत्थे हाथों में

    धारदार कलम है।।

     

    रूढ़िवादी खंजरों पर

    अब चल जाने दें ये कलम।

    चलो बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    दूसरों का इंतज़ार क्यूँ

    तुम ही करदो अब पहल।

    एक दिन में क्या बन सका है

    घर,ईमारत या महल।।

     

    याद करलो आज सब

    कर्म अपना,अपना धर्म

    चलो राष्ट्र निर्माण में बढ़ाये छोटे छोटे से कदम।

    अब बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।

  • अमन की कुछ बात

    अमन की कुछ बात

    दरिया में बहा दो रंजिश सब
    अब अमन की कुछ बात हो जाये
    मेरे देश में खुशहाली हो
    बस इत्मिनान से मुलाकात हो जाये
    एक अनोखी ख्वाहिश सी
    सजी जमीन है फ़ुर्सत से
    अब माटी के पहलू से
    कुछ नई फ़सल-सौगात हो जाये
    जब सारे अरमान देख लिये
    क्यों अपने प्यारे खफ़ा हुए
    आज मिली आज़ादी में
    फ़िर ईद-मिलन दस्तूर हो जाये
    मैं सब्र में आज डूबा हूँ
    कुछ दूर चलके रोया हूँ
    वजूद को अपने ढूँढू हर दम
    मैं फ़िर कहीं जाके खोया हूँ

    रेत के घरोंदो को छोड़ो
    अब टूटे सपनों को खोजो
    मेरे साथ चलो,नई आवाज़ लिये
    आज फिर एक ख्वाब एक उम्मीद हो जाये..

    – Rajat

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