धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं आतंकी गद्दारों से, खेल लाल रंग की होली अब, धरती माँ को मुक्त करो, बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब, इन दुश्मन मक्कारों से, धरती माँ फिर त्रस्त हुई […]
धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं आतंकी गद्दारों से, खेल लाल रंग की होली अब, धरती माँ को मुक्त करो, बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब, इन दुश्मन मक्कारों से, धरती माँ फिर त्रस्त हुई […]
देश के इसी हालात पर तो रोना है, 69 साल हो गए आजादी के फिर भी आँखें भिगोना है, रो रहा कोई रोटी को और किसी के पास सोना-ही-सोना है, देश के इसी हालात पर […]
है जिगर शेरों सा मेरा बाज़ुओं में जान है। दिल में हिंदुस्तान है साँसों में हिंदुस्तान है। देश भक्ती की लहर नस नस में भर दे जो मिरी। सारी दुनिया से निराला मेरा राष्ट्रीय गान […]
भारत मां के अमर पुत्र “चन्द्रशेखर आजाद” की पुण्य तिथि पर मेरी एक तुच्छ सी रचना l रचना का भाव समझने के लिये पूरी रचना पढेl” **आजाद तेरी आज़ादी की अस्मत चौराहों पर लूटी जाती […]
Watan hamara misaal mohabat ki, Todta hai deewaar nafrat ki, Meri Khush naseebi, Mili zindagi is chaman mein Bhula na Sake koi iski khushbo saton janam mein. Happy Independence Day! – Yash
खून से मिली आज़ादी हैं , जूनून से मिली आज़ादी हैं , बलिदान से मिली आज़ादी हैं सोचने की आज़ादी हैं , लिखने की आज़ादी हैं , इस देश मैं आज़ादी ही आज़ादी हैं भूल […]
मैं आज़ाद हूँ , तुम लोग मुझे पागल कहोगे , मैं आज़ाद हूँ आपसी घृणा से , आपसी बैर से , मैं आज़ाद हूँ मैं आज़ाद हूँ , धन का मेरा कोई मोल नहीं हैं […]
आज सुबह से मैं, राष्ट्रवादी खोज रहा हूँ। कौन-कौन है देशभक्त ये सोच रहा हूँ॥ सुबह-सुबह किसी ने दरवाजा खटखटाया, देखा तो कन्हैया आया। उसके हाथ में दूध के डिब्बा था। उसके पास अपना ही […]
तुम वीर मेरे तुम वीर मेरे हम साथ तेरे मनमीत मेरे जिस पल लगे तुम हार गये समझो उस पल तुम जीते गये आजा के अब अँखिया तरस गई आँखों के आँसू सूख गये तुम […]
चूड़ियाँ पहनी जिन हाथों में, मैं तलवार उठा सकती हूँ। नहीं देश का एक कोना दूँगी, बदले में जां दे सकती हूँ। जिन्होंने मुझे खोटा समझा, उन्हें गर्व करा सकती हूँ। पापा ने समझा खोटा […]
जब घर का परायों का संगी हुआ। क्रोधित तेरा शीश नारंगी हुआ। ये नारंगी नासमझी करवा न दे। गद्दारों की गर्दने कटवा न दे।। साँझ को अम्बर जब श्वेत हुआ। देख लेहराते लंगड़ा उत्साहित हुआ।। […]
स्वतंत्र हैं हम देश सबका। आते इसमें हम सारे हर जाती हर तबका।। सोई हुई ये देशभक्ति सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी। एक है पंद्रह अगस्त और दूसरा छब्बीस जनवरी।। देश रो […]
दरिया में बहा दो रंजिश सब अब अमन की कुछ बात हो जाये मेरे देश में खुशहाली हो बस इत्मिनान से मुलाकात हो जाये एक अनोखी ख्वाहिश सी सजी जमीन है फ़ुर्सत से अब माटी […]
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