Tag: 2liner

  • “इन्तजार” #2Liner-17

    ღღ___ज़िन्दगी तो कटती जा रही है “साहब”, इन्तजार की कैंची से;
    .
    और सिलसिला-ए-इन्तजार है, कि कटता ही नहीं कभी !!…….‪#‎अक्स
  • “आसमाँ” #2Liner-16

    ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता;
    .
    कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..‪#‎अक्स‬

  • “तारीख़” #2Liner-13

    ღღ__हमको भी अपनी बारी का, इंतज़ार रहेगा “अक्स”;
    .
    लोग कहते हैं तारीख़, खुद को दोहराती ज़रूर है !!………‪#‎अक्स‬

  • “अक्स” #Liner-12

    वो मुझमें बस गया है ‘साहब’, आईने में “अक्स” की मानिन्द;
    .
    ღღ___नज़र के सामने होकर भी, अक्सर सामने नहीं होता !!…….‪#‎अक्स‬

  • “ऐतबार” #2Liner-11

    ღღ__मेरे मनाने से आखिर, क्यूँ लौट आएँगे वो भला;
    .
    वो छोड़ कर ही न जाते, अगर ऐतबार होता !!……..‪#‎अक्स‬

  • “ख़ामोशी” #2Liner-10

    ღღ___कल मेरी ख़ामोशी का उसकी यादों से, झगड़ा हो गया “साहब”;
    .
    और शोर इतना हुआ दिल में, कि नींद जागती ही रात भर !!…..#अक्स

  • “ख़ुशी” #2Liner-9

    ღღ___अच्छे-बुरे का हिसाब, हम नहीं रखते “साहब”
    .
    हम तो बस वो करते हैं, जिसमें तुमको ख़ुशी मिले !!…….‪#‎अक्स‬

  • “रातें” #2Liner-8

    ღღ___सवाल तो बे-आवाज़ रातों का है “साहब”;
    .
    दिन तो गुज़र ही जाता है, ज़रूरतों के शोर में !!…….‪#‎अक्स‬

  • “ऑंखें ” #2Liner-7

    ღღ___मेरी आँखों में जो क़ैद है “साहब”, वो समुन्दर ही है शायद;
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    कि सूखता भी नहीं, बहता भी नहीं, बस भरा ही रहता है !!…….‪#‎अक्स‬

  • “हासिल” #2Liner-7

    ღღ___हासिल-ए-इश्क़ के बारे में, सोंचता हूँ जब भी ;
    .
    तेरा मिलना याद आता है, तेरी बेरुखी नहीं !!………..‪#‎अक्स‬

  • “तजुर्बा” #2Liner-6

    ღღ__लोग कहते हैं, इश्क़ मत कर, आखिर इश्क़ से क्या होगा;
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    अरे कुछ हुआ तो ठीक है “साहब”, ना हुआ, तो तजुर्बा होगा !!……..‪#‎अक्स

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