ღღ__कुछ एक बे-रंग क़तरों में, बह गया ज़िन्दगी का हर एक रंग;
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सबक क्या-क्या नहीं सीखे, “अक्स” हमने आंसुओं की जानिब से!!…#अक्स
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“रंग” #2Liner
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“याद”#2Liner…..
ღღ__ना जाने आज इतना, क्यूँ याद आ रहे हो “साहब”;
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तुझे भूलने की कोशिश, तो हमने की ही नहीं कभी!!….#अक्स.
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“इलाज” #2Liner-111
ღღ__कुछ इस तरह भी करता है “साहब”, वो मेरे दर्द का इलाज;
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कि पहले घाव देता है, फिर अपने आंसुओं से धोता है!!…..#अक्स -
“चाँद” #2Liner-110
ღღ__कल शब मिला था इक चाँद, हाँ “साहब” चाँद ही रहा होगा;
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मिले भी तो दूर से, प्यार पर गुरूर से, और दोनों ही मजबूर से!!….#अक्स -
“ना-समझ ख्वाब” #2Liner-109
ღღ__ब-मुश्किल थपकियाँ देकर सुलाती है, नींद मुझको “साहब”;
पर कुछ ना-समझ ख्वाब हैं उनके, जो बे-वक़्त जगा देते हैं!!…#अक्स
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“मजबूरी” #2Liner-108
ღღ__मजबूरी में सुनने पड़ते हैं “साहब”, लोगों के ताने अक्सर;.कोई भी शख्स इस जहाँ में, शौक़ से रुसवा नहीं होता!!…#अक्स -
“गुफ्तगू” #2Liner-108
ღღ__दुश्वारियाँ लाख सही लेकिन, गुफ्तगू करते रहो “साहब”;
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मुसलसल चुप रहने से भी कोई, मसला हल नहीं होता!!…..#अक्स -
“आवाज़”
ღღ__कौन-सी दुनिया में रहते हो, तुम आज-कल “साहब”;
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जो सपनों में भी तुम तक, मेरी आवाज़ नहीं जाती!!….#अक्स -
“मजबूरियाँ” #2Liner-107
ღღ__मजबूरियों का आलम कुछ ऐसा भी होता है “साहब”;
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मुसाफिर हूँ फिर भी, अपनी मंजिलें छोड़ आया हूँ!!….#अक्स -
“ख़ामोशी” #2Liner-106
ღღ__कह तो सब दूँ “साहब”, पर कभी ख़ामोशी भी पढ़ा करो;.वैसे भी मोहब्बत में, हर बात, कहने की नहीं होती!!……#अक्स -
“चाँद” #2Liner-106
ღღ__गलतफ़हमी में जागते रहे, रात भर उनको जगता देखकर;.भला क्या ज़रूरत थी चाँद को, यूँ रात में निकलने की!!….#अक्स. -
“दस्तक” #2Liner-105
ღღ__कल शब तुम्हारी यादों ने “साहब”, क्या दरवाज़े पर दस्तक दी थी?
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सुबह को मेरी गली में, कुछ क़दमों के निशान मिले थे आज!!…..#अक्स -
“क़दमों के निशान” #2Liner-104
ღღ__कल भी आये थे “साहब”, घर तक उनके क़दमों के निशान;
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वो मुझसे मिलते तो नहीं लेकिन, मिलने आते ज़रूर हैं!!….#अक्स -
“असर” #2Liner-104
ღღ__आपकी मोहब्बत का, इतना तो असर हुआ है “साहब”;
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कि अब अक्सर वहाँ होता हूँ, जहाँ होता नहीं हूँ मैं !!….#अक्स -
“ख्वाब” #2Liner-103
ღღ__गर इजाज़त हो आपकी, तो कुछ ख्वाब देख लूँ “साहब”;
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यूँ तो अरसा गुज़र चुका है, आप सुलाने नहीं आये !!….#अक्स -
“ख़त” #2Liner-102
ღღ__यूँ भी कई बार “साहब”, मोहब्बत का सिला मिला मुझे;.कि मेरे ख़त के जवाब में, मेरा ही ख़त मिला मुझे!!…..#अक्स -
“ख़ुदकुशी” #2Liner-101
ღღ__न जाने किस कशिश से कब्र ने, पुकारा था आज “साहब”;
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कि ना चाहते हुए भी मुझको, आज ख़ुदकुशी करनी पड़ी!!…#अक्स
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गुफ्तगू #2Liner-100
ღღ__गुफ्तगू बेशक नहीं करते, निगाहें फिर भी रखते हैं;
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ना जाने प्यार है कैसा, जो कभी बयाँ नहीं होता!!…..#अक्स -
कहाँ रहते हो #2Liner-96
ღღ__कहाँ रहते हो तुम भी, आज-कल “साहब”;
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बात-बिन-बात, दिल दुखाने नहीं आते!!….#अक्स -
“फुरसत” #2Liner-97
ღღ__कई बार खुद को, यूँ भी बहलाया है हमने “साहब”;
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कि वो आते तो ज़रूर, मगर फुरसत ही कहाँ होगी!!…..#अक्स -
“तजुर्बा” #2Liner-96
ღღ__कम उम्र में ही ज्यादा, तजुर्बे हो जाने का ये खतरा है “साहब”;.कि फिर वो उम्र तो रहती है, मगर कोई बच्चा नहीं रहता !!…..#अक्स. -
ज़िद #2Liner-95
ღღ__ये ज़िन्दगी अक्सर, ज़िद से नहीं चलती “साहब”;.कुछ धडकनों की खातिर, दिल से समझौता ज़रूरी है!!….#अक्स -
“वहम” #2Liner-94
ღღ__ये भी हो सकता है मुझको, फिर से वहम हुआ हो “साहब”
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फिर भी पूछ लो ना दिल से, क्यूँ मुझे आवाज़ देता है!!…#अक्स
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“ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी” #2Liner-94
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ღღ__ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी ही, लिखी है नसीब में “साहब”;
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कुछ लोगों का इस जहाँ में, अपना ठिकाना नहीं होता!!…..#अक्स.

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“इंतज़ार” #2Liner-93
ღღ__इंतज़ार लम्बा ही सही “साहब”, पर मैं समझौता नहीं करता ;
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हमसफ़र वो ही बनेगा मेरा, जिसे भी मेरी ज़रूरत हो!!…..#अक्स -
“ख़याल” #2Liner-92
ღღ__सुना है कि तुमको, बहुत ख़याल है मेरा “साहब”;
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मैं भी जा रहा हूँ खुद को, तेरे पास छोड़ के आज!!….#अक्स -
“गुफ्तगू” #2Liner-82
ღღ__वो तो अहद-ए-वफ़ा की खातिर, तुमसे मिलता रहा हूँ साहब;.वरना गुफ्तगू…..वो भी तुमसे…..क्या मज़ाक करते हो!!….#अक्स. -
मोहब्बत
तुम भी बेवक्त चले हो घर अपने,
जब हमने शहादत के स्मारक पर मोहब्बत लिख दी है ||
~सचिन सनसनवाल
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इलज़ाम #2Liner-82
ღღ__कुछ और इलज़ाम बाकी हों, तो वो भी लगा दो “साहब”;.अभी ना-काफ़ी हैं सितम तुम्हारे, मोहब्बत में, जाँ से जाने को!!…#अक्स. -
“बरसात” #2Linerr-81
ღღ__बिन मौसम बरसात यूँ, जला रही है मुझको “साहब”;
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जैसे शमाँ जलाती है, अपने परवाने को बुला के पास!!….#अक्स.
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“आदत” #2Liner-80
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ღღ__रात के सन्नाटे की, कुछ ऐसी आदत लगी है “साहब”;
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कि सुबह के शोर में हमसे, अब और जिया नहीं जाता!!….#अक्स.

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तेरी पहली नज़र का रंग
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ღღ__तेरी पहली नज़र का रंग ही, अब तक उतरा नहीं “साहब”;
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हम किससे खेलें होली, हमपे कोई रंग डालता नहीं !!…..
#अक्स.
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“रंग” #2Liner-79
.ღღ__क्यूँ उड़ा-उड़ा सा लगता है, तुम्हारे चेहरे का रंग “साहब”;.सब लोग तो कर रहे हैं, कि रंगों का त्यौहार आया है !!…..#अक्स.
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“मोहब्बत” #2Liner-….78
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ღღ__ना कोई उम्मीद, ना तड़प, ना ही इंतज़ार किसी का;
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कितना अच्छा होगा वो जहाँ, जहाँ मोहब्बत नहीं होगी !!….अक्स.

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“सज़ा”#2Liner-78
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ღღ__ख़ुदा से माँगते क्यूँकर, भला हम, दुआएँ उनके रोने की;
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वो इश्क करने लगें किसी से, सज़ा को इतना ही काफी है!!…..#अक्स.
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कबसे चेहरा नहीं देखा!! #2Liner-77
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ღღ__कल फिर आईने ने मुझसे, ये पूछ ही लिया “साहब”;.कि कहाँ रहते हो आज-कल, और कबसे चेहरा नहीं देखा!!…..#अक्स.
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“प्यार” #2Liner-76
ღღ__प्यार को अशआरों में, बयान करना बड़ा मुश्किल है;
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ये तो अच्छा हुआ, निगाहों की हर बात वो समझते रहे!!….#अक्स.

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“यादें” #2Liner-75
ღღ__सुलगती रहीं तुम्हारी यादें “साहब”, कल फिर से रात भर;
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मैं जलता रहा तमाम रात, फिर से आंसुओं की बारिश में !!….#अक्स
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“आखिरी ख्वाहिश” #2Liner-74
ღღ__चलो मिल ही लेते हैं “साहब”, फिर कभी न मिलने को;.यही ख्वाहिश बची है दिल में, इक आखिरी ख्वाहिश की तरह!!….#अक्स.
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“नाराज़गी” #2Liner-73
ღღ__ख़ुद से है, खुदा से है या तुझ से है “साहब”;.जाने क्यूँ, इक नाराज़गी-सी रहती है आज-कल!!….#अक्स.
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“इंतज़ार” #2Liner-72
ღღ__भला लफ़्ज़ों में इंतज़ार को, कहाँ तक लिखे कोई “साहब”;.कभी तुम खुद ही आके देख लो, कि अब थक रहा हूँ मैं !!….#अक्स.
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“लाजवाब” #2Liner-71
ღღ__भटक रहा था कबसे, मैं इक अनछुए सवाल की मानिन्द;.तेरे खामोश-से जवाब ने “साहब”, लाजवाब कर दिया मुझे!!….#अक्स.
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“रुक जाओ ना” #2Liner-70
ღღ__सुनो…तुम रुक ही जाओ ना मेरे पास, हमेशा के लिए;
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यूँ रोज़ आने-जाने में साहब, वक़्त बहुत लगता है !!……#अक्स.

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“बाज़ी” #2Liner-69
ღღ__एक बाज़ी गर जीत भी गया, बेईमानी से वो साहब;
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महफिल फिर से सज जायेगी, कि वफात बाकी है मेरी !!……#अक्स -
“तलब” #2Liner-68
ღღ__तुमसे मिलने की तलब, कुछ इस तरह लगी है “साहब”;
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जिस तरह से कोई मयकश, मयखाने की तलाश करता है !!…..#अक्स.

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“शिकायत” #2Liner-67
ღღ__बहुत खामोश रहते हो, तुम भी आज-कल “साहब”‘;.ख़ुदा से है शिकायत या, खुदी से नाराज़ रहते हो !!…..#अक्स.
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“सिल-सिला” #2Liner-66…….
ღღ__मोहब्बत थी तुझसे ही, तुझसे ही हर गिला रहा;
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उम्र-ए-शब-ए-रोज़ का, बस यही सिल-सिला रहा !!……#अक्स.

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“मोहब्बत” #2Liner-65….
ღღ__बिछड़कर देर तक तुझसे, उस दिन मैं सोंचता रहा “साहब”;.मोहब्बत गर ना हुई होती तो, मेरा क्या हुआ होता !!……#अक्स.

