Tag: हिन्दी शायरी

  • “सज़ा”#2Liner-46

    ღღ__सज़ा में एक ही लफ्ज़ है, तेरे हर इक गुनाह का मेरे पास;
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    कि तुम इतने मासूम हो साहब, जाओ “माफ” किया तुम्हें!!……‪#‎अक्स‬
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  • “खुशबू” #2Liner-45

    ღღ__मेरे होंठों पे आज भी, कायम है तेरी खुशबू;
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    इनपे भला शराब का, अब असर कहाँ होगा !!…….‪#‎अक्स
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  • “सुकून” #2Liner-44

    ღღ__कब तलक भटकोगे आखिर, महज़ सुकून की तलाश में;
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    ये वो शै है “साहब”, जो शायद तेरे नसीब में ही नहीं !!……‪#‎अक्स
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  • “आरजू” #2Liner-44

    ღღ__आरजू मौत की नहीं लेकिन, अब जी के भी क्या करना है;
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    ज़िन्दगी जी भर के यूँ जी है, कि अब ‘जी’ भर गया शायद!!…..#अक्स
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  • “मौत” #2Liner-43

    ღღ__मौत को भी आखिर, गुमराह कब तलक करते;
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    ज़िन्दगी छोड़ दी हमने, हर लम्हा तुम्हारा करके !!…….‪#‎अक्स‬

  • “नींद” #2Liner-42

    ღღ___हाँ ये सच है की हम जागेंगे, उम्र-भर तन्हा तेरे बगैर;
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    मगर नींद तुझको भी नहीं आएगी, किसी और की बाँहों में!!…..#अक्स
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  • “खुशनसीब” #2Liner-41

    ღღ___अब ये कैसे कह दूँ “साहब”, कि खुशनसीब नहीं हूँ मैं;
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    आखिर एक अरसे से उसको अपना, नसीब कहता रहा हूँ मैं !!….

    #अक्स

  • “ताबीज़” #2Liner-40

    ღღ___कोई ताबीज़ आता हो, तो पहना दो मुझको “साहब”;
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    तुम्हारे इश्क़ का जूनून, अब सर से उतर रहा है !!…….‪#‎अक्स‬

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  • “लम्हा” #2Liner-39

    ღღ___मैं हँस रहा था जिस लम्हे में, बस अभी-2 तो गुज़रा है;
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    और लोगों से सुना है, गुज़रा हुआ वापस नहीं आता !!……‪#‎अक्स‬

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  • “ख्याल” #2Liner-38

    ღღ__तुमने रोका है इनको “साहब”, या हम भूलने लगे हैं अब;
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    कि अब ख्याल भी तेरे, हमसे मिलने नहीं आते !!………‪#‎अक्स‬

  • “गम” #2Liner-37

    ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे;
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    कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……‪#‎अक्स‬

  • “गुमराह ” #2Liner-36

    ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
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    कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..‪#‎अक्स‬

  • “निगाह-ए-इश्क़” #2Liner-35

    ღღ__अक्सर भीग उठती हैं “साहब”, पलकें तेरी नज़र-अन्दाज़ी से;
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    निगाह-ए-इश्क़ पे कोई फ़र्क, ज़माने का नहीं पड़ता !!………‪#‎अक्स‬

  • “हद” #2Liner-34

    ღღ__ना जाने कैसे तुझको, “बे-हद” चाह बैठा “साहब”;
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    ये दिल जो अक्सर मुझको, मेरी “हद” बताता था !!………‪#‎अक्स‬
  • “इन्तजार” #2Liner-33

    ღღ__नज़रों को इंतज़ार की, सजाएँ इतनी भी ना दो “साहब”;
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    ये बारिशें बिन मौसम की, हमसे अब देखी नहीं जाती !!…….‪#‎अक्स‬
  • “आगाज़” #2Liner-32

    ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”;
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    बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स
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    समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
  • “देखा नहीं जाता” @2Liner-31

    ღღ__दूर आप जा रहे हो ‘साहब’, या फिर ये दिसम्बर;

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    कोई भी दूर जाये हमसे, ये देखा नहीं जाता !!…….

  • #2Liner-30

    कुछ तो खता तुम्हारी, बेशुमार यादों की है ‘साहब’;
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    ღღ___यूँ ही बे-सबब कोई, आवारा नहीं होता !!…….‪#‎अक्स‬
  • “आवारगी” #2Liner-29

    ღღ__इक उम्र गुज़ारी है आशिक़ी में, तो जाना है;
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    कुछ नहीं मिलता, इसमें इक आवारगी के सिवा !!……..‪#‎अक्स‬

  • “साँसें”

    ღღ__बाकी हैं चन्द साँसें अब, बेज़ार से दिसम्बर की;
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    एक नए दिन की तलाश में, पूरा साल ही जा रहा है !!…….‪#‎अक्स‬
  • “ठंड” #2Liner-28

    ღღ__माफ़ करना पर आज, कोई शायरी नहीं है “साहब”;
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    कि रिश्तों की ठंड में, लफ्ज़ भी जम गये मेरे !!……..‪#‎अक्स
  • ” फैसला” #2Liner-27

    ღღ__मेरे गुनाह-ए-इश्क़ का, कोई फैसला तो सुना दो “साहब”
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    इस दिल को समझाने में, कुछ वक़्त भी तो लगता है!!…..‪#‎अक्स‬
  • “सितम” #2Liner-26

    ღღ__जो तुम कर रहे हो “साहब”, सितम की इन्तहा नहीं तो क्या है;
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    कि दूर भी जा रहे हो मुझसे, वो भी ज़रा-ज़रा कर के !!………‪#‎अक्स‬
  • “वफ़ा” #2Liner-25

    ღღ__भला और क्या दूँ तुझको, सुबूत अपनी वफ़ा का मैं;
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    कि ख़ुद का भी ना हुआ हूँ, जबसे तेरा हुआ हूँ मैं !!…….‪#‎अक्स‬
  • “ख्वाहिशें” #2Liner-24

    ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”;
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    कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……‪#‎अक्स‬
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  • “बेबसी” #2Liner-23

    ये सर्दियों का मौसम, और ये तन्हाईयों का आलम;
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    कहीं जान ही ना ले-ले, इनसे मिलके बेबसी मेरी !!……‪#‎अक्स‬
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  • “याद” #2Liner-22

    ღღ__इस कदर भी याद, ना आया करो “साहब”;
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    मेरी खुशियों की नींद में, खलल पड़ता है !!…….‪#‎अक्स‬
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  • “गुनाह” #2Liner-22

    ღღ___तुझको पाने की कोशिश भी, तू जो कह दे तो ना करूँ;
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    पर पाने की आरजू रखना, तो कोई गुनाह नहीं !!………‪#‎अक्स‬
  • कोई मेरा नहीं होगा !!#2Liner-21

    ღღ__कुछ इस तरह से लिक्खा है, उस ख़ुदा ने मेरा नसीब;
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    कि मैं तो सबका हो जाऊंगा “साहब”, कोई मेरा नहीं होगा !!…….‪#‎अक्स

  • “इन्तजार” #2Liner-17

    ღღ___ज़िन्दगी तो कटती जा रही है “साहब”, इन्तजार की कैंची से;
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    और सिलसिला-ए-इन्तजार है, कि कटता ही नहीं कभी !!…….‪#‎अक्स
  • “आसमाँ” #2Liner-16

    ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता;
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    कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..‪#‎अक्स‬

  • क्या होगा. . . . . .❤

    क्या होगा. . . . . .❤

    कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा;

    ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा !

     

    कि आकर लफ्ज़ होठों तक, पलट जायेंगे मुमकिन है;

    किसी से कह दिया, और हो गयी, रुस्वाई तो क्या होगा!

     

    करोगे जज़्ब कैसे तुम, जो कहना ना हुआ मुमकिन;

    ख़ुशी की महफ़िलों में आँख, भर आई तो क्या होगा!

     

    ये माना जीतने का हुनर है, तुम्हारे पास मोहब्बत में;

    पर सोंचते हैं, गर किसी से, शिकश्त पायी तो क्या होगा!

     

    रखो बेशक हमारी खामियों का, गुनाहों-सा तुम हिसाब;

    कभी सोंचा है, जब तुम्हारी, ज़फाएँ सामने आयीं तो क्या होगा!!. . . . . #अक्स

  • उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

    उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

    उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है
    सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी

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