ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे;
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कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……#अक्स
“गम” #2Liner-37
Comments
4 responses to ““गम” #2Liner-37”
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nice one ankit 🙂
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thanks a ton Dear!! 🙂
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बहुत खूब
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बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां
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