अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे

अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे (२)
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे (२)

अब मुझे गम का गम, ना ख़ुशी की ख़ुशी (२)
है अंधेरा भी मेरे लिये रोशनी
मैं जीयूं जब तलक (२), आजमा ले मुझे (२)
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे
अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे

देखकर मैं किसी की ख़ुशी ना जलूं (२)
राह इंसानियत की हमेशा चलूँ
भूल जाऊं तो (२), जग से उठा ले मुझे (२)
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे
अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे


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2 Comments

  1. राही अंजाना - July 21, 2018, 5:41 pm

    Waaaah

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