अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा
राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा

उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए
उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा

वेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए
अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहा

शम्मा के दर पर बसर कर दी जिंदगी सारी
परवाने को शम्मा में जलने का इंतजार रहा

उन्हे देख देख कभी गज़ल लिखा करते थे हम
अब न वो गजल रही और न वो हॅसी गुबार रहा

sign


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Panna.....Ek Khayal...Pathraya Sa!

6 Comments

  1. Lucky - January 26, 2018, 11:17 am

    बहुत बहतरीन मेरी रचना प्रतियोगिता में है वतन प्लीज कमेन्ट करें

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 1:10 am

    वाह बहुत खूब

  3. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 7:37 am

    वाह

  4. Abhishek kumar - November 25, 2019, 1:27 am

    👏👏

  5. Kanchan Dwivedi - March 25, 2020, 11:36 pm

    Nice

Leave a Reply