अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना है

कोई जमीन अभी भी है जहां मैं अभी तक गया नहीं हूं
कोई आकाश बचा है अभी भी जहां मुझे पहुंचना है
दो परतों के दरम्या मैं ठहरा हआ
अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना…


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3 Comments

  1. Panna - November 28, 2015, 4:31 pm

    nice poetry..बदलाव का बीज..nice

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:15 pm

    वाह बहुत सुंदर

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