अभी बाकी है

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जीने की लय में,

अभी सरगम बाकी है,

बारिशो के बाद,

इन्द्रधनुषी छटा आती है,

चकाचौंध रोशनी न सही,

अभी झरोखों से किरण आती है,

जिंदगी कहीं न कहीं ,

अभी बाकी है ।

चरमराई सी चारपाई में,

अभी दम बाकी है,

दो पहर न सही,

रात में नींद तो आती है ,

जिंदगी कहीं न कहीं ,

अभी बाकी है ।

बसंती हवा न सही,

पतझड़ की बयार तो आती है,

नव जीवन की आस ,

अभी बाकी है ।

सरपट रास्ते न सही,

पगडंडी तो मुझ तक आती है,

सूख गयी दरिया तो क्या,

पर्वतो पर बर्फ ,

अभी बाकी है,

कपकपाती लौ सही,

चिराग में तेल,

अभी बाकी है,

जिंदगी कहीं न कहीं,

अभी बाकी है ।।

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