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आतंकबादी

मैं क्यों सोचु वो मेरे बारे में क्या सोचेगी,
मुझे अच्छा लगता हैं उसे रोज सुबह सुबह गुड मोर्निंग विश करना,,
जानता हूँ कोई रिप्लाई नहीं आएगा फिर भी उसके मैसेज का इन्तजार करना ,,,
अरे अच्छा लगने से याद आया कि वो जब अपने दांतों के बीच में पेंसिल को दबा कर कुछ सोचती हैं,,
हाए
क़त्ल-ए-आम हो जाता हैं,
कई बार तो मुझको लगता हैं की सरकार को उस बैन लगा देना चाहिए,,
यार इतना बड़ा कातिल आजाद कैसे घूम सकता हैं,,
यानी कातिल तो AK- 47 ले कर घूमते हैं सडको पर,,
बड़े बड़े हथियार ले कर लोगो को कैद में रख कर परेशान करते हैं
और वो ना ही किसी की ओर देखता हैं,,
और ना ही किसी को भाव देता हैं,,
मगर लोग बाग़ हैं कि पागल हुए पड़े हैं उसकी कैद में जाने खातिर,,
पहली बार देखा हैं ऐसा आतंकबादी

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पेशे से इंजीनियर,,, दिल से राईटर

16 Comments

  1. Anjali Gupta - October 18, 2015, 6:55 pm

    different but nice!

  2. Mohit Sharma - October 18, 2015, 7:24 pm

    Gazab ankit bhai

  3. Mohit Sharma - October 18, 2015, 7:26 pm

    Jo AK47 rahti he mere saamne wale ghar me
    kaash kabhi chal bhi jaae to kabhi deedar ho
    kabhi awaz hi sunane ko mil jaae kahin se
    chu le to zindagi gul-e-gulzar ho 🙂

  4. Mohit Sharma - October 18, 2015, 8:00 pm

    रिमझिम रिमझिम बारिश हुई आज
    जोर की तूफ़ा आंधी बहुत तेज चले
    रिवोल्वर तो रोज चलती है दोस्त
    कभी हमारे यहां AK 47 भी चले…
    kaisi lines he bhai ankit..kuch inke aage likho yaar http://saavan.in/mushaira/#comment-874

  5. Akanksha Malhotra - October 19, 2015, 2:43 am

    nice 🙂

  6. Panna - October 19, 2015, 9:40 pm

    🙂 🙂 bahut khoob..AK47 ko bhi ishq se jod diya…

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