इरादा

जो कभी किया ही नहीं वो वादा याद आया,
मुझको तेरी गली से निकला तो वो इरादा याद आया,
न मन्दिर न मस्ज़िद थी राह में मेरे कोई,
फिर सर झुका तो तेरा चेहरा याद आया।।
राही (अंजाना)

Comments

One response to “इरादा”

  1. ज्योति कुमार Avatar

    बहुत खुूब
    राही जी

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