एक और इंतजार
सर्दियों के दिन कितने मासूम से दिखते हैं
छोटे बच्चे की तरह ऊनी कपडे में लिपटे हुए
तुम्हारे आने के दिन थे वो
मैं देर तक पटरियों पर बैठे
इंतज़ार सेंका करती
रेल को सब रास्ते याद रहते
एक मेरे पते के सिवा
सूरज डूबता पर तुम्हारा इंतज़ार नहीं
मैं बैठी रहती
चाँद को गोद में लिए हुए
तुम चुपके से नींद में आते
फिर धुंध पर पाँव रख कर लौट जाते
एक और इंतजार मेरे नाम लिखकर
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