एहसास
तेरी तस्वीर बनाने में जब भी जुट जाया करता हूँ,
खुद ब खुद ही जाना तुझसे जुड़ जाया करता हूँ,
रंगों की समझ रखता नहीं हूँ शायद यही सोचकर,
एहसासों का ही अंग तुझपे जड़ जाया करता हूँ,
पहचान नहीं कर पाती जब तुम अपनी खुद से,
चलाकर अपनी ही तुझसे अड़ जाया करता हूँ।।
राही अंजाना
bahut khoob sir
धन्यवाद
बहुत सुंदर रचना
Good