कविता

जब भी मै अकेलेपन का बोझ,

महसूस करता हूँ दिल पर अपने

तो कलम खुद ब खुद बन कर साथी

हाथ में मेरे आ जाती है,

और वो बोझ उतर कर दिल पर से ,

कागज़ पर सिमट आता है,

और उसका यह सिमटना ही,

आगे चल कर “कविता” कहलाता है.

 

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