कहीं कोई इक लफ़्ज ही खिल जाये

कोई आफ़ताब तो नहीं जिंदगी में
कहीं कोई दीया ही जल जाये
कोई कविता हम कह नहीं पा रहे है
कहीं कोई इक लफ़्ज ही खिल जाये

Related Articles

A pray for india

जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे…

Responses

New Report

Close