किस्मत को अपनी तू कस मत,
देदे ढील तू अपने अरमानों को,
सोते हैं तो सो जाएँ किस्मत जगाने वाले,
जागने दे तू हर घड़ी अपने ख़्वाबों को,
किस्मत को अपनी…
बदलती नहीं है हाथों को लकीरे सुना है,
जिनके हाथ ही नहीं तू देख उनके इरादों को,
उठती हैं थमती हैं समन्दर में लहरें पल-पल में,
जो टकरा कर भी लहर लौटती है फिर किनारे से टकराने को,
तू देख उसकी हिम्मत ए हिमाकत को॥
किस्मत को अपनी..॥
– राही (अंजाना)
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