कुछ भी

कुछ भी उसमें खास नहीं था,
फिर भी उसे दिल में बसाया था,
कोई हमसे छीन ना ले..
हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था

मेरी तकदीर है,
मेरी जन्नत की लकीर है,
खुदा आज भी उसका इंतजार है,
यदि दुआएं मेरी तुझे कबूल है|
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
ऋषि कुमार “प्रभाकर”


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5 Comments

  1. Pragya Shukla - September 16, 2020, 3:06 pm

    Kya baat hai

  2. Geeta kumari - September 16, 2020, 3:13 pm

    Beautiful lines

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 16, 2020, 4:53 pm

    अतिसुंदर

  4. Pragya Shukla - September 16, 2020, 5:19 pm

    अच्छा…आज भी!

  5. Pratima chaudhary - September 16, 2020, 8:40 pm

    Very nice poetry

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