Rishi Kumar's Posts

दर्जी

कविता- दर्जी ——————- फटी पैंट मेरी, ले दर्जी जी के घर जाता हूं, टूटी फूटी मशीन के संग, बैठा बुजुर्ग दर्जी हैं, देख मुझे मुस्कुराया वह, ढलती शाम तक में जो, 20 रुपए कमाया वह, कारण पूछा हंसने का, खुदा को दिल से धन्यवाद दिया, पहला ग्राहक दुकान पर आने का, बस एक हुनर था दर्जी में, बाकी अब उसमें सब कमियां थी, सुनो…… चश्मा उसका टूटा था, फटा कुर्ता उसका था, प... »

बुखार में मां की याद आई

कविता-बुखार में मां की याद आई ——————————————- वर्ष बाद बुखार हुआ, मानों- अंतिम समय ने घेर लिया, चारों तरफ दिवाली का उत्सव था, हम लिए बुखार अपनी, कमरे में- खुद को कैद कर लिया, हमें क्या पता दीप कैसे जल गए, सुनते रहे कानों से, पटाखे साउंड की आवाज, कहीं मधुर तो, कहीं घोर आवाज हो गए, बल नहीं था मुझ में, छत पर चढ़कर दीप... »

डॉक्टर साहब

कविता- डॉक्टर साहब ——————————- देखिए डॉक्टर साहब जी, बेटा क्यों अब रोता हैं| रात अंधेरी काले बादल, रिमझिम बरसा पानी था, हाय पिताजी प्रेम तुम्हारा, कितना अद्भुत अच्छा था, देखा हमकों रोतें जैसे, रख कंधे पर दौड़े चले, दवा कराने कई कोश चले तुम, रात अंधेरी काट चले, इतनी जल्दी पापा तुमको, नंगे पाव ही दौड़ दिए , ठेश सहें पग पग पर, दर्द कभी ना सह... »

खिलौना मत बनाना

कविता-खिलौना मत बनाना ————————————– हे कुम्हार, मत बना खिलौना हमें, जमाना खेलें , तोड़ के, मिटा दे मेरी हस्ती को, बेचे किसी बाजार में, कोई खरीदें मुझे, बाजार की सबसे सस्ती वस्तु समझ, मिट्टी से बना हूं, मिट्टी में ही मिल जाऊंगा, किसी के घर की शोभा, किसी बच्चें की मुस्कान, किसी मेले की शान, आपस में लड़े बच्चें, कोई हंसे तो... »

चाय हटा लो

कविता- चाय हटा लो ————————— माफी देकर, गले लगा लो, दुख होता हैं, होठ से अपने, चाय हटा लो| जो हक मेरा हैं, कुल्हड़ क्यूं छीन रहा, देख देख रोते हैं, कुल्हड़ मन माना, होठों से चिपक रहा| मत बे दर्द बनों, हें मिट्टी के बर्तन, तरस खाओ हम पर भी, हम भी मिट्टी के बर्तन| हममें तुममें अन्तर इतना, हमसे जलकर दूर रहें, तुमसे जलकर पास रहें, कह देना, होठ से उस... »

गुड मॉर्निंग भेजा

कविता- गुड मॉर्निंग भेजा ———————————- गुड मॉर्निंग भेजा, हमकों एकSMS मिला, क्षण भर हम ठहर गए थें, हाय कोरोना तेरे कारण भूल गए थें, अपने सभी बिछड़ गए थें, जब से आया कोरोना हैं, याद रहा हमकों सब कुछ, बस भूल गए थें- जन्मदिन आज तुम्हारा हैं, क्या दे सकता हूं क्या ले सकता हूं इस खुशी के पल में हम, बस चंद शब्द हैं उपहार हमारे, परहित स्वहि... »

अपनी भूख मिटाने के लिए

कविता-अपनी भूख मिटाने के लिए ——————————————— भूख मिटाने के लिये, परिवार चलाने के लिए, लेबर चौराहे पर जाते हैं, आतें हैं मालिक कई मजदूरी की मोल भाव करते हैं | मजदूरी मिलती ना, गाली मिल जाती है, बड़े नसीब से काम मिले, मालिक तानाशाह ,निकल जाते हैं मनमानी से काम कराते हैं सम्मान नही देते हैं, मजदूर समझ इंसानों को... »

बदनाम हो गये

बदनाम हो गये ———————— बदनाम हो गये जमाने के नजरों में, वजूद खो दिया खुद का उसे मनाने में, इल्जाम लगता है इसे कोई और मिल गई, क्या पता उसे – रोते-रोते मेरी जिंदगी खाक हो गई, वह हस्ती है किसी के हाथों में हाथ रखकर, हम रो रहे हैं माथे पर हाथ रखकर, शायद उसे – आज नहीं तो कल समझ आ जायेगा, आज जिसके साथ हूं मैं, वह सिर्फ होटल सिनेमा पार्क तक ले जा... »

जितने बदले नंबर तुमने

जितने बदले नंबर तुमने —————————— जितने बदले नंबर तुमने हर नंबर तेरा मिल सकता , स्वाभिमान है बीच में आता है, क्योंकि तुने ही मुझे ठुकराया है, मत सोच हमें कोई नहीं मिल सकता, पहले , अब भी , मिले थे ,कईयों चेहरे, खुदा ही जाने क्यों तेरा चेहरा भाता है, रोने के लिए या- कुछ करने के लिए, खुदा ने ऐसा दिन दिखलाया है, बस इतना किसी के फोन से कह दे, ह... »

यादों में रहेगी

यादों में रहेगी —————— बेचैन सा रहता हूं, बन पागल फिरता हूं, मिल जाए मुझे पुनः, हर रोज दुआएं करता हूं, मान दी हमने कई मन्नते, कभी मस्जिद में भी चादर चढ़ाया करता हूं, खुदा खुशनसीब हूं या बदनसीब हूं, आज आखिरी बार तुझसे, यह बात पूछने आया हूं, मिले मुझे तकदीर कहूंगा ना मिली मुझे ना फिर किसी से प्यार करूंगा, मेरी थी मेरी होकर रहेगी, हो हकीकत ना पर यादों में रहेगी, &#... »

तकिया

तकिया ————- रोती रही कईयों दिन तक, दोस्त खबर भी देते रहें, हम भी रोते घर बैठे, जब कोई पूछे हाल मेरा, झूठी हंसी दिखाते रहें, कब सोया कब जागा हूं, मैं जानू या रात ही जाने, आकर देख मेरे तकिए को है गीली आंसू से, उसे नहीं सिखाया हूं, कैसे धूप में रख दूं उसको, तकिया है कपड़ा ना, डरता हूं घरवालों से पूछेंगे कैसे भीगी कुछ भी जवाब दे पाऊं ना ——————... »

भूल नहीं सकते

भूल नहीं सकते ———————– भूल नहीं सकते वो रातें, वो मनहूस घड़ी थी या मेरी किस्मत फूटी, एक नादानी से जंग छिड़ी, जब से बिछड़े ना कभी मिले, कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका, खबर मैं ले लूं – जब जब याद सताए चेहरा उसका ——————————————- **✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’&... »

अपना इलाहाबाद

कविता- अपना इलाहाबाद ———————————– दिन भर टहल रहे थे, पार्क सहित संगम में, देख दशा हम शोक में डूबे, अपना इलाहाबाद है ऐसा| एक तरफ तो न्यायालय है, एक तरफ संगम है, एक तरफ तो शिक्षा मंदिर, एक तरफ जमुना की धारा है| यहीं पड़ा- स्वराज भवन भी, यहीं खड़ी- आजाद की मूरत भी| सब कुछ मिलेगा जो चाह तेरी, प्यार मोहब्बत – राजाओं का चिन्ह ... »

प्रेम से भिक्षा

कविता- प्रेम से भिक्षा —————————- प्रेम है शिक्षा, प्रेम से भिक्षा, प्रेम ही सब कुछ , बिना प्रेम नहीं- जग मे जीने की इच्छा| प्रेम ही देखो, युद्ध कराये, प्रेम ही देखो, बुद्ध बनाये| मातृभूमि से, प्रेम इतना था, छोड़ के कुनबा जान गवाये| दो दिल जुड़ते ही, टूट जाते हैं, लाख मुसीबत सहकर भी, अनजाने पथ से होकर, परदेश में जा के जीते हैं| लाख बुराई हो कलु... »

सभी सो रहे

कविता- सभी सो रहे —————————- सभी सो रहे हैं, घरों में पड़े हैं| हम ही हैं दीवाने, अभी जग रहे हैं| बड़ा दुख है हमको जो जग रहे हैं। दिखे ना किनारा, चले जा रहे हैं। सभी के घरों पर, समय पर है भोजन| हम है छात्र, धुले ना है बर्तन| बजे बारह रात जब, सब्जी बन रही है| लिए हाथ कॉपी, पढ़ाई हो रही है|सभी….. कई वर्ष बाद में, पेपर है आया| नकल हुआ भारी, ... »

रावण हूं

कविता- रावण हूं ———————- रावण हूं, राम नही , राक्षस हूं, भगवान नही, अब की बार दशहरे में, पहले खुद राम बनो फिर आग लगाना मुझे| रघुकुल की पता होगी वे सत्य वचन पर, अटल रहे, चक्रवर्ती- विश्व विजेता, धर्म सत्य गौ, विप्र पूजक रहे। उस घर की, मर्यादा थी, वचन के कारण, जिस राजा ने मरघट पर काम किया, उसी का स्वाभिमान था – राम, मर्यादा उनसे, निकलती हैं, पिता प्रेम... »

इबादत

कविता- इबादत ———————— परमेश्वर तेरा, धन्यवाद करता हूं, तेरी इबादत करता हूँ तुझे प्रणाम करता हूं| जब जब पुकारा, तूने साथ निभाया, मेरी मुराद पूरी करके, मुझे खुशहाल बनाया, दिया मुझे सब कुछ दिया, घर-परिवार दिया, सम्मान दिया, डूब रहा निराशा में धन्यवाद है तुझे जो मुझ पर आशा का संचार किया। भूखा मुझे, न रखा कभी, सूखी सही, दो वक्त की रोटी दी। खुश हूं, खुशनसी... »

कन्या दान करोगे

आया है, नवरात्र का दिन, एक विनती, सबसे से करते हैं,| श्रध्दा और, विश्वास भी हो, प्रेम और, पूजा पाठ भी हो | मूर्ति विसर्जन करना भाई, प्रदूषण का ध्यान भी हो| ज्योति जलाओ, प्रेम दिखाओ, मां के भवन में आनंद मनाओ, नव दिन सब ध्यान धरो, कोविड नियम का पालन करो| संकल्प दिलाओ, सब ले लो भाई, माँ के नव दिन चरणों में, नारी सुरक्षा का संकल्प उठाओ, बैठे माँ के नव दिन चरणों में| दो वर्षीय बेटी, रेप में मर जाएँ, फि... »

डांट

कविता- डांट —————– ओ शब्द गूंज रहा, सामने होकर, सौ सवाल कर रहा| सुधर गए, समझ गए, संभल गए, या किसी की बातों में, फिसल गए, नारियल से सीख, गन्ने से सीख, क्रोध, ग्लानि घृणा महसूस हो, चला जा गाँवों में कुम्हार की थपकी से सीख ——————— ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

मेरा मित्र

कविता- मेरा मित्र ———————– मेरा मित्र- कमी बताया करता है, जब भी मिला हूं उससे, पढ़ कर मेरे चेहरे को, हकीकत बताया करता है| मेरी गलती – खुद न समझ सका, दे न सका धोखा ओ, जो था वही दिखा सका, उसे सच दिखाने की बिमारी है सख्त पहरेदार मेरा, गुनाह करने से डरता हूं, चेहरा कैसे दिखाऊंगा, सत्य हठी निष्पक्ष मित्र मेरा, डरता नहीं, सत्य ही दिखाएगा| साफ़ रहो, ब... »

हराम है

कविता -हराम है ——————- हराम है, आराम मेरा, आ आराम करले, जाॅन हैरान मेरा| ख्याल रखले, एक पल मेरी, तुझसे भिन्न न पहचान मेरी| तेरे ख्याल में, खुद ख्याल खो बैठा हूं, हे आत्मा- खुद पहचान बनाने में, तुमसे पहचान बनना, आज भूल बैठा हूं| ————————– ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”—- »

बड़ी फ़िक्र थी

कविता- बड़ी फ़िक्र थी —————————— बड़ी फ़िक्र थी उसे मेरी, सौ बार समझाती थी, कालेज समय से आया करो, कमियाँ रोज बताया करती थी| नाखून बड़े हैं बाल बड़े, कालर इतना गंदा है, जगह देख क्यों नहीं बैठते हाथ तुम्हारा साफ नहीं है| शर्ट में कैसे धूल लगी, क्रोध में आकर चिल्लाती थी, बटन खुली हैं हीरो बनोगे, खुली बटन बंद करती थी| खूब खर्च करो पैसा, खुद क... »

गटर

कविता-गटर —————– प्यास थी सरिता की, पोखर भी, नसीब ना| सोचा था, अपना भी, विशाल सा, घर होगा| रंग बिरंगी, दुनिया में प्यारा सा कुनबा होगा| चढ़ गिरि से झाँक रहा, निर्झर दिख जाए| रुक रुक उतरा मैं दौड़ चला सीटी, देख गटर रोने लगा, शहर संग- गटर भी सुखा था| साथी सब तितर बितर हो बिछड़ गये थे, भटक भटक- दम तोड़ दिये थे| दम छूट गया, गटर किनारे, जहाँ का पता मिला, वहां पानी न ... »

कालेज का पहला दिन

कविता- कालेज का पहला दिन —————————————– कालेज का, पहला दिन, एक अनजाने से , पहचान हुई, पता नहीं था , उसके बारे में- फिर भी दिल के, पास हुई, दिल का धड़कना, बढ़ गया मेरे, जब उसकी नजरें, मेरे चेहरे पर हुई| झूठ हसी- हसता चेहरा बनाया, डरता था मन ही मन, कहीं कुछ बोल न दे, मै घायल हुआ- जब उसने, चेहरे पर मुस्कान दिखाया, मै ... »

कालेज का नियम

मुक्तक- कालेज का नियम ——————————— अनजाने से पथ पर, एक अनजाने से पहचान हुई, दो दुनिया के थे दोनों, मानों अंबर का मिलन धरती से हुई| देखा उसको पहली बार, भूल गया खुद होशो हवास, सारी खुशियां संग संग थी, पपीहा बन देख रहा- अब स्वाति बरसे तो बुझती प्यास| एक मिनट दो मिनट, बीत गये चालीस मिनट, टीचर आये चले गए, भुल गया कालेज का नियम| —... »

सबका समय

कविता- सबका समय —————————– सब का समय आता , सबको समझ न आता है, आया जिसको समझ अगर, खुद को समझा पाया है, छोड़ दिया वह, सब से लड़ना, खुद के लिए या- भारत मां के लिए लड़ता है| मान सम्मान, कुल का गौरव, पद प्रतिष्ठा, खुद का एक रिकॉर्ड बने, उन से लड़ना बंद किया, खुद कि नजरों में, खुद जिनकी न पहचान बने| दश बाई दश के, बन्द कमरे में, ले किताब वह हाथो... »

वर्ष पुरानी

कविता -वर्ष पुरानी ————————– आज अचानक, कुछ खोज रहा था, कई वर्ष पुरानी कॉपी मिलती है| मैं साफ किया उसे, फिर खोल उसे पढ़ने लगा, पढ़ते-पढ़ते, मै रोने लगा| उसमें पड़ा गुलाब संग एक खत था, सूख गया गुलाब पर, खत यादें ताजा कर डाला, कॉलेज की मेरी दोस्ती, खत ने सब कुछ कह डाला| उसमें कुछ ऐसी बात लिखी थी| परसों कॉलेज आओगे, मत लंच बॉक्स लाना, परसों जन्मदिन ... »

विरह वियोग

कविता- विरह वियोग —————————— अब हम किससे अपना दर्द कहे, कहां हम जाएं की- अपने दर्द की दवा मिले| जब भी चेहरा याद आता है, शृंगार रस के सपनों में डूब जाता हूं, जैसे ही चेहरा दुख देता है- विरह वियोग में हो जाता हूं| उसकी एक गलती- आंखों में आंसू भर देती है, मेरा सच्चा साथी, कलम कॉपी, हस के हमसे कहता है, उठा मुझे और भड़ास निकाल ले, या मन में उठ... »

कसम

कविता- कसम ——————- सौ बार कसम मैने खाई , फिर खुद ही उसको तोड़ा था, जब जब होती नादानी मुझसे, रब के आगे रोया था, दिल खोल के कहता- हर एक बातें, प्रभु गलती मेरी माफ करो, नादानी और जवानी मे, अज्ञानी और सयानी मे, भुल गया था सपत मै अपना, भुल किया खुद हाथो से| ना चोरी किया ना हत्या किया, ना जग मे कोई कुकर्म किया, मात पिता औरों के संग, खुद कि बहना या गैरो के संग, अपनों ज... »

पिता पुत्री का संवाद

कविता- पिता पुत्री का संवाद ————————————- तेरे खातिर दर-दर भटके, हर धर्मों का चौखट चुमू, आजा बेटी मां के सूनी आंचल में, मैं सीता मरियम नाम से बोलूं| तुमको पाने के खातिर मैं, कहां-कहां नहीं जाता हूं , चारों धाम कि यात्रा करके, तू आए सब से विनती करता हूं| मान सरोवर बालाजी के धाम गया, शिर्ड़ी चौखट अंबे मां के शरण गया, मैहर मां कि... »

सोना बाबू

हास्य कविता,सोना बाबू ————————- रात रात जग के हम पढ़ाई करते थे| मेरे पड़ोसी- फोन पकड़ के चुमा करते थे| आया समय जब पेपर का, वो रोया करते थे| सोना बाबू फेल हुए, बाबू लड़की से- कोचिंग करते थे| रात रात जागकर, वो उपदेश देते थे, चटनी खा के जीवन गुजरे, लाखों में वह बात करते थे| बड़े घरे के बिगड़े बच्चे, पैसा खूब उड़ाते हैं| खैनी गुटखा सिगरेट पीते- रोज सिनेम... »

सयानी

कविता- सयानी ———————– तेरी एक ज़िद से, सभी रो रहे हैं| पापा मम्मी चिंता करके, ओ भी रो रहे हैं| इण्टर के बाद दीदी, घर से ही बाहर हो SSC मे जाॅब बा, देके गई दिलासा हो| चाह मेरी हम भी पढ़ले, पैसा नाही घरे बा| कब तक नोकरी मिली दीदी, पुछे लोगवा सारा बा| बैंक वाला नोटिस भेजे, खेती क उधार बा | भारी वर्षा पाला से, खेती सब बेकार बा| धान विकि कम भाव से, सेठ से... »

कोरोना काल मे

मत अजमा मेरी मोहब्बत को तेरी एक झलक पाने को, सौ बार तेरी गलियों से गुजरा हू, जब सब छोड़ दिये शहर को- कोरोना का काल मे, तेरी कसम ! तुझसे मिलने के लिए सौ बार पुलिस का डंडा खाया हूं| अब भी तुझे यकीन नहीं, एक दिल दर्द बयां करता हूँ, जब सब जगह बन्द पड़ा था… आना जाना, जब राशन मेरा खत्म हुआ, कई रात मै बिस्किट खाकर- कई रात मै भुखे पेट ही सोया हू| बस यह आशा लेकर जीता था एक दिन समझ तुम जाओगी किसी मोड़... »

एक बात बोलू

कविता- एक बात बोलू —————————– एक बात बोलू.. क्या जरूरत थी, एक फोटो के खातिर- इतना सजने कि! जो अपनी सुन्दरता से चांद को भी कायल करदे, जग के सब अन्धो को भी अपनी जुबां से घायल कर दे| उसको चार दिवारी मे रखकर, कई घंटो का समय लगाकर, नख से लेकर शिखा तक, ले ली फोटो- हर विधि से उसे सजाकर| मेरा दिल कह रहा है, इन्हें दिल मे रखलू, इस मट्टी के मूरत को... »

किताब मेरी

कविता-किताब मेरी —————————- इतनी खूबसूरत तो नहीं है । जो तेरे लिये दिन रात तड़पता हूं । तू किताब मेरी,बसी तुझी में जान है तभी रात भर जग जग के पढ़ता हूं। जिसने किया बेवफाई तुझसे , उसकी जिंदगी संवर नहीं सकती| जिसने सहा नहीं तेरे राह का ठोकर, जमाने में उसकी कीमत हो नहीं सकती| थूक देंगे जमाने के लोग तुझ पर, अगर तुझे जमाने का ज्ञान नहीं | चूम लेगे ज... »

क्या गिरा पाओगे?

हमें क्या गिरा पाओगे, हमें क्या मिटा पाओगे, जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो, कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो, आज खुश है हमें छोड़ कर, यारों हम भी खुश हैं उसे छोड़कर|😊🙂 ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍ ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

कुछ भी

कुछ भी उसमें खास नहीं था, फिर भी उसे दिल में बसाया था, कोई हमसे छीन ना ले.. हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था मेरी तकदीर है, मेरी जन्नत की लकीर है, खुदा आज भी उसका इंतजार है, यदि दुआएं मेरी तुझे कबूल है| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

शिद्दत

कविता- शिद्दत ——————- बड़ी शिद्दत से उसे चाहा था, खुदा से दुआओं में उसे मांगा था| पर समझ न सकी हमको यारो, वह भरी महफिल में हमें रुलाया था| उसके होठों की मुस्कुराहट ही , मेरे जीवन के पतवार बन गए| हम प्यार में थे पागल इतना, सबकी नजरों में बदनाम हो गए| हर खता छिपा ली उसकी मैंने, उसकी नजरों में शैतान बन गए| जो दोस्त थे कल वजीर मेरे आज वही उसके दिल मे, बादशाह बन गए |... »

तेरी खता

कविता – तेरी खता ————————- तेरी खता फिर से तुझे, बदनाम कर सकती| तेरे लफ्जों के कारण ही, तुझे शैतान कह सकती| कहां अगर तू ये सच्चाई, तुझे बदनाम करते हैं| करें सबसे शिकायत जो , तुझे ओ ,इंसान कहते हैं| करना ना भलाई तू , नहीं तू भी ये रोएगा| मिला शब्दों में गाली जो| कहीं तू भी ये पाएगा| तेरे रिश्ते की कीमत को, ओ अपने भाव में समझे| तुझे गद्दार कहके ओ... »

जर्जर

हमें प्यार की बीमारी हो गई, याद में उसके शरीर जर्जर हो गई| अब हमें चार कंधों की जरूरत नहीं, शमशान एक व्यक्ति ले जाए ऐसी मेरी शरीर हो गई| वर्ष पहले नींद छूट गई थी, कुछ समय बाद भोजन छूट गया| बस नजरें बची थी उसे देखने को, जब मैं मरा वह आशा टुट गया| तब जमाने के लोगों को पता चला, मरा क्यों जब मेरे जेब से खत मिला| वह आखिरी खत था उसका, खत संभालने या प्यार करने का सजा मिला| मत प्यार करो ऐसा खुद को मिटा दो... »

प्यार है या जख्म

कविता- प्यार है या जख्म ————————– क्या कसूर था मेरा, बस आके एक बार बता जा| खुश है- आ उन्नीस बरस का प्यार बता जा| करले तुलना प्यार से अपने, अब पूछो जरा मन सम्मान से अपने| पाके हसले निस दिन सपने, आ देख दशा, सपने डरते निस दिन अपने| हालात ने मोड़ा नहीं, हालात को तू ने मोड़ दिया मोड़ दिया | मिली खुशी तुम्हें ,सोच जरा, मां बाप को किस हाल में छोड़ दिय... »

कुछ नहीं

हमें आता जाता कुछ भी नहीं, सिर्फ शब्दों में खेल रहा हूं| परिणाम का हमें कुछ पता नहीं, मीठा खट्टा बोल रहा हूं| शब्द आन मान शान हैं, शब्द शब्द वेदी बाण है| शब्द राजाओं की तलवार यदि, भिखारियों की ढाल और पहचान है| शब्द सिंहासन दे सकता है, शब्द ही सब कुछ ले सकता है| बनो गवार ज्ञानी चाहे, शब्द ही जान ले दे सकता है| मां के शब्दों में संस्कार भरा है, पापा के शब्दों में प्यार भरा है| बढ़ा हुआ जब लाल वहीं, ... »

महबूब

जूम गूगल मीट पे क्लास चल रही है | नेटवर्क भी सही नहीं, फिर भी बात हो रही है| मोर मोरनी बिछड़ गए, राधा बन घर रो रही| है गरीबी की मार से, खुद फोन नहीं ले पा रही| स्वाभिमान नहीं वह छोड़ रही, प्रेमी से ना कुछ बोल रही| अब गूगल जुम पर देख देख कर, रो रो कर जीवन गुजार रही| करके सिंगार सभी वह आती है, प्रेमी को वह देख रही है| हाय गरीबी हाय कोरोना, खुद को वह धिक्कार रही है| मन को वश में करके, . करती खूब पढ़ा... »

सलाह

लाखों की डिग्री लेकर, खोज सके न वैक्सीन| कवि खोज दिए कलम से अपने, कोरेना का ऐतिहासिक सीन| नेता की नियत बताएं, डॉक्टर मिल करते खेल| लिवर किडनी गुर्दा ही बेचे, कोरोना में गजब ही खेल| »

झूठ

माँ ही है संतान मोह में, सबसे से लड़ जाती है| जिसकी माँ खुद जज वकिल बने, उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है| लाख गुनाह छिप जाते है, बस माँ के आ जाने पर| दंड के संग संस्कार सिखाती प्यार से घर लाने पर| »

कंघी

कविता- कंघी —————— कभी इसको रख गोदी मे रोटी देती थी, कभी इसको काजल कंघी तेल कराती थी, कभी इसको कंधो पर रख कर, मेले कि शैर कराती थी, थक! जाता था, लाल मेरा जब, रख सर पर गठरी गोदी मे लेके, कभी अपने मैके जाया करती थी| कभी इसको झूठ दिलाशा दे करके, खुद कामो मे लग जाती थी| बड़ा हुआ जब लाल मेरा, क्या क्या रंग दिखलाता है| कभी भुखे पेट मै सोती हु कभी कपड़ो के लिए रोती हु|... »

लायक

रोया हूं बहुत चादर में मुंह छुपा कर के, लायक हूं ना लायक नहीं, जो मरा नहीं किसी के प्यार में, गले में रस्सी का फंदा लगा करके| वह छोड़ दी तो कोई बड़ी बात नहीं, मेरे साथ मेरा परिवार है , इससे बड़ी कोई बात नहीं| प्यार करने के लिए बहन भाई मां बाप है- जिसे मैं समझूं ओ मुझे न समझे उससे बड़ा कोई मूर्ख नहीं| »

बेदर्द

बेदर्दो से मत आस लगाओ, कि तुम्हारे दर्द के मल्हन बनेंगे| पराए काम आ सकते हैं, वक्त पर अपने साथ छोड़ जाएंगे| »

जख्म

हर जख्म छिपा करके हंसने की कोशिश कर रहा हूं| काश समझ लिया होता उसे भी, जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं| »

बादशाह

कविता- बादशाह ——————— सजग प्रहरी बनने के लिए, फिर से कलम उठाया हूं… अब हमें रोक लो, लोकतंत्र के बादशाहो तुम! ना धरना पर बैठूंगा ना संपत में आग लगाऊंगा| बस कलम उठाया हूं- कलम की भाषा में तुम्हें तुम्हारी औकात बताऊंगा| सारी घोटाला करतूत तुम्हारी, देशभक्त हो- देशभक्त की यह पहचान तुम्हारी| ना रंग ना कपड़े से, ना डंडा ना भगवा से, ना मंदिर ना मस्जिद से, ना... »

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