Rishi Kumar's Posts

पर्यावरण क्या है

कविता-पर्यावरण है क्या ——————————- सभी सुनो, पर्यावरण है क्या, क्या इसकी परिभाषा है, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, जीव जंतु मानव – जिससे प्रभावित हो, उसी को कहते पर्यावरण है| अंबर भू धूप हवा पानी वर्षा भूख अकाल दूषित जल कोयला कंकड़ मोरम मिट्टी अंबर बिजली सब पर्यावरण के अंश ही है| मानव जिससे पीड़ित होगा, मानव जिससे हर्षित होगा, दूषित ... »

चार आने की संपत्ति को

कविता-चारआने की संपत्ति को ————————————— चार आने की संपत्ति को रुपये में खरीदा था खरीदा उस वक्त मैंने जब बाजार में भाव गिरा था, मैं बाजार में नया खरीददार बोली लगी, मैं समझ नहीं पाया सस्ती वस्तु को ,ऊंचे दाम में खरीद लाया, अब रोता हूं माथा पीट कर क्रोधित हूं खुद अपनी समझ पर मंडी में कई खरीददार थे, सबकी नजर थी वस्तु पर , क... »

आपसे दूर हूं

कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब आता हूं, शरण स्नेह पाता हूं, सरकार अब तुम दया करो, मां बाप से बच्चों को न अलग करो, शहर के जैसा गांव में भी, अच्छी, सस्ती ,सुविधा ,युक्त, यूनिवर्सिटी की व्यवस्था करो, क्यों जाएं दूर शहर प्रे... »

बावरी

कविता-बावरी ——————– सुन बावरी क्यों लड़ती है मुझसे, एक दिन रूठ जाऊंगा, तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा, संग में कॉलेज आना जाना, पार्को में समय बिताना, होटल में खाना खाना, फोन पर चैटिंग करना मेरे खातिर मम्मी पापा से, चैटिंग नंबर रोज मिटाना, छत से छिप छिप कर बातें करना, फिर किसके संग करेगी तू, जब मैं ही ना रहूं इस दुनिया में, इसीलिए तो कहता हूं जब तक हूं मिल ... »

जहर पिला दो

कविता-जहर पिला दो —————————– जहर पिला दो जहर खिला दो मम्मी पापा उपकार करो जन्म नहीं देना मम्मी दर्द मेरा एहसास करो मुझ नन्हीं बच्ची पर हवसी रहम नहीं करता है, मन की प्यास बुझा कर के मुझ को आग हवाले करता है रोती हूं खून से लथपथ मुंह में कपड़ा होता है मुंह पर चांटा मार रहा कुत्तों सा नोच रहा होता है चाह नहीं मां मैं भी आऊं आंचल में तेरे दूध ... »

मुझे वरदान दो

कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी जैसा साकार हो आकार हो प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत हो, वह काम दो ,जिससे नाम हो मेरे काम से पहचान हो, ईश्वर तुझ से ही आशा है ऐसा मुझे वरदान दो, वरदान…… तूफान के वेग जैसा चिड़ियों के उड़ान जैसा हमें दो ताकत ऐसी गिद्ध में... »

भाई खुश हो

कविता-भाई खुश हो ————————– भाई खुश हो, आज तुम्हारा जन्मदिन है, मैं तो तुमसे दूर हूं मेरा आशीष तुम्हारे साथ है, प्यार मिले , सत्कार मिले, सम्मान मिले, मिले जगत से – खुशियों का सार मिले, खुदा से बस इतना कहती हूं हर सुख तुम्हें आज मिले, हर बाधा तुमसे दूर रहे- बनो सदा हिमगिरी जैसे रक्षक बनकर खड़े रहो, विशाल बनो अंबर जैसे सूरज जैसा तेज रखो, क्... »

खाएंगे

मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो हम उन्हें बुलाते, अब घर सूना सूना लगता है, कवियों के बिन सावन अपना रुखा रुखा सा लगता है| जो जुड़े हुए हैं ईश्वर उनके साथ रहो, जो जुड़ कर चले गए – ईश्वर उनको मेरा पैगाम सुना दो, कोई याद किया है कविता शायरी... »

कब्र पर आकर

कविता- कब्र पर आकर ———————- दौड़ रही हूं, इधर उधर, ढूंढ रही हूं, डगर डगर, पूछ रही हूं, नगर नगर, कोई मुझको, पता बता दो, मेरे साजन का, घर बता दो| कहाँ बसे हो मुझे छोड़ कर, आओ फिर से, मिल जायें हो दर्शन – अगर तुम्हारा, सब कष्ट मेरे मिट जायें, हंसना लड़ना कितना अच्छा था, जब तुम रूठे मैंने रोज मनाए, जब मैं रूठी, मेरे लिए तुम खीर पकाए, डरते डरते ले आते पास... »

क्या खोज रहे हो

कविता- क्या खोज रहे हो ——————————– क्या खोज रहे हो, कहाँ भटक रहे हो, अंदर सुख हैं- बाहर सुख नहीं हैं खुद को मजबूत बना हरदम लड़ अपने से, जिस दिन विजय तू पायेगा, ज्ञानेंद्रिय व कर्मेंद्रिय सहित मन मति मद चित्त रूह पर उस दिन ब्रह्म समान हो जाएगा, न्याय सभ्यता प्रेम करुणा, अनेका अनेक गुण- धर्म , ज्ञान-विज्ञान ,दर्शन से ऊपर उठकर- राष्ट्र... »

विश्व पटल पर हिंदी चमके

कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके —————————————— विश्व पटल पर हिंदी चमके ऐसा राग सुनाता हूं, दुनिया भर के लोग सुनो क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं, जब दुनिया में कोई भगवान नहीं हरि ने दुख हरा नारी का असुर खींच रहा था पल्लू हरि ने चीर बढ़ाकर- लाज बचाई नारी का, दुनिया में जब दर्द बढ़ा भारत से एक धीर बढ़ा, दुख का निवारण त... »

कवि का धर्म

मुक्तक-कवि का धर्म ————————- कवि का कोई धर्म नहीं हो सकता है, मंदिर मस्जिद चर्चो में भगवान नहीं हो सकता है, दुख को दुख कहता है जो सुख को सुख कहता है जो खुद के ,चाहे औरों पर हो, सबके आंसू को आंसू समझे, लाख मुसीबत आए उस पर, सत्य के सिवा कुछ ना समझे जो मानव को नीच बताएं वह इंसान नहीं हो सकता है, गाली बकते नारी को जो, ईश्वर से आशीष नहीं पा सकता है, सम्मा... »

ग़ालिब

कविता- गालिब ——————- कवि जागो लेखक जागो, जागो जग के शायर सब , रोयेंगे कल यदि आज नहीं जागे हम| प्रकृति हमारा खंडहर हो रहा कल कहाँ से उपमा लायेंगे जब फूल नहीं बागों में, सुगंध नही फूलों में, निर्मल जल की आस नहीं, बोतल से- मिटती सबकी प्यास नही| सूख रही सरिता सारी रोती आज धरा भी है बे मौसम वर्षा होती है प्यासी धरती रहती है। जंगल में आग लगी कई जीव बलिदान हुए हो व्याक... »

पीपल का वृक्ष

कविता -पीपल का वृक्ष —————————- जीवन जीने का आधार क्या है, हर धर्मों का सार क्या है, मानव क्या पाता है, जीवन में क्या खोता है| वृक्ष लगाओ संदेश मिला है, रोग मिटेंगे, वैज्ञानिकों ने बताया है| मंदिर की सुंदरता बढती है जब पीपल नीम की छांव मिले, आओ वृक्ष लगाकर उपकार करें, भारत मां का सिंगार करें| गेंदा, गुड़हल और गुलाब, खिले चमेली सुंदर बाग| देव शर... »

चैत्र मास

कविता -चैत्र मास ——————– शिक्षा समाज देश के सजग प्रहरी, मौन धारण कर के बैठे हो, बिगड़ रही नव पीढ़ी अपनी चुप्पी तोड़ो आवाज उठाओ, बच्चों को इतिहास बताओ, पता आपको यह त्यौहार नहीं अपना है, हर हिन्दू का नववर्ष चैत्र मास है, जो काम मेरा है कर रहा हूं, गूंगो के शहर में गा रहा हूं, बने अशिक्षित आज के दिन सब, गूंगे बहरे हो जाते चैत्र मास में सब, क्यों प्रथा रीति और... »

कविता-शिक्षा प्रेमी

कविता -शिक्षा प्रेमी ———————– हे शिक्षा प्रेमी क्या बात कही तुमने सच्चाई संग प्रहार किया उतर गए कई नकाब, बेच रहे शिक्षा को, शहरों में खोलकर दुकान, फीस पर फीस, निकली जनता की खीस, बस्ते के बोझ तले दबता बच्चा, अच्छे नंबर के चक्कर में, बच्चा कोचिंग करता- कोचिंग के फीस से मां-बाप की निकली खीस, आलू मटर टमाटर बेचे बेची घर की खेती भी, फीस न पूरा होती तो यारो... »

जुआरी हूं

कविता -जुआरी हूं ———————– हां जुआरी हूं, एक बार जुआ और खेलने दो, जो बचा है मेरे पास अब दांव पर लगाकर खेलूंगा, बिक गया सब कुछ मेरा अब उधार ले कर खेलूंगा, सभी अपनों के आगे हाथ फैला – जाऊंगा उसी महफिल में, सबसे अपना हाल कहूंगा, कोई मुझ पर तरस खाएगा उधार पत्ते की चाल फेक दूंगा, फटे पुराने उजले कपड़ों में, बदहाली तंगी के जीवन में , कभी खेल से भागूँग... »

शिक्षा क्या है

कविता- शिक्षा क्या है —————————— शिक्षा जो कोई लेकर चलता, उसको शिक्षा ले चलती है| मान प्रतिष्ठा धन वैभव देती है। जीवन का मार्ग सुगम कर देती है| मन मस्तिष्क आत्मा विकसित हो, उठे मन में – विचार कल्पना वह भी तो शिक्षा है, प्रकृति खुदा से मिली जो शक्ति, अंतर मन के भावों को प्रस्तुत करना शिक्षा है, मस्तिष्क को इस योग्य बनाएं, सत्य खोज सत... »

फेल रिजल्ट

कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो, इतना किसी पर, काम पूरा ना होगा, तो जमाना हसे सदा तुम्हीं पर, कल जिसे देखकर, नाज करते थें, रहें सलामत, दुआ करते थें, फोन पर उसकी छीक सुनकर, नींद हराम होती आवाज सुनकर, उसे गर्म पानी पिने की- सलाह दिया करते, देशी दवा करने की, बा... »

धोखेबाज दोस्त

कविता- धोखेबाज दोस्त ——————————– हजार झूठे स्वार्थी दोस्त से अच्छा, एक सच्चा परम मित्र हो, नाज किया समय पैसा बर्बाद किया, वही दोस्त आइना दिखा जाते, डूबते हुए इंसान से- किनारे होकर भी, मुंह फेर लेते, इन उचक्के दोस्तों से अच्छा, एक बौना अशिक्षित मित्र हो, मेरी परेशानी मुसीबत में, सदैव सदैव मेरे साथ हो, ख्वाब में मेरा दर्द चीख सुनकर, उ... »

दर्जी

कविता- दर्जी ——————- फटी पैंट मेरी, ले दर्जी जी के घर जाता हूं, टूटी फूटी मशीन के संग, बैठा बुजुर्ग दर्जी हैं, देख मुझे मुस्कुराया वह, ढलती शाम तक में जो, 20 रुपए कमाया वह, कारण पूछा हंसने का, खुदा को दिल से धन्यवाद दिया, पहला ग्राहक दुकान पर आने का, बस एक हुनर था दर्जी में, बाकी अब उसमें सब कमियां थी, सुनो…… चश्मा उसका टूटा था, फटा कुर्ता उसका था, प... »

बुखार में मां की याद आई

कविता-बुखार में मां की याद आई ——————————————- वर्ष बाद बुखार हुआ, मानों- अंतिम समय ने घेर लिया, चारों तरफ दिवाली का उत्सव था, हम लिए बुखार अपनी, कमरे में- खुद को कैद कर लिया, हमें क्या पता दीप कैसे जल गए, सुनते रहे कानों से, पटाखे साउंड की आवाज, कहीं मधुर तो, कहीं घोर आवाज हो गए, बल नहीं था मुझ में, छत पर चढ़कर दीप... »

डॉक्टर साहब

कविता- डॉक्टर साहब ——————————- देखिए डॉक्टर साहब जी, बेटा क्यों अब रोता हैं| रात अंधेरी काले बादल, रिमझिम बरसा पानी था, हाय पिताजी प्रेम तुम्हारा, कितना अद्भुत अच्छा था, देखा हमकों रोतें जैसे, रख कंधे पर दौड़े चले, दवा कराने कई कोश चले तुम, रात अंधेरी काट चले, इतनी जल्दी पापा तुमको, नंगे पाव ही दौड़ दिए , ठेश सहें पग पग पर, दर्द कभी ना सह... »

खिलौना मत बनाना

कविता-खिलौना मत बनाना ————————————– हे कुम्हार, मत बना खिलौना हमें, जमाना खेलें , तोड़ के, मिटा दे मेरी हस्ती को, बेचे किसी बाजार में, कोई खरीदें मुझे, बाजार की सबसे सस्ती वस्तु समझ, मिट्टी से बना हूं, मिट्टी में ही मिल जाऊंगा, किसी के घर की शोभा, किसी बच्चें की मुस्कान, किसी मेले की शान, आपस में लड़े बच्चें, कोई हंसे तो... »

चाय हटा लो

कविता- चाय हटा लो ————————— माफी देकर, गले लगा लो, दुख होता हैं, होठ से अपने, चाय हटा लो| जो हक मेरा हैं, कुल्हड़ क्यूं छीन रहा, देख देख रोते हैं, कुल्हड़ मन माना, होठों से चिपक रहा| मत बे दर्द बनों, हें मिट्टी के बर्तन, तरस खाओ हम पर भी, हम भी मिट्टी के बर्तन| हममें तुममें अन्तर इतना, हमसे जलकर दूर रहें, तुमसे जलकर पास रहें, कह देना, होठ से उस... »

गुड मॉर्निंग भेजा

कविता- गुड मॉर्निंग भेजा ———————————- गुड मॉर्निंग भेजा, हमकों एकSMS मिला, क्षण भर हम ठहर गए थें, हाय कोरोना तेरे कारण भूल गए थें, अपने सभी बिछड़ गए थें, जब से आया कोरोना हैं, याद रहा हमकों सब कुछ, बस भूल गए थें- जन्मदिन आज तुम्हारा हैं, क्या दे सकता हूं क्या ले सकता हूं इस खुशी के पल में हम, बस चंद शब्द हैं उपहार हमारे, परहित स्वहि... »

अपनी भूख मिटाने के लिए

कविता-अपनी भूख मिटाने के लिए ——————————————— भूख मिटाने के लिये, परिवार चलाने के लिए, लेबर चौराहे पर जाते हैं, आतें हैं मालिक कई मजदूरी की मोल भाव करते हैं | मजदूरी मिलती ना, गाली मिल जाती है, बड़े नसीब से काम मिले, मालिक तानाशाह ,निकल जाते हैं मनमानी से काम कराते हैं सम्मान नही देते हैं, मजदूर समझ इंसानों को... »

बदनाम हो गये

बदनाम हो गये ———————— बदनाम हो गये जमाने के नजरों में, वजूद खो दिया खुद का उसे मनाने में, इल्जाम लगता है इसे कोई और मिल गई, क्या पता उसे – रोते-रोते मेरी जिंदगी खाक हो गई, वह हस्ती है किसी के हाथों में हाथ रखकर, हम रो रहे हैं माथे पर हाथ रखकर, शायद उसे – आज नहीं तो कल समझ आ जायेगा, आज जिसके साथ हूं मैं, वह सिर्फ होटल सिनेमा पार्क तक ले जा... »

जितने बदले नंबर तुमने

जितने बदले नंबर तुमने —————————— जितने बदले नंबर तुमने हर नंबर तेरा मिल सकता , स्वाभिमान है बीच में आता है, क्योंकि तुने ही मुझे ठुकराया है, मत सोच हमें कोई नहीं मिल सकता, पहले , अब भी , मिले थे ,कईयों चेहरे, खुदा ही जाने क्यों तेरा चेहरा भाता है, रोने के लिए या- कुछ करने के लिए, खुदा ने ऐसा दिन दिखलाया है, बस इतना किसी के फोन से कह दे, ह... »

यादों में रहेगी

यादों में रहेगी —————— बेचैन सा रहता हूं, बन पागल फिरता हूं, मिल जाए मुझे पुनः, हर रोज दुआएं करता हूं, मान दी हमने कई मन्नते, कभी मस्जिद में भी चादर चढ़ाया करता हूं, खुदा खुशनसीब हूं या बदनसीब हूं, आज आखिरी बार तुझसे, यह बात पूछने आया हूं, मिले मुझे तकदीर कहूंगा ना मिली मुझे ना फिर किसी से प्यार करूंगा, मेरी थी मेरी होकर रहेगी, हो हकीकत ना पर यादों में रहेगी, &#... »

तकिया

तकिया ————- रोती रही कईयों दिन तक, दोस्त खबर भी देते रहें, हम भी रोते घर बैठे, जब कोई पूछे हाल मेरा, झूठी हंसी दिखाते रहें, कब सोया कब जागा हूं, मैं जानू या रात ही जाने, आकर देख मेरे तकिए को है गीली आंसू से, उसे नहीं सिखाया हूं, कैसे धूप में रख दूं उसको, तकिया है कपड़ा ना, डरता हूं घरवालों से पूछेंगे कैसे भीगी कुछ भी जवाब दे पाऊं ना ——————... »

भूल नहीं सकते

भूल नहीं सकते ———————– भूल नहीं सकते वो रातें, वो मनहूस घड़ी थी या मेरी किस्मत फूटी, एक नादानी से जंग छिड़ी, जब से बिछड़े ना कभी मिले, कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका, खबर मैं ले लूं – जब जब याद सताए चेहरा उसका ——————————————- **✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’&... »

अपना इलाहाबाद

कविता- अपना इलाहाबाद ———————————– दिन भर टहल रहे थे, पार्क सहित संगम में, देख दशा हम शोक में डूबे, अपना इलाहाबाद है ऐसा| एक तरफ तो न्यायालय है, एक तरफ संगम है, एक तरफ तो शिक्षा मंदिर, एक तरफ जमुना की धारा है| यहीं पड़ा- स्वराज भवन भी, यहीं खड़ी- आजाद की मूरत भी| सब कुछ मिलेगा जो चाह तेरी, प्यार मोहब्बत – राजाओं का चिन्ह ... »

प्रेम से भिक्षा

कविता- प्रेम से भिक्षा —————————- प्रेम है शिक्षा, प्रेम से भिक्षा, प्रेम ही सब कुछ , बिना प्रेम नहीं- जग मे जीने की इच्छा| प्रेम ही देखो, युद्ध कराये, प्रेम ही देखो, बुद्ध बनाये| मातृभूमि से, प्रेम इतना था, छोड़ के कुनबा जान गवाये| दो दिल जुड़ते ही, टूट जाते हैं, लाख मुसीबत सहकर भी, अनजाने पथ से होकर, परदेश में जा के जीते हैं| लाख बुराई हो कलु... »

सभी सो रहे

कविता- सभी सो रहे —————————- सभी सो रहे हैं, घरों में पड़े हैं| हम ही हैं दीवाने, अभी जग रहे हैं| बड़ा दुख है हमको जो जग रहे हैं। दिखे ना किनारा, चले जा रहे हैं। सभी के घरों पर, समय पर है भोजन| हम है छात्र, धुले ना है बर्तन| बजे बारह रात जब, सब्जी बन रही है| लिए हाथ कॉपी, पढ़ाई हो रही है|सभी….. कई वर्ष बाद में, पेपर है आया| नकल हुआ भारी, ... »

रावण हूं

कविता- रावण हूं ———————- रावण हूं, राम नही , राक्षस हूं, भगवान नही, अब की बार दशहरे में, पहले खुद राम बनो फिर आग लगाना मुझे| रघुकुल की पता होगी वे सत्य वचन पर, अटल रहे, चक्रवर्ती- विश्व विजेता, धर्म सत्य गौ, विप्र पूजक रहे। उस घर की, मर्यादा थी, वचन के कारण, जिस राजा ने मरघट पर काम किया, उसी का स्वाभिमान था – राम, मर्यादा उनसे, निकलती हैं, पिता प्रेम... »

इबादत

कविता- इबादत ———————— परमेश्वर तेरा, धन्यवाद करता हूं, तेरी इबादत करता हूँ तुझे प्रणाम करता हूं| जब जब पुकारा, तूने साथ निभाया, मेरी मुराद पूरी करके, मुझे खुशहाल बनाया, दिया मुझे सब कुछ दिया, घर-परिवार दिया, सम्मान दिया, डूब रहा निराशा में धन्यवाद है तुझे जो मुझ पर आशा का संचार किया। भूखा मुझे, न रखा कभी, सूखी सही, दो वक्त की रोटी दी। खुश हूं, खुशनसी... »

कन्या दान करोगे

आया है, नवरात्र का दिन, एक विनती, सबसे से करते हैं,| श्रध्दा और, विश्वास भी हो, प्रेम और, पूजा पाठ भी हो | मूर्ति विसर्जन करना भाई, प्रदूषण का ध्यान भी हो| ज्योति जलाओ, प्रेम दिखाओ, मां के भवन में आनंद मनाओ, नव दिन सब ध्यान धरो, कोविड नियम का पालन करो| संकल्प दिलाओ, सब ले लो भाई, माँ के नव दिन चरणों में, नारी सुरक्षा का संकल्प उठाओ, बैठे माँ के नव दिन चरणों में| दो वर्षीय बेटी, रेप में मर जाएँ, फि... »

डांट

कविता- डांट —————– ओ शब्द गूंज रहा, सामने होकर, सौ सवाल कर रहा| सुधर गए, समझ गए, संभल गए, या किसी की बातों में, फिसल गए, नारियल से सीख, गन्ने से सीख, क्रोध, ग्लानि घृणा महसूस हो, चला जा गाँवों में कुम्हार की थपकी से सीख ——————— ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

मेरा मित्र

कविता- मेरा मित्र ———————– मेरा मित्र- कमी बताया करता है, जब भी मिला हूं उससे, पढ़ कर मेरे चेहरे को, हकीकत बताया करता है| मेरी गलती – खुद न समझ सका, दे न सका धोखा ओ, जो था वही दिखा सका, उसे सच दिखाने की बिमारी है सख्त पहरेदार मेरा, गुनाह करने से डरता हूं, चेहरा कैसे दिखाऊंगा, सत्य हठी निष्पक्ष मित्र मेरा, डरता नहीं, सत्य ही दिखाएगा| साफ़ रहो, ब... »

हराम है

कविता -हराम है ——————- हराम है, आराम मेरा, आ आराम करले, जाॅन हैरान मेरा| ख्याल रखले, एक पल मेरी, तुझसे भिन्न न पहचान मेरी| तेरे ख्याल में, खुद ख्याल खो बैठा हूं, हे आत्मा- खुद पहचान बनाने में, तुमसे पहचान बनना, आज भूल बैठा हूं| ————————– ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”—- »

बड़ी फ़िक्र थी

कविता- बड़ी फ़िक्र थी —————————— बड़ी फ़िक्र थी उसे मेरी, सौ बार समझाती थी, कालेज समय से आया करो, कमियाँ रोज बताया करती थी| नाखून बड़े हैं बाल बड़े, कालर इतना गंदा है, जगह देख क्यों नहीं बैठते हाथ तुम्हारा साफ नहीं है| शर्ट में कैसे धूल लगी, क्रोध में आकर चिल्लाती थी, बटन खुली हैं हीरो बनोगे, खुली बटन बंद करती थी| खूब खर्च करो पैसा, खुद क... »

गटर

कविता-गटर —————– प्यास थी सरिता की, पोखर भी, नसीब ना| सोचा था, अपना भी, विशाल सा, घर होगा| रंग बिरंगी, दुनिया में प्यारा सा कुनबा होगा| चढ़ गिरि से झाँक रहा, निर्झर दिख जाए| रुक रुक उतरा मैं दौड़ चला सीटी, देख गटर रोने लगा, शहर संग- गटर भी सुखा था| साथी सब तितर बितर हो बिछड़ गये थे, भटक भटक- दम तोड़ दिये थे| दम छूट गया, गटर किनारे, जहाँ का पता मिला, वहां पानी न ... »

कालेज का पहला दिन

कविता- कालेज का पहला दिन —————————————– कालेज का, पहला दिन, एक अनजाने से , पहचान हुई, पता नहीं था , उसके बारे में- फिर भी दिल के, पास हुई, दिल का धड़कना, बढ़ गया मेरे, जब उसकी नजरें, मेरे चेहरे पर हुई| झूठ हसी- हसता चेहरा बनाया, डरता था मन ही मन, कहीं कुछ बोल न दे, मै घायल हुआ- जब उसने, चेहरे पर मुस्कान दिखाया, मै ... »

कालेज का नियम

मुक्तक- कालेज का नियम ——————————— अनजाने से पथ पर, एक अनजाने से पहचान हुई, दो दुनिया के थे दोनों, मानों अंबर का मिलन धरती से हुई| देखा उसको पहली बार, भूल गया खुद होशो हवास, सारी खुशियां संग संग थी, पपीहा बन देख रहा- अब स्वाति बरसे तो बुझती प्यास| एक मिनट दो मिनट, बीत गये चालीस मिनट, टीचर आये चले गए, भुल गया कालेज का नियम| —... »

सबका समय

कविता- सबका समय —————————– सब का समय आता , सबको समझ न आता है, आया जिसको समझ अगर, खुद को समझा पाया है, छोड़ दिया वह, सब से लड़ना, खुद के लिए या- भारत मां के लिए लड़ता है| मान सम्मान, कुल का गौरव, पद प्रतिष्ठा, खुद का एक रिकॉर्ड बने, उन से लड़ना बंद किया, खुद कि नजरों में, खुद जिनकी न पहचान बने| दश बाई दश के, बन्द कमरे में, ले किताब वह हाथो... »

वर्ष पुरानी

कविता -वर्ष पुरानी ————————– आज अचानक, कुछ खोज रहा था, कई वर्ष पुरानी कॉपी मिलती है| मैं साफ किया उसे, फिर खोल उसे पढ़ने लगा, पढ़ते-पढ़ते, मै रोने लगा| उसमें पड़ा गुलाब संग एक खत था, सूख गया गुलाब पर, खत यादें ताजा कर डाला, कॉलेज की मेरी दोस्ती, खत ने सब कुछ कह डाला| उसमें कुछ ऐसी बात लिखी थी| परसों कॉलेज आओगे, मत लंच बॉक्स लाना, परसों जन्मदिन ... »

विरह वियोग

कविता- विरह वियोग —————————— अब हम किससे अपना दर्द कहे, कहां हम जाएं की- अपने दर्द की दवा मिले| जब भी चेहरा याद आता है, शृंगार रस के सपनों में डूब जाता हूं, जैसे ही चेहरा दुख देता है- विरह वियोग में हो जाता हूं| उसकी एक गलती- आंखों में आंसू भर देती है, मेरा सच्चा साथी, कलम कॉपी, हस के हमसे कहता है, उठा मुझे और भड़ास निकाल ले, या मन में उठ... »

कसम

कविता- कसम ——————- सौ बार कसम मैने खाई , फिर खुद ही उसको तोड़ा था, जब जब होती नादानी मुझसे, रब के आगे रोया था, दिल खोल के कहता- हर एक बातें, प्रभु गलती मेरी माफ करो, नादानी और जवानी मे, अज्ञानी और सयानी मे, भुल गया था सपत मै अपना, भुल किया खुद हाथो से| ना चोरी किया ना हत्या किया, ना जग मे कोई कुकर्म किया, मात पिता औरों के संग, खुद कि बहना या गैरो के संग, अपनों ज... »

पिता पुत्री का संवाद

कविता- पिता पुत्री का संवाद ————————————- तेरे खातिर दर-दर भटके, हर धर्मों का चौखट चुमू, आजा बेटी मां के सूनी आंचल में, मैं सीता मरियम नाम से बोलूं| तुमको पाने के खातिर मैं, कहां-कहां नहीं जाता हूं , चारों धाम कि यात्रा करके, तू आए सब से विनती करता हूं| मान सरोवर बालाजी के धाम गया, शिर्ड़ी चौखट अंबे मां के शरण गया, मैहर मां कि... »

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