कहानी-ना समझ संतान पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के दो पुत्र प्रवेश तथा आवेश, दोनों पुत्रों की शादी हो […]

कहानी-बाढ़ ————– सूरज निकलने वाला ही था कि बारिश रिमझिम शुरू हो गई| दोपहर होते-होते बारिश विकराल रूप धारण कर ली चारों तरफ बादल में गड़गड़ाहट बिजलीओं की लपटें, ऐसा प्रतीत होने लगा आज बादल […]

शिक्षा ग्रहण करो,संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनों —————————————————- यदि मन में अभिलाषा है किसी विशेष कार्य, वस्तु ,लक्ष्य, पद प्रतिष्ठा के लिए और धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं, तब स्वाभाविक है कि आने वाले समय […]

कविता- गुलाब जल ————————- चाहत न थी, अब जीने की बस तुम्हें देखा दुआ करने लगा जीने की, साकी दे- प्याला तो, नशा चढ़े| भर नजर- देख ले यह हसीना, जाम से बढ़कर नशा चढ़े, […]

दार्शनिक ————- जीवन मेरा दर्शन है, कर्म मेरा पथ प्रदर्शक है, मुड़ कर देखा बचपन को जन्म से बच्चा दार्शनिक है, उसमें गति मति थी, प्रकृति उसके करीब थी, था सब कुछ जन्म से ही […]

कविता-धर्म के ठेकेदार —————————— इस मुस्कुराहट में कौन सी जात छुपी है, चेहरे की कोमलता में कौन सा धर्म छुपा है, आज बता दो- धर्म के ठेकेदारों, इसके बालों को- कौन से भगवान ने बनाया […]

मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान —————- किसी बुजुर्ग ने, एक सवाल पूछा, जिसका जबाब- उम्र भर ना दे पाऊगा, बेटा! ऐसा कौन सा ज्ञान हासिल किया है, जो आज उसकी बेटी ले के भागा है, […]

कविता- साया तेरा ———————– माँ क्यों रो रहीं हो अब तक क्यों जाग रही हो, कसम तेरी माँ मुझे भूख नही उठो क्यों छुप छुप के रो रही हो, मेरे कपड़े की, क्यों चिंता करती […]

आप लोगो से अनुरोध है की सावन मंच एक बार सभी कवियों का परिचय समारोह का आयोजन करे ताकि सभी सदस्य एक दुसरे के बारे में जान सके तथा साहित्य में कौन कितना योगदान दिया […]

किसका शौक पूरा हुआ है, गम खुशी में जीवन रहा है, जो दिखावा कर रहे जमाने में, खुशी के लिए बहुत कुछ सहना पड़ रहा है, हालत ने पटका ऐसे, जो कल जी रहें थे […]

मुक्तक —————- मै मुर्गी खाऊ वो पाप बताते हैं वो कुकुरमुत्ता खाएं गर्व से स्वाद बताते हैं आगे से निकला पीछे से निकला उसका ऐसा वैसा स्वाद बताते हैं, शाकाहारी मांसाहारी कह करके सुबह शाम […]

कविता- कुष्ठ रोग से पीड़ित माँ ————————————— साहब मुझको पैसा दे दो बच्चों को मेरे भोजन दे दो ठंड लगती है भारी अब तो इन बच्चों को कपड़ा दे दो क्या है गरीबी जाने बच्चे […]

क्या छिपा रही हो हाथ से, क्या देख रही हो आख से, लग रहा जुखाम हुई आपको जो नाक पोछ रही हो हाथ से, ——— ✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

क्या छिपा रही हो हाथ से, क्या देख रही हो आख से, लग रहा जुखाम हुई आपको जो नाक पोछ रही हो हाथ से, ——— ✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

व्यंग्य —————— लड़कीया खुबसूरत होती है, लड़के गरीब अमीर होते है, लड़कीयो की संपत्ति सुंदरता है लड़कों की खूबसूरती पैसा है, इसलिए विचार करो लड़कों तुम धन कमाओ इतना कमाओ रोज तुम, सपना चौधरी को […]

कविता-शान्ति के दूत हो ——————————– शांति के दूत हो जीवन के स्त्रोत हो, अशोक तुम महान हो, प्रिय दर्शी राजा सबके सम्मान हो, शोषित उपेक्षित के, तुम ही उत्थान हो, कुल का गौरव, बुद्ध के […]

कविता- बुद्ध भक्त भीमराव ———————————— बुद्ध भक्त भीमराव, आपको फिर से आना होगा, उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, भारत को बौद्धमय बनाना होगा, अशोक चंद्रगुप्त के सपनों को, भारत के घर-घर पहुंचाना होगा, हिंदू मुस्लिम सिख […]

कविता- राम मेरे आदर्श हैं ———————————– राम मेरे आदर्श हैं भाई भारत माँ के पुत्र हैं भाई, जीसस मोहम्मद गुरु नानक बुद्ध से पहले राम दुनिया के भगवान हैं भाई, रघुकुल के प्राण हैं, शबरी […]

कविता- मां पछताई होगी ——————————– मां बहुत पछताई होगी, बेटी को जन्म देकर रोई होगी, पढ़ी अखबार में- दो वर्षीय बच्ची के रेप की घटना जब, मां बच्ची को सीने से लगाकर रोई होगी, लाखों […]

प्यार से पहले कमाई करो धन हो या शिक्षा उसकी रोपाई करो, भूखे कभी न रहोगे ठग कभी न जाओगे, दुनिया तुम्हें रुलाएंगी, है ज्ञान तो रोने से बच जाओगे, शिक्षा- संघर्ष सवाल देती है […]

कविता- तरस आता है —————————————— हे गरीबी तुझ पर – तरस आता है, क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का| चाहे तू और बर्बाद कर दे, चाहे तू और भिखारी कर दे, जो इच्छा हो तेरी […]

कविता -राम —————- राम तुम्हें फिर आना होगा आओ बाण उठाना होगा आतंकवाद से मुक्त बना भारत को आर्यावर्त बनाना होगा चाहे पाक के पाले आतंकी हों चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों रोती है […]

कविता- मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो ——————————————— मां मुझको चलना सिखा दे, डगमग करते पैर मेरे अंगुली पकड़ के राह दिखा दे, बहुत बड़ी गलती किया हूं, सभ्यता संस्कारों को भूल गया हूं, आदर्शों से […]

कविता-होगा कोई लोभी ——————————- होगा कोई लोभी, होगा कोई ना समझ, जो तुम्हें खरीदे रुपयों में वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है, अरे…. होगा कोई आंख का अंधा, जो तुम्हारी सूरत को ,उगता […]

कविता – मां और कवि —————————- मां और कवि में , अंतर इतना, सीता और बाल्मिकी में, अंतर जितना, मां सुधा अगर है, कवि पारस पत्थर है, मां सरिता गर है, कवि सागर की गहराई […]

कविता- आलसी तू आलसी है ————————————– आलसी तू आलसी है तू बेरोजगार नही है आलस छोड़ काम कर वरना तेरी खैर नही है, डिग्री हैं डिप्लोमा हैं है पास तेरे कोई हुनर, कुछ नहीं है […]

बिल्ली की पूंछ ——————- रुकी कलम अगर भूत भविष्य बिखर जाएगा रखो न हाथ गिरवी, जमाना भूखे बच्चों को- व्रती बता जाएगा, जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं, उन्हें बोतल का- पानी पीने की सलाह दे […]

कविता- भारत रत्न तथा नोबेल —————————————— मेरे बाद ख्वाब सजाएगा कौन, बुझते हुए दिए को जलाएगा कौन, सपना था , भारत रत्न नोबेल का, अब इसे जीतकर लाएगा कौन, अगर मेरा जीवन अधूरा रहा, मेरे […]

कविता- फोन चोरी हुआ ——————————– सुनो भाई, कब तक गुजारोगे, जीवन में चोरी करके, मेरा या गैरों का- फोन चुरा करके, इस काम से क्या जीवन सुधर जाएगा, चोरी करके – धन से घर भर […]

माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक कर देखो एक बार, बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे, […]

मित्रता में राम हो मित्रता में श्याम हो बस अंगुली पकड़ के चलने दो दिल में अपने रहने दो, सत्य वचन, सत्य के प्रेमी, ना बड़बोला, हक है इतना सब कुछ कहना, स्व हित परहित, […]

सावन तुमसे माफी है माफी दिनकर कालिदास के बच्चों से है, काफी दिन मै दूर रहा दूर कारण- फोन मेरा चोरी हुआ था, अभी फोन लिया नही पर सावन तुमसे दूर हुआ नही, कहां गए […]

सूरज जलकर कब रोया संध्या रातों मे कब सोई गुलमोहर का साख से झरना कब बंद हुआ दशरथ माझी का हथौड़ा कब बंद हुआ, क्यों रोता है मूरख बंदे सत्य प्रकृत , प्रकृत अनोखा, बस […]

कविता-पर्यावरण है क्या ——————————- सभी सुनो, पर्यावरण है क्या, क्या इसकी परिभाषा है, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से, जीव जंतु मानव – जिससे प्रभावित हो, उसी को कहते पर्यावरण है| अंबर भू धूप हवा पानी वर्षा […]

कविता-चारआने की संपत्ति को ————————————— चार आने की संपत्ति को रुपये में खरीदा था खरीदा उस वक्त मैंने जब बाजार में भाव गिरा था, मैं बाजार में नया खरीददार बोली लगी, मैं समझ नहीं पाया […]

कविता-आपसे दूर हूं ————————- पापा मैं आपसे दूर हूं आपके आशीष से भरपूर हूं, कमबख्त काम ने घेरा है मुझे ऐसा बंधक है बनाया न गांव आ सकता ना शहर छोड़ सकता, गांव में जब […]

कविता-बावरी ——————– सुन बावरी क्यों लड़ती है मुझसे, एक दिन रूठ जाऊंगा, तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा, संग में कॉलेज आना जाना, पार्को में समय बिताना, होटल में खाना खाना, फोन पर चैटिंग करना […]

कविता-जहर पिला दो —————————– जहर पिला दो जहर खिला दो मम्मी पापा उपकार करो जन्म नहीं देना मम्मी दर्द मेरा एहसास करो मुझ नन्हीं बच्ची पर हवसी रहम नहीं करता है, मन की प्यास बुझा […]

कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी जैसा साकार हो आकार हो प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत […]

कविता-भाई खुश हो ————————– भाई खुश हो, आज तुम्हारा जन्मदिन है, मैं तो तुमसे दूर हूं मेरा आशीष तुम्हारे साथ है, प्यार मिले , सत्कार मिले, सम्मान मिले, मिले जगत से – खुशियों का सार […]

मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो […]

कविता- कब्र पर आकर ———————- दौड़ रही हूं, इधर उधर, ढूंढ रही हूं, डगर डगर, पूछ रही हूं, नगर नगर, कोई मुझको, पता बता दो, मेरे साजन का, घर बता दो| कहाँ बसे हो मुझे […]

कविता- क्या खोज रहे हो ——————————– क्या खोज रहे हो, कहाँ भटक रहे हो, अंदर सुख हैं- बाहर सुख नहीं हैं खुद को मजबूत बना हरदम लड़ अपने से, जिस दिन विजय तू पायेगा, ज्ञानेंद्रिय […]

कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके —————————————— विश्व पटल पर हिंदी चमके ऐसा राग सुनाता हूं, दुनिया भर के लोग सुनो क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं, जब दुनिया में कोई भगवान नहीं हरि ने दुख […]

मुक्तक-कवि का धर्म ————————- कवि का कोई धर्म नहीं हो सकता है, मंदिर मस्जिद चर्चो में भगवान नहीं हो सकता है, दुख को दुख कहता है जो सुख को सुख कहता है जो खुद के […]

कविता- गालिब ——————- कवि जागो लेखक जागो, जागो जग के शायर सब , रोयेंगे कल यदि आज नहीं जागे हम| प्रकृति हमारा खंडहर हो रहा कल कहाँ से उपमा लायेंगे जब फूल नहीं बागों में, […]

कविता -पीपल का वृक्ष —————————- जीवन जीने का आधार क्या है, हर धर्मों का सार क्या है, मानव क्या पाता है, जीवन में क्या खोता है| वृक्ष लगाओ संदेश मिला है, रोग मिटेंगे, वैज्ञानिकों ने […]