कोई कोना जिस्म का

कोई कोना जिस्म का
उड़ के बैठा किसी कोने में
अब सफर साँसों का गुजरता है
कभी जिस्म में कभी, किसी कोने में
राजेश’अरमान’

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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. nitu kandera - October 17, 2019, 3:47 pm

    Very good

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