देश का सम्मान लेकिन किसी इंसान का नहीं,
चाहे बिलखते रहे सब बस अपना मुकाम हो सही,
देश-भक्ति की बातें किस्से, कहानियों, नगमो में ही जचे,
क्योंकि सब करे कृत्य जिसमें खुद का फायदा हो वही।
और लोग तस्वीर बदलने का नया फैशन हैं लाए,
चैनलों ने भी देश भक्ति के कई शैसन चलाए,
क्या करें फोटो बदल तिरंगा लगाने का,
जब मन में मेरे कभी सच्चाई ही न आए।
और सुनता हूँ इस मौसम देश भक्ति के नारे कई,
वतन पे मर मिटना और सारी पुरानी बातें वही,
और इतना प्यार कभी सच्ची नियत से होता गर,
तो बार -2 दिसम्बर का वो किस्सा दोहराता नहीं।
बहोत बिलखता है इंसान यहां कभी तो मुकर के,
और कोई कभी रुकता भी नहीं जुर्म कर-करके,
बातें करने में किसी का कभी कुछ गया है क्या,
लेकिन गलती बाद टटोलो तो खुद को कभी ठहर के।
देश भक्ति की बात से फिसल मैं चला गया कहाँ,
लेकिन सच कहूं तो सिर्फ यही चल रहा है यहाँ।
मिट्टी पे मर मिटना, तिरंगे की लाज़ क्या मैं बचाऊँगा,
पता नहीं कब मैं इन बातों का मतलब भी समझ पाउँगा।
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