खयाले यार से दिल खुशगवार कर लेंगे

खयाले यार से दिल खुशगवार कर लेंगे
मिला न तू तिरे ख्वाबों से प्यार कर लेंगे

नसीब सबको नहीं हैं गुलाब की राहें
नहीं हैं फूल तो काँटो से प्यार कर लेंगे

किसी के वादे का हम ऐतबार कर लेंगे
लगे ये झूठा मगर इंतजार कर लेंगे

है अरमां दिल का रहो जिंदगी मे तुम मेरी
जहां से खुद को सनम दरकिनार कर लेंगे

लबों पे ठहरी हैं बातें न जाने अब कितनी
मिलोगे गर वही शिकवे हज़ार कर लेंगे

सदाऐं देती हैं मुझको ये बिसरी सी राहें
गली को अब तेरी हम रहगुजार कर लेंगे

मिले जो खुशनुमा सा साथ उम्र भर तेरा
सुलगते सहरा को ठंडी फुहार कर लेंगे

तड़पती रहती हैं जो हसरतें मेरी पामाल
उन्हें ही दफन करेंगे़ मज़ार कर लेंगे

अधूरे ख्वाब हैं इन आँखों में बहुत सारे
तेरा भी नाम उन्हीं में शुमार कर लेंगे

सुमन ढींगरा दुग्गल

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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Responses

  1. बेहद उम्दा लिखा है हार्दिक बधाई और मुबारक़बाद

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