खुश

ना किसी के इनतेज़ार मे
ना किसी के इंतज़ार की पुकार में
ना समुद्र के किनार पे
ना जी में , ना हार में
ना मंज़िल की आड़ में
ना प्यार में , ना उसके इकरार में
ना किसी के इनतेज़ार मे
ना किसी के इंतज़ार की पुकार में
ना समुद्र के किनार पे
ना जी में , ना हार में
ना मंज़िल की आड़ में
ना प्यार में , ना उसके इकरार में
खुश हो जाती हूँ केवल , कुछ “शब्दों” की तार में ! हो जाती हूँ केवल , कुछ “शब्दों” की तार में !


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3 Comments

  1. Mohammad - February 13, 2017, 8:30 pm

    Kdak

  2. Abhishek kumar - November 25, 2019, 8:26 pm

    Awesome

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