चल गए जीवन चरखे

बादिया सी जिंदगी में
आप बादल बन के बरसे,
खूब हरियाली सजा दी
जिंदगी के रोम हरषे।
ख्वाब में सोचा न था
आपको पाएंगे हम
आपके आने से सचमुच
चल गए जीवन चरखे।

शब्दार्थ –
बादिया – उजाड़ सी

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बादल

बादल ,बादल बन आया था बादल , बादल बन छाया था चहुँ ओर बरसकर बादल ने भारी कोहराम मचाया था बादल बादल बन लहर गया…

Responses

  1. थोड़ा टाइपिंग मिस्टेक हुई है शीर्षक है
    चल गए जीवन के चरखे

    बादिया सी जिंदगी में
    आप बादल बन के बरसे,
    खूब हरियाली सजा दी
    जिंदगी के रोम हरषे।
    ख्वाब में सोचा न था
    आपको पाएंगे हम
    आपके आने से सचमुच
    चल गए जीवन के चरखे।

    शब्दार्थ –
    बादिया – उजाड़ सी

  2. वाह सर, बहुत सुंदर काव्य रचना है। उपमा अलंकार का बहुत ही खूबसूरती से प्रयोग किया है सतीश जी।
    “बादिया सी ज़िन्दगी में आप बादल बन के बरसे”…वाह

    1. आपके द्वारा की गई उत्साहवर्धन समीक्षा से लेखनी को बल प्राप्त हुआ है। आपको बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

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