चिड़ियाघर

एक दिन गया मैं चिड़ियाघर,
एक भी जानवर न था वहां पर ।
यह देख मैं रह गया हैरान,
हर पिंजरे में था एक इंसान ।।

एक पिंजरे में लिखा था ‘ भेड़िया दुराचारी ‘
उसमें बंद था एक क्रूर बलात्कारी ।
अगले पिंजरे में लिखा था ‘ शेर खूंखार ‘
उसमें बंद था मासूमों का कातिल गुनहगार ।
अगले पिंजरे में लिखा था ‘ बंदर नकलची ‘
उसमें बंद था झूठा- मक्कार नेता लालची ।
अगले पिंजरे में लीखा था ‘ सियार रंगी ‘
उसमें बंद था एक ठगी बाबा ढोंगी ।
अगले पिंजरे में लिखा था ‘ गीदड़ भभकी ‘
उसमें बंद था एक शातिर आतंकी ।

हर पिंजरे में था एक कुख्यात गुनाहगार,
दो-चार नहीं जिन पर थे आरोप हजार ।

ऐसे इंसान क्या किसी जानवर से कम हैं?
इन्हें देख जानवर भी शर्माएंगे ।
जंगली जानवरों से डर ना होगा,
ऐसे इंसानी हैवानों के बीच खौफ खाएंगे ।

फिर से यह इंसानी जानवर हमारे बीच,
नए गुनाह करने को आजाद किए जाएंगे।
और बेगुनाह जानवरों को चिड़ियाघर में,
मनोरंजन के लिए कैद किए जाएंगे ।।

देवेश साखरे ‘देव’

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6 Comments

  1. Anjali Gupta - December 23, 2018, 6:27 pm

    nice

  2. Narendra Singh - December 23, 2018, 9:01 pm

    सुन्दर

  3. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 10:33 pm

    Good

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