छटपटाहटों की ज़ुबान

अपनी छटपटाहटों को ही देता हूँ
मन के जज़्बातों को डायरी में उतार लेता हूँ

ये छटपटाहटें सिर्फ मेरी अपनी ही नहीं
औरों की छटपटाहटों को भी उधार लेता हूँ

अंदर और बाहर की लड़ाईयों के लिए
कलम को हथियार बना लेता हूँ ।

तेज


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in New Delhi, India

2 Comments

  1. Panna - April 7, 2016, 1:52 pm

    bahut khoob!

Leave a Reply