छटपटाहटों की ज़ुबान

अपनी छटपटाहटों को ही देता हूँ
मन के जज़्बातों को डायरी में उतार लेता हूँ

ये छटपटाहटें सिर्फ मेरी अपनी ही नहीं
औरों की छटपटाहटों को भी उधार लेता हूँ

अंदर और बाहर की लड़ाईयों के लिए
कलम को हथियार बना लेता हूँ ।

तेज

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2 Comments

  1. Panna - April 7, 2016, 1:52 pm

    bahut khoob!

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