छलिया

जल कुकड़े हो क्या!
गुम हो जाते हो भाप से।
या सूखी धरती
जिसे तलाश है बरखा की।
या फिर भवरे हो,।
जिसे फूल फूल मंडराना पसंद है
पर जो भी हो
हो तुम छलिया, जिसे पसंद है घोंसला अपना ही।
निमिषा सिंघल


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7 Comments

  1. Anita Mishra - February 13, 2020, 3:49 pm

    Good

  2. Kanchan Dwivedi - February 13, 2020, 4:27 pm

    Very good

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 13, 2020, 8:13 pm

    Nice

  4. Priya Choudhary - February 16, 2020, 7:40 pm

    Good

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