छु न सके हथियार

छु न सके हथियार जिसे, उसे वो नजरो से घायल करते रहे,,
हम भी बने हिम्मती इतने,, वो वार करते रहे, हम हलाल होते रहे!!
कल तक मिल्कियत की जिसकी मिसाले देता था जमाना,
उसे ही वो होठों के जाम पिलाते रहे,, हम भी शौक से पीते रहे!!
कुछ तो बात हैं कान्हा, जो सितारे उसे चंदा समझ लेते हैं अक्सर,,
काश!! वो भी मेरी ख़ामोशी समझ पाए और  हम भी उन्हें देखते रहे!!

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पेशे से इंजीनियर,,, दिल से राईटर

9 Comments

  1. Panna - November 14, 2015, 7:44 pm

    Nice one friend

  2. Sumit Nanda - November 14, 2015, 8:15 pm

    kuch kaha nahi usne kabhi
    or me bahut kuch sunta raha… 🙂

  3. Ajay Nawal - November 15, 2015, 3:37 pm

    bahut achi kavita ankit bhai

  4. पंकजोम " प्रेम " - December 4, 2015, 2:01 pm

    एक पर एक शानदार …..पेशकश

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:37 am

    वाह बहुत सुंदर रचना

  6. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:58 pm

    Good

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