जलते है नाजुक पांव मेरे
वक्त की गरम रेत पर
अब के बस किसी काफ़िले में
कोई अपना मिल जाये
जलते है नाजुक पांव मेरे

Comments
6 responses to “जलते है नाजुक पांव मेरे”
-

brilliancy of emotions
-
thanks rohan
-
-

nice anu
-
thanks anjali 🙂
-
-
Bahut khoob supriya ji
-

वाह बहुत सुंदर रचना
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.