जाते जाते कुछ कह गयी ज़िंदगी

जाते जाते कुछ कह गयी ज़िंदगी
समझ पाया तो ढह गयी ज़िंदगी

करते गुजरा हर सांसों का हिसाब
ज़िंदगी से कुछ कम रह गयी ज़िंदगी

पहलूँ में लिए बैठे कई चाँद उदास
जाने क्याक्या न सह गयी ज़िंदगी

लम्हां लम्हां मिलके सजी मिलके बनी
जाते जाते चुपचाप कह गई ज़िंदगी

उम्र गुजरी किसी सेहरा में ‘अरमान’
आखरी दौर दरिया में बह गयी ज़िंदगी
राजेश ‘अरमान’

Comments

2 responses to “जाते जाते कुछ कह गयी ज़िंदगी”

  1. Abhishek kumar

    Nice

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