ठहरी हुई वो शाम

ठहरी हुई वो शाम ,
हाथों पे स्याही से लिखा
वो नाम

चलती हुई सी वो सड़क
साथ चलना बस यूँ ही
हाथ उनका थाम

मुस्कुराहटों में उनकी
ढूंढना खुशियाँ दबी
देखना कनखी से उनको
और नजरे भर कभी

धीरे धीरे पग बढाना
रास्ता लम्बा चले
आँखों में भरने को उनको
और ज्यादा शब मिले

माँगना कुछ और घंटे
माँगना मंदिर के आगे
लम्बी कर दे शाम

चलती हुई सी वो सड़क
साथ चलना बस यूँ ही
हाथ उनका थाम

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Hi, I am Vikas Bhanti. A Civil Engineer by proffession by poet by heart. Kindly like my page on FB and subscribe my YouTube channel for updates

3 Comments

  1. Ajay Nawal - May 5, 2016, 12:33 am

    चलती हुई सी वो सड़क…nice imagination brother

  2. Panna - May 5, 2016, 12:30 pm

    bahut khoob 🙂

  3. Anjali Gupta - May 6, 2016, 4:30 pm

    nice one

Leave a Reply