ठहरी हुई वो शाम , हाथों पे स्याही से लिखा वो नाम चलती हुई सी वो सड़क साथ चलना बस यूँ ही हाथ उनका थाम मुस्कुराहटों में उनकी ढूंढना खुशियाँ दबी देखना कनखी से उनको […]

एक मित्र ने यही मुझसे ब्रम्हास्त्र की फरमाइश की थी तो जी लीजिये जी पेश है   खुद से जो पूछा कि क्या चाहिए दिल बोला कि फिर वो समां चाहिए वो बहती हवा वो […]

रात घनी अंधेर बड़ी है, फिर से राम पधारो जी | देव संत और मनुज उबारो, दुष्टन को संघारो जी || काहू सो कहूँ ब्यथा अपनी मैं नित ही पंथ निहारूं | दनुजन को तुम […]

क्यों नहीं कहता जो फ़साना है तेरा ये कैसा बेमान अफसाना है तेरा क्यों बना बैठा है वो बुत जो पूजा जाये ये किसकी परस्ती है की वो छा जाये क्यों नहीं तोड़ता तू ये […]

बिन माँ और पिता का एक बच्चा इसके सिवा सोचेगा भी तो क्या, कोई बेचे तो मैं हँसी खरीद लूँ खरीद लूँ वो गुड्डे गुड़िया जिनकी बंद आँखे भी हँसी देती है और खरीद लूँ […]

मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता | पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता || चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर | उतार देता थैला काँधे से , […]