ठान लूँ गर

ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो बुलंदियाँ छू सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो बिन पंख भी उड़ सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो हर हार ,जीत में परिवर्तित कर सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो चीते से तेज़ दौड़ सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो भारत की शान बन सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो आतंकियों को मार सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो स्वर्ण भी ला सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो दुनिया भी चल सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो तिरंगा आसमाँ में भी लहरा सकती हूँ
ठान लूँ गर मैं तो सब कुछ हासिल कर सकती हूँ।।

देश की नारी को समर्पित🙏

Related Articles

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

तिरंगा

हमारा आन तिरंगा है, हमारा बान तिरंगा है। हमारा शान तिरंगा है, हमारा जान तिरंगा है।। हमारा धर्म तिरंगा है, हमारा कर्म तिरंगा है। हमारा…

Responses

New Report

Close