Neha, Author at Saavan's Posts

अटूट बंधन

सात वचनों और सात फेरों का अटूट बंधन आपका बंधा रहे हँसती रहें और मस्त रहें आप संग पिया के सजी रहें हर दिन हर पल खुशियों भर हो गमों का कहीं न नाम रहे ऐसी ही छोटी अभिलाषा के साथ आपको शुभकामनाएं अपार मिलें।। »

बचपन

लौट रहा है बचपन दोबारा लॉक डाउन के माहौल में खेल रहे हैं वही पुराने खेल हम मिलके साथ में खो गया था बचपन हमारा व्यस्त की जीवन गाड़ी में मिला है कुछ पल इन दिनों तो बिता रहे हैं साथ में।। »

महादेव का साथ

पल पल हर दिन बीत रहे हैं बस इसी सोच को अपनाए हुए है अगर साथ महादेव तुम्हारा जियेंगे पुनः हम आशीष लिए।। »

मजदूर

कर दी हैं अब लाल वो राहें भारत माँ के वीरों ने नाप रहे हैं कदम कदम से मीलों दूरी भी तकलीफों से।। »

एक बेटी

एक घर में जन्म लिया तो दूजे घर में ब्याही गई एक घर मे पाली बड़ी हुई दूजे घर की रानी बनी एक घर में खेली कूदी तो दूजे घर की रखवाली बनी एक घर में शरारती रही तो दूजे घर मे सयानी बनी एक घर में पढ़ लिख पाई तो दूजे घर में कमाई में लगी एक घर में संस्कारी बनी तो दूजे घर संस्कार देने में लगी एक घर सब कुछ सीखा तो दूजे घर जिम्मेदारी में लगी एक घर में बचपन छोड़ा तो दूसरे घर में ताउम्र रही लेकिन वो एक नन्ही सी कली... »

क्या ऐसा भी सोचा था

क्या कभी ये सोचा था तुमने ऐसा वक़्त भी आएगा घर की चारदीवारी के भीतर जीवन बिताना होगा न ही मिलना होगा किसी से न ही घूमना होगा अपनों से मिलने को एक दिन इतना तरसना होगा मिलेंगी छुट्टी गर्मियों की फिर भी नानी घर जाना न होगा घर मे बैठे बैठे ही हर दिन ऐसे ही बिताना होगा।। »

क्या ऐसा भी सोच था

क्या कभी ये सोचा था तुमने ऐसा वक़्त भी आएगा घर की चारदीवारी के भीतर जीवन बिताना पड़ जायेगा न ही मिलना होगा किसी से न ही घूमना होगा अपनों से मिलने को एक दिन इतना तरसना होगा मिलेंगी छुट्टी गर्मियों की फिर भी नानी घर जाना न होगा घर मे बैठे बैठे ही हर दिन ऐसे ही बिताना होगा।। »

दोस्ती

फूलों की खुशबू की भाँति महक जाए जीवन की डाली तारों की चाँदनी की भाँति रोशन हो दुनिया तुम्हारी सूरज की तेज़ की भाँति प्रकाश ही प्रकाश हो जीवन मे तुम्हारी नीले अम्बर की चादर की भाँति रंग भरी हो दुनिया तुम्हारी कृष्णा सुदामा के जैसी हो अपनी दोस्ती मेरी प्यारी।। »

कोरोना सतर्क

ग्रीन जोन में आये हो भैया फिर भी संभल कर रहना भैया बीमारी है ये छुआछूत की दूरी फिर भी बनाना भैया मास्क हमेशा लगाना मुख पर हाथ को धोते रहना भैया जब तक हो सके घर पर रहना जरूरत पर ही निकलना भैया जीत जाएंगे इस बीमारी से भी हिम्मत नहीं तुम हारना भैया।। »

जन्मदिन शुभकामना

तेरे हाथ की हथेली पर मैं क्या उपहार की भेंट करूँ काबिल नहीं हूं इतना मैं आज जो तुझको कुछ भेंट करूँ। देने को बस मेरे पास में तुझको प्यार और सम्मान है प्रार्थना है बस इतनी ईश्वर से आशीषों से वर्षा फुहार करें। उम्र तेरी हो इतनी लंबी जितनी सूर्य से पृथ्वी है पैरों में हो फूलों की चादर काँटों से कभी न पार करें। आज आपके जन्मदिवस पर बस इतनी सी है अभिलाषा रहो सदा खुश अपने जीवन में गमों का कहीं न नाम रहे।। »

माता सीता

वो प्यारी सी नन्ही सी कली थी धरती से वो जन्मी थी जनक जी के महल में लेकिन पाली पोसी और बड़ी हुई थी मखमल पर ही सोती थी वो कुछ भी कष्ट न देखे थी जैसे ही वो बियाही गई फिर कष्टों में ही वो जीती रही न सुख पाया उसने रानी का न पाया सुख कोई और रही भटकी फिर वन वन सीता बाल्मीकि जी की शरण मिली फूल उठाना भी भारी था जिसको वन से लकड़ी काटती रहीं स्वयं ही अपनी रसोई बना कर अपने बच्चों में खोई रहीं देकर प्रमाण वो आई ... »

दुबली पतली काया

हाथ मे डंडा, बदन पर धोती ऐनक पहने रहते थे दुबली पतली काया थी पर देश प्रेम में रहते थे दो ही शब्दों को ही लेकर विजय पथ पर निकले थे सत्य अहिंसा के ही मार्ग को अपनाते, मनवाते थे विदेशी वस्तु को त्याग कर स्वदेशी ही अपनाते थे बहिष्कार करते थे स्वयं भी दूरसों से भी करवाते थे एक के बाद एक, आंदोलन लेकर सीना ताने निकलते थे अपने साथ मे औरों में भी देशप्रेम जगाते थे ठान लिया था अपने मन मे विदेशी बाहर निकालें... »

रविवार

घर से बाहर काम करने वालों का, होता है रविवार, घर में काम करने वाली माँ का, नहीं होता कोई रविवार, लगे रहती है वो सुबह से लेकर शाम तक, हर रोज की तरह, क्या रविवार ,क्या सोमवार हर दिन की तरह होता है उसका रविवार।। »

तू भी कम नहीं

दूसरों की तरक्की की देख, न जल ओ खुदा के बन्दे। तू भी कम नहीं है किसी से, इस बात को हमेशा याद रख।। »

माँ

इस काँटो भरी दुनिया में माँ आपका ही तो सहारा है इस तपती जलती धूप में माँ आपका ही आँचल ठंडा पाया है दौड़ भाग की इस जिंदगी में एक आपने ही तो संभाला है चाहें जितनी भी मुसीबत हो माँ आपने ही तो निकाला है दुनिया वालों की बलाओं को माँ आपने ही झाड़ फूक निकाला है अपने बच्चों की हर पल चिंता कर ईश्वरीय आशीष भी दिलाया है।। »

रख हौसला

रख हौसला, वो दिन भी आएगा जब तू अपने सपने सच कर जाएगा मत हताश हो नाकामयाबी से कामयाबी का रास्ता खुद चल कर आएगा बस तू देखते रह सपने और बुलंदियों को छूने के खुली आँखों से देखा सपना है एक दिन तू सच कर दिखायेगा।। »

पापा

गर देती है जन्म माँ तो जिंदगी संवारते हैं पापा जेब खाली हो फिर भी झोली भर देते हैं पापा। अपनी हर ख्वाइशों पर पर्दा डाल हमारी हर इच्छाओं को पूरा करते हैं गर रखते हैं झोपड़ी में तो उसको भी महल बना देते हैं।। अपने हर गम को भुला, खुशियाँ बिखेर देते हैं गर डाँटते भी हैं तो ,पल में ही मना लेते हैं आँख में गर दिख जाए आँसू तो जमीन आसमाँ भी एक कर देते हैं।। सूरज सा तप रखते हैं तो, चंद्र से शीतल भी हो जाते ह... »

कलम की ताक़त

ये जो कलम की ताकत है ज़नाब, ख़ाक से उठा, आसमां तक पहुँचा सकती है।। »

किताब

शब्दों का भंडार लिए ज्ञान का प्रकाश लिए हर घर आंगन दिखती है जीवन का सारांश लिए। यूँ तो रहती मौन है फिर भी बहुत वाचाल है नेत्रहीन है स्वयं में लेकिन सबको दिखाती संसार है। इसके ही चार आखर पढ़कर दुनिया बनती विद्वान है चाहें हो कोई भी ईमान धर्म फिर दिलाती सबको सम्मान है।। »

तुम्ही ने दिया सहारा

जब भी खुद को मुश्किलों में पाया है, ये मालिक तुम्ही ने दिया सहारा है, भले ही नज़रों से नज़र नहीं आते हो, यकीनन तुमने ही हरदम मेरा हाथ थामा है। »

ठान लूँ गर

ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बुलंदियाँ छू सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बिन पंख भी उड़ सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो हर हार ,जीत में परिवर्तित कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो चीते से तेज़ दौड़ सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो भारत की शान बन सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो आतंकियों को मार सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो स्वर्ण भी ला सकती हूँ ठान लूँ गर मैं... »

तुम्हारा साथ

यूँ गर हाथों में हाथ तुम्हारा होगा जिंदगी का हर सफर सुहाना होगा बिता जाएंगे अंतिम लम्हों को भी मुस्कुराके गर आखिरी साँस तक साथ तुम्हारा होगा।। »

आँखों ही आँखों में

आँखों ही आँखों में, जाने कब बड़ी हो जाती है देखते ही देखते, वो घड़ी भी आ जाती है न चाहते हुए भी, अपने दिल के टुकड़े को खुद से जुदा करने की, बारी आ जाती है कैसा होता है ये पल, उस पिता के लिए बस अंदर ही अंदर भावनाएँ, दबा दी जाती हैं कल जिस घर आँगन, खेलती कूदती थी आज उसी आँगन से विदा की जाती है लड़ती थी ,जिन चीजों के लिए आज बिन बोले, यूँ ही छोड़ जाती है रोने न देती थी, किसी को भी एक पल आज सबको रोता बिलखता... »

अज्ञानता का मिटा अंधेरा

अज्ञानता का मिटा अंधेरा ज्ञान की ज्योत जलाते हैं अथाह शब्दों का भंडार लिए जीवन पथ सुगम बनाते हैं बाधाओं से पार कराते ज्ञान का चक्षु खुलवाते हैं प्रतिदिन विद्यालय में आकर नित नवीनता से मिलाते हैं कभी विनम्र ,कभी दृढ़ता से प्रकाश ही प्रकाश फैलाते हैं चारों धर्मों की एकता की शक्ति को छात्रों के अंतर्मन, पहुँचाते हैं कभी मित्रवत व्यवहार वो करके कभी माँ की ममता से मिल जाते हैं सर्वश्व निछावर कर देते हैं... »

नमन वीर

भारत माँ के प्यारे वीरो मेरा आप सबको प्रणाम है जो हो गए शहीद, देश की खातिर वीर तुम्हे सलाम है घर छोड़ा ,संग छोड़ी मोह माया सर्वस्व निछावर कर दिया ऐसे मेरे भारत के वीरों मेरा शत शत प्रणाम है आँधी झेली तूफ़ां झेले झेलीं राहों में मुश्किलें फिर भी अडिग खड़े रहे तुम देश की सीमा पर डटे हुए नमन करें हम उन सबको मिलकर जिनके खातिर हम सलामत हैं चैन की नींद से सुला रहें हैं खुद रातों को जाग रहें।। »