Neha, Author at Saavan's Posts

दुबली पतली काया

हाथ मे डंडा, बदन पर धोती ऐनक पहने रहते थे दुबली पतली काया थी पर देश प्रेम में रहते थे दो ही शब्दों को ही लेकर विजय पथ पर निकले थे सत्य अहिंसा के ही मार्ग को अपनाते, मनवाते थे विदेशी वस्तु को त्याग कर स्वदेशी ही अपनाते थे बहिष्कार करते थे स्वयं भी दूरसों से भी करवाते थे एक के बाद एक, आंदोलन लेकर सीना ताने निकलते थे अपने साथ मे औरों में भी देशप्रेम जगाते थे ठान लिया था अपने मन मे विदेशी बाहर निकालें... »

रविवार

घर से बाहर काम करने वालों का, होता है रविवार, घर में काम करने वाली माँ का, नहीं होता कोई रविवार, लगे रहती है वो सुबह से लेकर शाम तक, हर रोज की तरह, क्या रविवार ,क्या सोमवार हर दिन की तरह होता है उसका रविवार।। »

तू भी कम नहीं

दूसरों की तरक्की की देख, न जल ओ खुदा के बन्दे। तू भी कम नहीं है किसी से, इस बात को हमेशा याद रख।। »

माँ

इस काँटो भरी दुनिया में माँ आपका ही तो सहारा है इस तपती जलती धूप में माँ आपका ही आँचल ठंडा पाया है दौड़ भाग की इस जिंदगी में एक आपने ही तो संभाला है चाहें जितनी भी मुसीबत हो माँ आपने ही तो निकाला है दुनिया वालों की बलाओं को माँ आपने ही झाड़ फूक निकाला है अपने बच्चों की हर पल चिंता कर ईश्वरीय आशीष भी दिलाया है।। »

रख हौसला

रख हौसला, वो दिन भी आएगा जब तू अपने सपने सच कर जाएगा मत हताश हो नाकामयाबी से कामयाबी का रास्ता खुद चल कर आएगा बस तू देखते रह सपने और बुलंदियों को छूने के खुली आँखों से देखा सपना है एक दिन तू सच कर दिखायेगा।। »

पापा

गर देती है जन्म माँ तो जिंदगी संवारते हैं पापा जेब खाली हो फिर भी झोली भर देते हैं पापा। अपनी हर ख्वाइशों पर पर्दा डाल हमारी हर इच्छाओं को पूरा करते हैं गर रखते हैं झोपड़ी में तो उसको भी महल बना देते हैं।। अपने हर गम को भुला, खुशियाँ बिखेर देते हैं गर डाँटते भी हैं तो ,पल में ही मना लेते हैं आँख में गर दिख जाए आँसू तो जमीन आसमाँ भी एक कर देते हैं।। सूरज सा तप रखते हैं तो, चंद्र से शीतल भी हो जाते ह... »

कलम की ताक़त

ये जो कलम की ताकत है ज़नाब, ख़ाक से उठा, आसमां तक पहुँचा सकती है।। »

किताब

शब्दों का भंडार लिए ज्ञान का प्रकाश लिए हर घर आंगन दिखती है जीवन का सारांश लिए। यूँ तो रहती मौन है फिर भी बहुत वाचाल है नेत्रहीन है स्वयं में लेकिन सबको दिखाती संसार है। इसके ही चार आखर पढ़कर दुनिया बनती विद्वान है चाहें हो कोई भी ईमान धर्म फिर दिलाती सबको सम्मान है।। »

तुम्ही ने दिया सहारा

जब भी खुद को मुश्किलों में पाया है, ये मालिक तुम्ही ने दिया सहारा है, भले ही नज़रों से नज़र नहीं आते हो, यकीनन तुमने ही हरदम मेरा हाथ थामा है। »

ठान लूँ गर

ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बुलंदियाँ छू सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बिन पंख भी उड़ सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो हर हार ,जीत में परिवर्तित कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो चीते से तेज़ दौड़ सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो भारत की शान बन सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो आतंकियों को मार सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो स्वर्ण भी ला सकती हूँ ठान लूँ गर मैं... »

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