तुम आओ सिंह की सवार बन कर

तुम आओ सिंह की सवार बन कर !
माँ तुम आओ रंगो की फुहार बनकर !
माँ तुम आओ पुष्पों की बहार बनकर !

माँ तुम आओ सुहागन का श्रृंगार बनकर !
माँ तुम आओ खुशीयाँ अपार बनकर !
माँ तुम आओ रसोई में प्रसाद बनकर !

माँ तुम आओ रिश्तो में प्यार बनकर !
माँ तुम आओ बच्चो का दुलार बनकर !
माँ तुम आओ व्यापार में लाभ बनकर !

माँ तुम आओ समाज में संस्कार बनकर !
माँ तुम आओ सिर्फ तुम आओ,
क्योंकि तुम्हारे आने से ये सारे सुख
खुद ही चले आयेगें तुम्हारे दास बनकर !

~ रीता

जयहिंद


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