निष्ठुर मेघ

सभी प्यारे मित्रों को शुभ सांय…..
निष्ठुर मेघ…..
काजल से कजरारे बदरा.
थोड़े से बरसे ,
सब जड़ चेतन ,प्यासी धरती,
प्यासे मन तरसे ।
कितने ढोल नगाड़े पीटे ,
निज अगवानी के ।
मोर पपीहे गीत गा उठे थे,
मेहमानी के।
गला दबाती उमस, घुटन के ,
चला रही फरसे ।
घायल प्राणी करें प्रार्थना ,
धुँआ धार बरसो. ।
जलस्रोतों पूरित कर ,
सब हर्षें , तुम हर्षो ।
गाएँ जीवन गीत लुभाने ,
बहते निर्झर से ।

निरंतर पढ़ते रहें …
जानकी प्रसाद विवश का रचना संसार……।।

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