पर्व सबका ये दीपावली का रहे

घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे ।
चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे ।

जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी
पर्व सबका ये दीपावली का रहे ।

 

घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें प्यार से ,
हर तरफ सिलसिला दोस्ती का रहे ।

आओ दें एक दूजे को शुभकामना ,
दौर सबके लिए उन्नती का रहे ।

ऐसी दीवाली हो अब दुआ कीजिये ,
सबके दिल में तसव्वुर ख़ुशी का रहे ।

नीरज मिश्रा

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6 Comments

  1. Ajay Nawal - November 12, 2015, 3:56 pm

    nice poem Neeraj

  2. Anjali Gupta - November 12, 2015, 5:55 pm

    nice poem… Happy Diwal!

  3. Kapil Singh - November 12, 2015, 7:56 pm

    हर लफ़्ज इक आईना है, इक दुआ है, इक ख्याल है, इक रोशनी है जिसे हर तरफ़ देखने की ख्वाहिश है…शानदार कविता

  4. Mohit Sharma - November 13, 2015, 5:06 am

    nice poetry friend

  5. पंकजोम " प्रेम " - November 13, 2015, 12:03 pm

    Niceeeee poemm….bro

  6. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:47 pm

    Good

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