पल – पल – 2

पलपल

रचता यहां कुछ नया ,

जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं ,

है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं

Comments

2 responses to “पल – पल – 2”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. nitu kandera

    Nice

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