वो है बेखबर,
शायद न हो उसे खबर!
कैसे हुआ ये इश्क़ मुझे न पता चला,
इन दिनों इश्क़ इतने करीब से गुजरा की लगा बस हो गया।
आते जाते उसे देख खुद में मुस्क़ुरती हूँ।
पाने की चाह किसे है,
बस उसे जी भर देखना चाहती हूँ।
पहले तो जुबा ही बोलती थी,
पर अब तो आंखे भी बोलने लगी है!
ये आँखो की आँख मिचोली है,
यू तो बहुत कुछ बोलती है मुझसे,
पर जब तुम आते हो,
तो पगली झुक सी जाती है।
ये मन भी बड़ा चंचल है,
दौड़ता रहता पल पल है,
दिल भी तेरा, मन भी तेरा,
ये दिमाग करे तो क्या करे बेचारा।
ये दिल क्या हो गया है तुझे?
आजकल कहाँ रहते हो?
यारो के बीच रहते हुए भी खोये हुए जान पड़ते हो!
मुझे नहीं इंतजार तेरे लबो की इजहार की,
राज तो होगा दिल पे जिंदिगी भर तेरे पहले प्यार की!!
नहीं चाहिए वो सात जनमो का साथ।,
बस तुझे देख- देख गुजरते रह जाए ये दिन रात।।।।।
…… सौन्दर्य नीधि…….
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