प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

Anu Mehta’s
Dairy

About me
परिचय (Introduction)
नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं जिला कांगड़ा से हूं। मैंने बी.ए.(BA) किया है मेरे परिवार में मेरे सहित 7 सदस्य हैं। मेरे पिता आईपीएच (IPH) विभाग हैं। मेरी माँ एक गृहणी हैं। मेरी दो बड़ी बहनें और एक छोटा भाई है। मेरी ताकत आत्मविश्वास है, नए कौशल सीखने और किसी भी वातावरण को आसानी से अपनाने के लिए तैयार है। मेरा शौक लिखना, पढ़ना, क्रिकेट खेलना, बागवानी (Gardening) आदि करना है।

Occupation
मैं हमेशा सभी को खुश करने की कोशिश करती रहती हूं।
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प्यार अंधा होता है (Love Is Blind)
प्यार सच में अँधा होता है या फिर अँधा और बहरा दोनों हो जाता है, ना ही कुछ देखता है, ना ही कुछ सुनता है, बस अपनी ही जिद पर ठहरा होता है……..
ये कहानी एक राजपूत परिवार की लड़की जिसका नाम आरती है और दूसरी ओर मुस्लिम परिवार का लड़का जिसका नाम जफर खान हैं। दोनों एक दूसरे से बहुत अलग हैं लेकिन क्या उन्हें एक दूसरे से प्यार हो पायेगा चलिए जान लीजिये आप खुद ही।
जफर खान बचपन से एक आलिशान घर, गाडी, और रहन-सहन में पला बड़ा है, वही आरती बचपन से अपने परिवार को संघर्ष करती देख बड़ी होती है उससे अपने जिम्मेदारी का एहसास होने लगा। आरती के पास ज्यादा पैसे न होने के कारण से वो ज्यादा पढ़-लिख ना सकी, वही दूसरी और सब कुछ होने के बाद भी जफर खान को पढ़ने – लिखने का मन ना होने के कारण पढ़ ना सका। वक़्त के साथ साथ दोनों बड़े हुए अपने अपने रहन-सहन से।
आरती को घूमने – फिरने का बहुत शौक था। वो एक बिंदास लड़की थी। वो अपने परिवार में अपने पापा से बहुत प्यार करती थी। आरती अपनी परिवार के साथ किराये के रूम में रहती थी। वही दूसरी ओर जफर खान भी किराये के रूम में रहने लगा क्योंकि वो बिलासपुर (Bilaspur) से बद्दी (Baddi) ट्रेनिंग(training) करने के लिए आया था। और जफर खान के माँ बाप बिलासपुर (Bilaspur) में रहते थे यहाँ बद्दी(Baddi) में उसका कोई नहीं था।
एक ओर आरती एक छोटी सी कंपनी में काम करने लगी और वही दूसरी ओर जफर खान कंपनी में ट्रेनिंग(training) करने लगा…..
आरती एक Eureka Forbes Ltd कंपनी में नौकरी करती थी यह आरती कि पहली नौकरी थी जफर खान भी उसी कंपनी में नौकरी करता था। धीरे- धीरे आरती और जफर खान में दोस्ती हो गई। दोनों रोज साथ में ऑफिस आने जाने लगे, रोज दोनों कि बाते भी ऑफिस के बाद में देर तक फोन पर होने लगी यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और कुछ महीनो के बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गई।
फिर देर रात तक फोन पर बाते करना एक दुसरे से सब कुछ बताना साथ में घूमना फिरना यह सब बढ़ने लगा और आरती और जफर खान एक दुसरे के प्यार में डूबते चले गये और दोनों के बीच प्यार बहुत ही गहरा हो गया। और यह सब ऐसे ही चलता रहा आरती और जफर खान के घर पर भी आने जाने लगी…..
एक दिन आया जब आरती का जन्मदिन था, जफर खान ने आरती के लिए 100 रुपये में इतनी सारी चीजें ला कर दी, आरती बहुत खुश थी। उसको कुछ खास (something special) महसूस हो रहा था।
मैं समझ सकती हूँ कि प्यार को किसी दिन का इंतजार नहीं होता। लेकिन कुछ स्पेशल दिन के बहाने प्यार को और भी गहरा किया जा सकता है। पर आरती जफर खान प्यार में उसके प्यार में इतनी अंधी हो चुकी थी या फिर ये बोले कि आरती इस कदर जफर खान के प्यार में डूब चुकी थी कि वो जफर खान के बिना एक दिन एक पल भी नहीं रह पा रही थी। आरती दो साल के रिश्ते (relationship) को इतनी important दे रही थी, कि वो 20 साल को के प्यार को भूल चुकी थी उसको अपने मम्मी पापा का प्यार भी कम दिखाई दे रहा था। उसके मम्मी पापा को जब ये बात पता चली आरती के पापा ने आरती को बहुत मारा- पीटा फिर उसके बाद बहुत समझाया पर आरती के दिमाग में जफर खान के प्यार का भूत सवार था। आरती ने जफर खान के साथ रजिस्ट्रार के आफिस में जाकर शादी भी कर ली थी दोनों की शादी पर कानून की भी मुहर लग गई है दोनों पति पत्नी बन गए आरती कि यह बात रिया के घरवालो को पता चल गई और उन्होंने आरती कि नौकरी छुडवा दी जिसके कारण जफर खान ने अपना रूम बदल दिया और दुसरे जगह पर रहने लगा। आरती के पापा ने आरती से सारे रिश्ते नाते तोड़ दिए पर आरती को इस बात का बहुत दुख हुआ उसकी ऐसी गलती को उसके पापा उसे इतने दूर हो जायेंगे, कभी इस दुनिया में वापस नहीं आयेगे, पापा की मौत का जिम्मेदार आरती खुद को मानती है।
प्यार करने में साल या महीना नहीं लग जाता है प्यार तो वो ख़ुशी है, वो एहसास है, वो विश्वास है जो एक पल में और बस एक नजर में ही किसी को किसी से हो जाता है। इस तरह से वो दोनों हमेशा के लिए साथ हो गए और ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे।
शादी के कुछ समय सब ठीक था। आरती ने भी अपने दिलों में दांपत्य जीवन के सपने संजोने शुरू कर दिए थे आरती समय के अनुसार आरती ने खुद को अपनी आदतें बात करने का तरीका और अपनी खुशियों को दबाना शुरू कर दिया था। अर्थात आरती बहुत ज़्यादा बदल चुकी थी, वो अपने हक के लिए भी नहीं लड़ पा रही थी क्यूंकि वो अपने पति से बहुत प्यार करती थी।
आरती के ससुराल बाले भी आरती को बहुत तंग करते थे पर आरती ने अपने प्यार के लिए सब कुछ बर्दाश्त करती थी। जफर खान भी दिन रात फ़ोन कॉल करता रहता था। धीरे धीरे उसका फ़ोन कॉल आना भी बंद होता गया।
आरती को लगता था उसका पति शायद कंपनी में काम करते है और रात को थक जाता है। इसलिए वो पूरा-पूरा दिन बात नहीं कर पता होगा। जफर खान की बातों और प्यार और व्यवहार में बदलाव आता गया।
आरती गुमसुम और उदास देख कर मां ने कहा, ‘‘क्या बात है, आरती, तू इस तरह मुंह लटकाए क्यों बैठी है?
कई दिन से जफर खान का भी कोई फोन नहीं आया क्या? ?? दोनों ने आपस में झगड़ा कर लिया क्या?’’ आरती ने कहा ‘नहीं, मां, रोज रोज क्या बात करें।
ऐसा बोल कर आरती ने माँ की बातों को गोल गोल घुमा दिया. और ये सोच कर नज़रअंदाज़ कर दिया की शायद में ज़्यादा सोच रही हूँ।
आरती हर बातो अनदेखा कर मन में कोई वहम पैदा नहीं करना चाहती थी। दूसरी और जफर खान को ये लग रहा था मेरी पत्नी को कुछ पता नहीं लगा की मैं उसको धोखा दे रहा हूँ।
पर कहते है, ना पाप का घड़ा कभी ना कभी भर ही जाता है। आरती सोचने लगी कि मम्मी इस से ज्यादा क्या कर सकती हैं। और मैं भी क्या करूं, मम्मी को कैसे बताऊं कि जफर खान क्या चाहता है।
जफर खान चार पांच सालों से अपनी पत्नी को धोखा दे रहा था। वो घर से दूर रह कर अपनी मौज-मस्ती और पूर्ण-आनंद(Enjoy full) कर रहा था। आरती को इस बात विश्वास नहीं हो रहा था की जिस से वो प्यार करती है वो किसी और के पीछे दीवाना बन के घूम रहा है। अपने ही मकान मालिक (landlord) की बहू (नफीसा खान) के साथ खुलछर्रे उड़ा रहा है
जफर खान की गर्लफ्रेंड (GF) का नाम नफीसा खान था। नफीसा खान एक शादीशुदा औरत है उसके दो बच्चे थे। उसके एक लड़का और एक लड़की थी। दुनिया की नजरों में भाई बहिन और वैसे 5 साल से उसके साथ रिलेशनशिप में था। अब जफर खान अपनी पत्नी की ओर कम, GF की ओर साथ ज्यादा close था।
अब आरती को समझ नहीं आ रहा था क्या इसे प्यार समझाऊ या फिर छोड़ के चली जाऊं उसको इस बात का ज्यादा दुःख था कि जिस लड़के के लिए मैने अपने मम्मी पापा भाई बहिन के बारे में नहीं सोचा वो इन्सान मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता था। पर कहते है ना रब के घर में देर है अंधरे नहीं, जो जैसा करता है। उसके साथ भी वैसा होता है
जफर खान की गर्लफ्रेंड (GF) नफीसा खान ने धोखा दे दिया वो जफर खान को छोड़ कर किसी और से बात करना शुरू कर दिया। अब जफर खान को ये बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसकी गर्लफ्रेंड (GF) नफीसा खान उसके साथ ऐसे कैसे कर सकती है। वो नफीसा खान को जन्मदिन पे या फिर कोई खास त्यौहार पे कीमती उपहार आदि देता था। नफीसा खान के घर एक नए किरायेदार आई थी उसका नाम गीता मेहता था। जफर खान अपनी GF को नफीसा को चिढ़ाने के लिए गीता से बात करने लगा, पर गीता को ये बात पता नहीं थी वो दोनों आपस में Bf/GF है। अब गीता फॅमिली प्रोब्लेम्स (Family Problems) के कारण घर से बहार आयी थी। नफीसा खान पहले से 3/4 लड़कों से बात करती थी। वो बहुत तेज औरत थी।
जफर खान को धोखा मिलने के बाद इस बात का कोई दुःख नहीं था की वो अपनी पत्नी को भी धोखा दे रहा है नफ़ीज़ा खान से बदला लेने के बारे मे सोच – सोच कर पागल हो रहा था। जफर खान ने एक नहीं दो नहीं हजारों रिश्तों का खून कर रहा था। एक अपनी पत्नी, एक भाई जैसा दोस्त, एक इंसानियत आदि। जफर खान गलतियों पे गलतियां करता जा रहा था उसने एक बार नहीं सोचा जब उसकी सचाई सब को पता चलेगा कितने लोगों को दुख होगा। जफर खान की पत्नी भी उसके साथ रहने के लिए आई थी। अपनी आँखों में ढेरों सपने संजोये हुए, जैसे हर पत्नी अपने पति के लिए देखती है, अपने पति के साथ बहुत सारा समय बिताउंगी, घूमूंगी –फिरुगी और बहुत सारी खरीदारी (shopping) करुँगी……
आरती को ये बात पता नहीं थी कि जो सपने उसने देखे है, वो सब चकना- चूर हो जायेगे। पिछले कुछ सालों से ना ही एक अच्छा सा स्मार्ट फोन था, ना ही पहन के लिए एक अच्छी सुंदर सी कपड़े (Party wear Dress) आदि कुछ भी नहीं था। बस अपने दिल को ये सोच के समझा लेती थी इस महीने नहीं अगले महीने ख़रीददारी कर लूंगी यानि वो अपनों खुशियों का ख्याल न रखते हुए दूसरों का ध्यान रखती थी। वहीं दूसरी ओर गीता आरती से मिलने के लिए बहुत बेताब यानि बैचेन(excitement) थी। क्योंकि गीता ने आरती के बारे में बहुत सुन रखा था, अब गीता ये देखना चाहती थी और उससे मिलना चाहती थी कौन थी वो लड़की जो जफर खान के लिए मरने और हर रोज भावनात्मक रूप से प्रताड़ित रहती करती थी और क्यों ???
जफर खान के साथ जबरदस्ती शादी करना चाहती और देखने में कितनी बुरी थी जो जफर खान को अपनी पत्नी बोलने में शर्म आती थी। ऐसे हजारो सवालो गीता के मन में घेरा बनाए रखे थे। आखरी में आज वो दिन आ ही गया। जिसे गीता की आंखें देखने के लिए तरस गई। जब गीता को पता लगा की आरती अपने पति जफर खान के साथ अपने कमरे में आ गए है तो गीता के कदम खुद को मिलने से नहीं रुक पाये। और दौड़ के आरती के कमरे में पहुँच गई..
जब गीता ने पहली दफे देखा था, तो सुर्ख गुलाब की मानिंद होठों की लाली ने उसे आकर्षित किया था। उसकी बड़ी -2 आँखे और होठों पर प्यारी सी मुस्कान, बालों का जुड़ा डिजाइन बनाया आरती पे बहुत अच्छा लग रहा था उसके सुर्ख गुलाबी गालों पर पड़कर इंद्रधनुषी छटा बिखेर रही थी। वो अपनी बेटी के संग हंसती-खिलखिलाती बातें कर रही थी और गीता उसको देखती रह गई थी। आरती 10-15 मिनट के बाद नफ़ीज़ा खान से मिलने के लिए उसके पास गई। गीता आरती को अपनी खिड़की से जाते हुए देख रही थी दुपट्टा के पल्लू से अपना सिर ढक कर और दो इंच की हाई हील्स पहने सीढ़ियों पे चलती जा रही थी। 10/15 मिनट के बाद आरती अपने कमरे में वापस आ गई।
देखने से ही आप खुद ही अंदाज़ लगा सकते थे कि आरती तो मानो एक सादा (साधारण) सा जीवन व्यतीत कर रही थी। धीरे -2 जैसे समय बढ़ता गया आरती और गीता की दोस्ती भी बढ़ती गई। उन दोनों की दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी कि सामने वाले इन्सान भी ये बोले Wawoo दोस्ती हो तो इन की दोस्ती जैसी हो वरना दिखावे की दोस्ती ना हो। पर नफ़ीज़ा खान को इन दोनों की दोस्ती पसंद नहीं आ रही थी वो इन दोनों की दोनों की दोस्ती को लगातार तड़वाने को कोशिश करती जा रही थी। नफ़ीज़ा खान को लगा रहा था उन दोनों की दोस्ती कच्चे-धागे की तरह है जो धागे को हल्का सा खींचने से ही टूट जाएगा लेकिन हमारी दोस्ती वो खुशी है, वो एहसास है, वो विश्वास है जो एक पल में और बस एक नजर में ही हर किसी से नही हो सकती है।
जब से आरती और गीता की दोस्ती हुई थी। दोनों ही अपनी दुनिया में मस्त रहती थी। दोनों एक दूसरे के साथ उठना-बैठना, साथ में खाना – पीना, घंटो लगातार बात करना आदि।
नफ़ीज़ा खान को ये बात खाई जा रही थी कही ये दोनों मिलकर मेरी पोल ना खोल दे। कहते है चोर की दाढ़ी में तिनका (A speck in the beard of a thief) नफ़ीज़ा ने आरती के बारे में गीता के साथ बहुत सारी (निंदा) बुराईयां की और आरती के पास गीता के लिए बहुत बुराईयां (निंदा) की थी। पर वो दोनों अपनी-अपनी जिंदगी की आप बीती अर्थात जिंदगी के उतार-चढ़ाव, दुःख-सुख आदि अपनी-2 बाते करती थी। आरती गीता को अपनी छोटी बहिन मानती थी और बहुत सारा प्यार करती थी।
गीता आरती के लिए बहुत खास पर्सन(very special person) बन गई थी। आरती ने गीता के साथ सब कुछ साझा करना शुरू कर दिया। जैसे एक बड़ी बहिन छोटी बहिन के साथ करती है। उसका ध्यान रखना गीता के दुःख-सुख में हमेशा साथ देने। वैसे गीता आरती से उम्र में बड़ी थी। पर रिश्ते में आरती गीता की बड़ी बहन बनी थी। दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थी।
शायद आरती के पति ज़फर खान को भी इन दोनों की दोस्ती ज्यादा पसंद नहीं थी। जफर खान को भी यही डर था, कही गीता मेरी पत्नी के कान ना भर दे, कही मेरे बारे में ना बता दे। जफर खान और नफ़ीज़ा खान दोनों संबंध (Relationship) में थे। पर नफ़ीज़ा और ज़फर खान दोनों एक दूसरे के सामने ऐसे बात करते थे मानो एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हो।
दूसरी ओर आरती और गीता दोनो को एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था। जिस दिन गीता आपने ऑफिस जाती थी उस दिन आरती का पूरे दिन बैचैन रहता और किसी काम में जी नहीं लगता था। वो दोनों एक दूसरे को काफी हद तक पसन्द करते थे। उन दिनों आरती गीता को ऑफिस बाले नंबर से कॉल करके बात कर लेती थी इसलिए जो वक़्त कमरे में काट लिया करते थे वो बेहद ही खास हुआ करते थे। आरती गीता का बहुत ख्याल और बहुत ज्यादा ध्यान रखती थी, समय से खाना पीना यहाँ तक उसकी बेटी का भी और गीता के बीमार पड़ने पे भी हद से ज्यादा ख्याल रखना। उन दोनों को देख कर ऐसा लगता था वो दोनों बहनें है। नफ़ीजा उन दोनों की खुशियों में जहर घोलने में देर नहीं करती थी। हमेशा रंग में भंग डालने आ जाती थी। गीता और आरती जानते थे की नफ़ीज़ा हम दोनों की दोस्ती से जलती है तब इन दोनों ने एक नया तरीका निकाला कि हम नफ़ीज़ा के सामने बात नहीं करेंगे। फिर भी नफ़ीज़ा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी।
उस फ्लैट (Apartment) में हर रोज एक नई बात सुनकर मिलती थी। इन दोनों (गीता और आरती) की जिंदगी मानो बेरंग हो गई थी।
गीता का मन भी रूम में आने को नहीं करता था। पर गीता भी क्या कर सकती थी गीता भी मजबूरी थी। गीता भी एक नन्ही सी बेटी (18 महीने) को जो देखभाल करने वाली (Care Taker) महिला के पास छोड़ आती थी। नफ़ीज़ा खान डबल – गेम (Double games) खेल रही थी। उसको ये लगता था गीता और आरती पागल के साथ-2 मुर्ख है। नफ़ीज़ा ये नहीं पता है। वो खुद कितनी मूर्ख है। गीता और आरती को उसकी हरकतों और सारी घटिया योजनाओं के बारे में पता चल गया है। पर वो दोनों गीता और आरती नफ़ीज़ा के सामने दिखावा कर रही थी कि मानो हमें कुछ पता नहीं है। नफ़ीज़ा जो देखभाल करने वाली (Care Taker) महिला को भी अपनी इस घटिया योजना में घसीट मतलब शामिल कर रही थी। पर नफ़ीज़ा खुद को उभारने करने के लिए इतना नीचे कैसे गिर सकती है। उसकी हरकतें और चाल-चलन कैसा है। ये सब को पता था पर कोई उसके मुंह पे नहीं बोलना चाहता था। वे दोनों गीता और आरती खाली समय पर अपनी बेटी या फिर अपनी ही दुनिया में ही मग्न रहती थी एक दिन की बात थी नफ़ीज़ा खान संध्या के समय गीता के कमरे आई वही पे दोनों आरती और जफर भी पहले से मौजूद थे।
गीता और आरती म्यूजिक स्पीकर ब्लूटूथ (Music Speaker Bluetooth) पे पहाड़ी गीत लगाये अपनी बेटियों के साथ नाच रही थी। फिर उस दौरान नफ़ीज़ा फटाफट अपने मोबाइल फ़ोन निकला और तस्वीरें, वीडियो बनाने ही वाली थी, तो एक दम जफर उधर से जोर-2 से चीख पडा और नफ़ीज़ा को अपनी भाषा में ना जाने क्या-क्या बोल दिया। फिर नफ़ीज़ा चुप-चाप सुनती रही और बिना कुछ कहे वहां से चली गई। जिस पर दोनों के बीच आरती की अपने पति जफर खान कहासुनी हो गई। ये सब सुनकर गीता ने आपति जताई और कारण पूछने लगी क्यों नफ़ीज़ा को तस्वीरें खींचने, वीडियो बनाने से रोका. और आरती ने भी जफर से कहा ये तुम्हारी गलती है, क्यों इतने गुस्से से नफ़ीज़ा पर चिलाये सुनो तुम अगली सुबह नफ़ीज़ा दीदी से माफ़ी मांगना गुस्से से आरती ने अपने पति जफर को बोला।
जैसे-2 दिन निकलते गए। नफ़ीज़ा अपनी हरकतों से पीछे नहीं हट रही। कभी जफर के के माता- पिता को फ़ोन करके उनके कान भर रही थी तो कभी आरती को जफर के बारे में, गीता के बारे, तो कभी गीता के पास आरती और जफर के बारे में कान भर रही थी यानि अपने मन से झूठ की बातें बनाने के अलावा उसके पास कोई काम नहीं था। गीता और आरती इन बातों सब को नजरअंदाज कर रही थी। रविवार के दिन गीता की भी छुट्टी थी। आरती और गीता ने भी जल्दी से अपना-अपना काम ख़त्म किया और दोनों सहेली बात करना शुरू कर दी बातों ही बातों पे साडी पहनने का विचार कहां से आ गया। आरती ने गीता से बोला मैंने कभी साड़ी नहीं पहनी है मुझे पहना दो प्लीज गीता ने बोला ठीक है। पता नहीं नफ़ीज़ा कहा से टपक पड़ी। गीता और आरती दोनों ने धीरे से एक दूसरे के साथ बोला आ गई रंग में भंग डालने मुँह में गुनगुनाते हुऐ बोला। नफ़ीज़ा मन ही मन जल कर राख हो रही थी क्योंकि हम दोनों खुशी में झूम रहे थे। 2/3 मिनट के बाद वो वहां से निकल गई। आरती ने साडी पहन ही ली थी। दूसरी ओर नफीसा ने अपनी सासु-माँ (Mother in low) के कान भर दिये। नफ़ीज़ा की सासु-माँ में एक बुराई है, वो थोड़ा कान की कच्ची है। जल्दी ही अपनी बहू की बात आ गई। और जोर-जोर से चिल्लाने लगी उसके चिल्लाने की आवाज आरती के कमरे के अंदर आ रही थी और नफ़ीज़ा की सासु-माँ ने देखा कि आरती और गीता दरवाजा बंद है। पता नी दोनों अन्दर क्या कर रही है। फिर नफ़ीज़ा की सास ने अपनी बहू को वही डांटना शुरू कर दिया। उस समय नफ़ीज़ा की सास गुस्सैल रूप देखने को मिला और ना जाने कितने अपशब्दों (abusive/abuse language) की बारिश कर दी। ये सुन कर आरती के पति ज़फर खान ने भी कुछ नहीं बोला, वो चुप-चाप कैसे सुन रहा था। पर अफसोस इस ही बात का था। 2 मिनट के अन्दर ही गीता के मन में भी हजारों प्रश्नों ने जन्म ले लिया था। आखिरकार क्या बुराई है साड़ी पहने लेती तो वैसे भी वो कौन होती है हमें ऐसा बोलने वाली चाहे कमरा बंद करे या फिर ना, नाना प्रकार से सवाल गीता भी अपने मन से ही पूछे जा रही थी।
आरती की आँखों से भी अश्को की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी। जब आरती शांत हुई वो नफ़ीज़ा की सासू माँ और ससुर(Father in low) से पूछा एन्टी जी और अंकल जी (Anti ji & Uncle ji) अगर आपको कोई गिला शिकवा था तो ऊपर बुलाकर बोल देते, ऐसे अपशब्द क्यों बोले, अंकल जी ने हाथ जोड़ के बोला बेटा तेरी एन्टी को बोलने का पता नहीं चलता मुझे माफ़ कर दो और एन्टी को भी माफ़ी मांगने को वोला, आरती से क्षमा याचना मांगी। फिर भी दिल को वो सुकून-चैन नहीं पा रहा था। आरती बापिस अपने कमरे में आने लगीं और सीढ़ियों पे उतरते समय सोच लिया, मैं ये कमरा छोड़ के चली जाऊंगी। आरती ने अपने पति जफर खान को बोला 10/02/2021 को ये कमरा खाली करना है। और उधर से हाँ में हाँ मिलाते बोल दिया पर जफर ये कमरा छोड़ के जाना नहीं जाना चाहता था। गीता को इतना गुस्सा था,कि वो नफ़ीज़ा के परिवार से बात तक भी नहीं कर रही थी। आरती के ससुराल पक्ष से भी घर आने की जिद पकड़े हुए थे। आरती को मानसिक अत्याचार किया जा रहा था। तुम अगर घर नहीं आये तो हम अपनी बेटी तुम से ले लेगे,आरती अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थी,जफर का साथ नहीं मिलने के कारण आरती को ससुराल जाना पड़ा। क्योंकि फिर भी जान-बुझ कर अपनी पत्नी का साथ नहीं दे रहा था और दूसरी ओर से नफ़ीज़ा आरती के ससुराल वालो के कान भरे जा रही थी। आरती भी बहुत गुस्से में अपना सारा समान छोड़ कर अपनी बेटी को अपने साथ लेकर ससुराल निकल पड़ी। इधर नफ़ीज़ा अब गीता के कान भरने शुरू कर दिये पर गीता बातों को नहीं भूली थी। गीता के नफ़ीज़ा को अच्छे से सुना दिया। अब नफ़ीज़ा आरती और गीता के दिल से बिलकुल उतर गई थी। अब नफ़ीज़ा की शक्ल देखना, क्या उसके बारे में बात करना भी पसंद नहीं था। अब गीता और आरती की बातें अब पीठ पीछे होती थी। अब जफर भी गीता के सामने नफ़ीज़ा से बात नहीं करता था। वो भी ऐसे दिखाता था अब मैं भी नफ़ीसा से बहुत नफरत करता हूँ। उसकी गन्दी हरकतों वैसे ही बढ़ती गई। इतना कुछ होने के बावजूद भी नफ़ीसा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी। क्योंकि उसको दूसरों को बुरा और खुद को अच्छा बनाती थी। नफ़ीज़ा से घटिया औरत पूरी ज़िन्दगी में नहीं देखी होगी।
गीता और आरती के दिल से उसको हमेशा बददुआ ही निकलती थी। आखिरकार रब के घर में देर है अंधरे नहीं, देर से ही सही पर पाप का घड़ा फूट ही गया। नफ़ीज़ा के पति हामिद खान जफर खान को अपनी दुकान पर ले गए। हामिद खान और जफर दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। हामिद खान का बहुत बड़ा कारोबार है उनका खुद का एक खिलौने उपहार केंद्र है।(Toys Gifts Centre) सुबह के समय हामिद खान ने अभी अपनी दुकान खोली ही थी। जफर ने जैसे-तैसे हामिद खान से नफ़ीज़ा की आधी-अधूरी बातें शेयर कर दी। जफर ने बताया कि नफ़ीज़ा जिस लड़के से बात करती है। उसका नाम नैतिक राजपूत, डोडरा कंवर गांव का रहने वाला है। गीता जिस कंपनी में काम करती है।,उसी कंपनी में वो काम करता है। हामिद खान को ये लग रहा था उसकी पत्नी जो धोखा दे रही है और गीता नफ़ीज़ा को धोखा देने के लिए प्रेरित करती है। पर जफर ने अपने पैर पे खुद ही कुल्हड़ी मार दी। हामिद खान गुस्से में लाल- पीला हो कर घर आया और नफ़ीज़ा को 2/3 थप्पड़ मार दिया। नफ़ीज़ा के घर पे क्लेश पड़ गया। हामिद खान अपनी पति से धोखा खाये बहुत दुखी था। नफ़ीज़ा को समझ आ गया की मेरे पति को मेरी हरकतों का पता चल चूका है उसने खुद आ कर हामिद को सब बताना शुरू किया और उसने हामिद को आश्वासन दिया की मेरा किसी दुसरे पुरुष से कोई सम्बन्ध नहीं है।
नफ़ीज़ा ने खुद को बचने के लिए एक योजना बनी और हामिद खान खान को डरने लगी मैंने तुम्हे छोड़ कर चली जायगी। दोनों पति पत्नी की बहुत कहासुनी हुई,फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है। कि ज़फर सच बोल रहा है या नहीं। अब यही बात नफ़ीसा की तो बहुत चालाक औरत थी। उसने सारा इल्जाम जफर पर लगा दिया कि जफर मुझे मानसिक रूप से बहुत हिंसा करते हैं। इसके बाद ही मैंने जफर माफ किया पर अभी भी मुझे जफर बहुत तंग और मेरा मानसिक शोषण करता था। और मैं अब भी मानसिक हिंसा से गुजर रही हूं। और हामिद मैं आपको बता देती पर मुझ आप के गुस्से से डर लगता था। मानती हूँ मुझ से ये गलती हो गई जो मैंने आप से बात छुपाई। नफ़ीज़ा ने अपने पति हामिद खान से कहा। चाहे आप मीना,टीना और शिवानी से पूछ लो। जफर उनको भी ये रात को कॉल और तंग करता है। जफर मेरे पीछे हाथ धो के पड़ा है।
जफर के खिलाफ मानसिक यातना देने का आरोप लगाया है,लेकिन उसके मामले/आरोप को साबित करने के लिए सबूत का बोझ जफर पर था। हामिद खान खान ने जफर के साथ-2 गीता को भी कमरा खाली करने को बोल दिया।
गीता ने भी बोला मै कमरा क्यों खाली करू मेरी क्या गलती है? मैं अपनी छोटी बेटी को लेकर कहा जाऊगी और एक दम कमरा खाली करने को क्यों बोल रहे हो। गीता ने जाने से मना कर दिया मैं रूम खाली नहीं करुँगी। आपका निजी मामला है मुझे अपने निजी मामला में मुझे शामिल मत करो। नफ़ीज़ा आरती को फ़ोन करके कड़वी -2 बातें बोलती थी। अब बहुत हो गया पानी सर से ऊपर चला गया है।
नफ़ीज़ा को इस तरह बेइज्जत करने का हक़ गीता और आरती ने उसको क्या किसी को भी नहीं दिया था। पर हकीकत बस ये थी कि नफ़ीज़ा घमण्ड ही नही बल्कि एक बिगड़ी हुई औरत थी बस गीता और आरती अपनी बेइज्जती का बदला लेने की सनक सवार थी। उस दिन हम गलत नही थे हमे पता है पर इंसान भगवान नही हो सकता और ना ही हम इतने अच्छे हो सकते हैं कि अपने साथ किया बुरा बर्ताव भूल जायें।
नफ़ीज़ा की बाते कुछ दिन तक गीता और आरती ने बर्दाश्त कि फिर नफ़ीज़ा को चेतावनी भी दी। लेकिन उसकी वही हरकत में कोई बदलाव नहीं था। सासु-माँ भी जब उसकी (नफ़ीज़ा) बातों में आने लगी थी तो आरती दिल बहुत दुखा था।
किसी ने ठीक ही कहा है:- ज़िंदगी जीना आसान नहीं होता, बिना संघर्ष के कोई महान नहीं होता, जब तक न पड़े हथौड़े की चोट, पत्थर भी भगवान नहीं होता।
अब गीता और आरती उस नफ़ीज़ा जैसी नहीं थी। जो उसके हजारों राज अपने मन मे दफ़न किये हुए थे। वो दोनों भी चाहती थी तो उसके परिवार को बता सकती थी। पर गीता और आरती में उस नफ़ीज़ा जैसा कोई फ़र्क नही रह जाता। लेकिन उस नफ़ीज़ा को सबक सिखाना भी जरूरी था क्योंकि बुरा करना, जितना बुरा है तो बुरा सहना भी बहुत बुरा है। अच्छे के साथ अच्छा बनें बुरे के साथ बुरा नहीं, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ़ नहीं हो सकता है।
आरती ने भी उसको धमकी दी कि अगर उसने मेरी और गीता बुराई करना बंद नहीं किया तो मैं उसके चरित्र का कच्चा-चिठ्ठा जरूर सबके सामने खोल दूंगी। क्योंकि जितना मैं जानती हूँ। उसे उसका आधा भी वो खुद के बारे में नहीं जानती होगी। नफ़ीज़ा डर गई। आज उस बात को चार साल बीत गए लेकिन उसने गीता और आरती लिए कभी किसी से फिर कुछ नहीं कहा।
ऐसा नहीं है। कि उसको यूं धमकी देकर आरती को अच्छा लगा पर उस वक्त आरती कुछ और सूझा नहीं। आज तक भी नहीं समझ पाई हूँ। कि गीता और आरती सही किया या ग़लत। ग़लत नहीं लगता तो सही भी नही लगता।
गीता और आरती उसके साथ पेश तो वैसे ही आई जैसे वो गीता और आरती के साथ कर रही थी लेकिन गीता और आरती आज तक उसका बुरा नही किया। ना ही किसी को उसके बारे मे कुछ नहीं बताया। यकीन मानिये बुरा करना भी आसान नहीं होता।
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