लघुकथा

दलित

इस आजाद भारत में आज भी मेरी वही दशा है. छुआ – छूत का फंदा आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है. मै हूँ दलित गरीब भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है. मै तिल तिल कर जी रहा समाज मेरे बुरे हाल पर हंस रहा है. ये मत भूलो, जिस घर में तुम हो रहते वो मेरी दिहाड़ी मजदूरी से ही बना है. फसल उपजाऊ सबकी भूख मिटाऊँ पर खुद भूख से मै ही लड़ता हूँ. साथ चलने का हक़ भी मै ना पाऊं पर सबके उठने से पहले सड़के साफ मै ही... »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

गाँव की एक रात

काली आधी रात में, दुनिया देख रही थी सपने | आलस का आलम था चहु ओर रात भी लग रही थी ऊंघने | तब मैंने छत से देखा, बतखो के झुण्ड को तलाब में | ठंडी हवा भी चलने लगी, रात के आखरी पहर मे | मछलिया खूब उछाल रही थी, फड़ फाड़ा रही थी इधर उधर | सोचा हाथ लगाउ उनको, पर ना जाने गई किधर | तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान में, बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति में | जैसे वो सब मस्त है आजादी में, मैंने भी आजादी महसूस की उन सबकी ... »

ठंड

******** ठंड******** ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे डाल लेता है ।धुप अच्छी निकली रहती है वह पतले कपडे पहने ही अपने माँ को बस स्टेशन छोडने के लिए जौनपुर बस डिपो गया । वहा चीनू अपने माँ का हाल देखकर अपने माँ को वाराणसी स्टेशन से ट्रेन पकडाने का निर्णय कर निकल जाता है। और वहा पहुंच कर अपने माँ को... »

लघुकथा

आत्मकथा दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते थे ।उस समय घर पर मैं कलम खरिदने के लिए पैसे मांगे तो मुझे नही मिला मेरी माँ बोली बेटा एक दो दिन चलाओ इसके बाद दिला दुगी । मैं दुसरे दिन स्कूल चला गया और बिना होम वर्क किये स्कूल में मेरा पीटाई हुआ ।और मैं घर आकर बोला मैं कल स्कूल नही जाऊंगा । ... »

मेरा राजा बेटा

खुशियों का एहसास लाया, जब तू मेरी जिंदगी मे आया छू ना पाए तुझे मुश्किलों का साया, बीड़ा मैंने यही उठाया. दुख तुझपर कोई ना आए, इसी जिद्द पर मै अडी हूँ जब तू खुद को निराश पाए, हमेशा साय की तरहा, ” तेरे पीछे ही मै खड़ी हूँ ” खून का रिश्ता तुझसे गहरा और पक्का है, तुझपर है भरोसा एक तू ही लगता मुझको सच्चा है, बार-बार कहती यही “मेरा राजा बेटा सबसे अच्छा है, तू कितना भी बड़ा हो जाये “... »

लघुकथा

( लघुकथा ) एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा करके कुछ खाने कि चीजे लाती थी उसमें भी खाना सिर्फ दो लोगो को होता कभी माँ भूखी सो जाती थी तो कभी बेटा यह बोलकर सो जाता था कि माँ आज मुझे बिल्कुल भूख नहीं हैं | जैसे तैसे गरीब महिला का घर चल रहा था एक दिन रात को बहुत ही भयंकर ऑधी तूफान आया उसमें गरीब ... »