लघुकथा

इन्सान और जानवर (भाग – २)

(आपने भाग १ में पढ़ा – वीराने में कलूआ की मुलाकात एक अदभुत गिद्ध से होता है। वह मनुष्य की भाषा में बात करता है। वह अपने घर परिवार व समाज को छोड़ चूका है। क्योंकि सभी गिद्ध जानवर के मांस खा खा कर जानवरों जेसे बर्ताव करने लगे है। गिद्ध स्वंय अपनी आहार तालाश करने मे सक्षम नहीं है।वह इंसान के मांस खा कर जीवित रहना चाहता है। वह अपनी व्यथा कलूआ को कहता है ।कलूआ क्या जवाब देता है) अब आगे — कल... »

इन्सान और जानवर

कलूआ डोम श्मशान से लाश जला कर शाम के समय घर जा रहा था। अचानक किसी की आवाज़ उसके कानो में टकरायी।वह खड़ा हो कर चारो तरफ देखने लगा। उसे कहीं भी कुछ दिखाई नहीं दिया। कुछ क्षण पश्चात वह दो कदम आगे बढा ही था कि झाड़ी में एक बूढ़े गिद्ध को देखा। कलूआ –“सारा दिन मांस खाता ही रहता है। फिर भी शाम के समय टें टें करता ही र हता है “।गिद्ध–“भाई। मैं चार दिनों से भूखा हूँ। मुझे कही... »

मेरे भाई की शादी…

बात 4-5 साल पहले की है। मेरे छोटे भाई ने एक लड़की पसंद कर ली। लड़की विजातीय थी, बस घर में कोहराम मच गया। जो चाचा,मामा फूफा मेरे भाई पर लाड लुटाते थे, मानो उसके दुश्मन बन गए। भाई ने लड़की से मुझे मिलवा रखा था ।बड़ी क्यूट सी लड़की थी,मुझे तो पसंद थी। मम्मी पापा सब बिचारे के पीछे पड़ गए। जब मैने पक्ष लिया तो मुझे कहा लड़की, तुम चुप रहो। भाई जो अभी तक गर्दन झुकाए बैठा था, बोला…क्यूं चुप रहेगी वो... »

बरसात का वो दिन..

तेज़ बारिश से पूरी तरह तर होने के बावजूद मैं अपनी बाईक लेकर अपने ऑफिस से घर जा रहा था । सड़क पर गहरे हो चुके गड्ढों से जैसे ही मुलाकात हुई तो ऐसा लगा कि शायद सरकार हमें यह बताना चाहती हो कि इस धरती से नीचे भी एक दुनियां है जिसे पाताल लोक कहते हैं, खैर मैंने इतना सोचा ही था कि मेरी गाड़ी किसी गड्ढे में जाकर अनियंत्रित होकर गिर गई । पहले तो सहज मानव स्वभाव वश मैंने भी यहाँ-वहाँ देखकर यह तसल्ली करनी चाह... »

मैकेनिकल इंजीनियर

‘कैसी सड़क हो गई है इतने गढ्ढे हैं कि समझ नही आ रहा कि गाड़ी सड़क पर चला रहा हूँ या सर्कस में, मेरा इतना सोचना ही हुआ था कि मैं गाड़ी समेत लड़खड़ा कर सड़क पर गिर पड़ा, आस पास देखा कि किसी ने गिरते हुए देख न लिया हो । तसल्ली हुई कि गिरते हुए तो नही देखा लेकिन शायद गिरने के बाद देख लिया था क्योंकि कुछ लोग मुझे मेरी तरफ आते हुए दिखे, लेकिन ये क्या.. ये तो सड़क के दूसरी तरफ निकल गए जहाँ एक खूबसूरत सी लड़क... »

अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन से, नारा लगाते  चिल्लाते उसी  कुछ झण्डा  चमकाते दलगत राजनीति से ओत – प्रोत हौशले से  नारा लगाते हुए कि – हर जोर जुल्म की टक्कर , में संघर्ष हमारा नारा है।अभी तो यह अंगड़ाई है ,आगे और लड़ाई है |आप हमारे भाई हैं,समर्थन के लिए बधाई है।... »

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि

एक समय की बात है। गुरू द्रोण अपने दो शिष्य युधिष्ठिर एवं दुर्योधन को पास बुलाया।द्रोण -“तुम दोनो संसार को देख आओ, कौन अच्छा है कौन बुरा है “।दोनो आदेश के पालन करने के लिए निकल पड़े । कुछ दिन गुजरने के बाद दोनों गुरू द्रोण के पास पहुँचे। पहले युधिष्ठिर बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी अच्छे थे “।दुर्योधन बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी बुरे व्यक्ति थे “।ठीक उस... »

ओडिशा यात्रा -सुखमंगल सिंह

यात्रायें सतयुग के सामान होती हैं और चलना जीवन है अतएव देशाटन के निमित्त यात्रा महत्वपूर्ण है | मानव को संसार बंधन से छुटकारा पाने हेतु जल तीर्थ की यात्रा करना चाहिए – सुखमंगल सिंह sukhmangal@gmail.com मोबाईल -९४५२३०९६११ यात्रायें हमेशां ज्ञान -उर्जावृद्धि में सहायक होती है – कवि अजीत श्रीवास्तव https://plus.google.com/collection/0FouTE मूल रूप से Sukhmangal Singh ने साझा किया यात्राये... »

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी फैलने से पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है| लॉकडाउन में शव ले जाने के लिए भी लोग तैयार नहीं नहीं है । वायरस वोहान चीन से आया हैयह तो तय हो चुका है | विश्व में सारे धार्मिक स्थलों को बंद करने का ऐलान... »

कोरोना वायरस काल २०२०

कोरोना वायरस काल २०२० —– — —— – ———— कोरोनावायरस दुनिया को अपने आगोश में लेता जा रहा था बात अप्रैल माह की कर रहा हूँ अप्रेल ० 1 की तरफ ध्यान दें तो लगभग 2361 लोग मरकज से निकले परंतु मरकज के लोग मात्र 1000 लोगों की मौजूदगी का दावा किया | कोरोना फैलने से रोकने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में मरकज के तबलीगी जमात से शामिल होकर प्रदेश... »

हैसियत

एक औरत अपने आठ महीने के बेटे के संग बीच चौराहे पे आयी। वह हमेशा की तरह एक मैली थैली में से एक कटोरा निकाल कर बैठ गयी। आने जाने वालों से कहती -“पापी पेट का सवाल है। भगवान के नाम पे कुछ दे दो साहब “।मै उसे वहाँ दो साल से देखता आ रहा था। मैं जब जब वहाँ से गुज़रता था तब तब उसके कटोरे में दस या बीस रुपये रख दिया करता था। एक दिन अचानक एक स्कॉरपियो गाड़ी उसके सामने रुकी। अंदर से कोई कुछ कहा ।... »

चिपको आंदोलन 1970

चिपको आन्दोलन की शुरुआत 1970 में सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी, कल्याण सिंह रावत पर्यावरणविद ने की। वन विभाग के अधिकारियों को 2400 से अधिक पेड़ काटने के आदेश पर खदेड़ा। इसकी शुरुआत तत्कालीन ‘चमोली जिले’ से हुई । फिर धीरे-धीरे पूरे उत्तराखंड में फैल गई इस की सबसे बड़ी बात यह थी कि इसमें स्त्रियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और अपनी जान जोखिम में डालकर राज्य के वन अधिकारियों को पेड़ कटाई... »

दिन

दिन प्रतिदिन हम यहीं है करते, नारी को देते उच्च स्थान । घर की लक्ष्मी मानते, करते सुबह शाम गुणगान।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

गलतफहमी

बारह वर्ष की बब्ली कोचिंग पढ कर घर आयी। वह चुपचाप अपने कमरे में जा कर रोने लगी। जब बब्ली की माँ को पता चला कि, बब्ली अपने कमरे में रो रही है। वह दौड़ती हुयी बब्ली के पास आयी –“क्या बात है बेटी। किसी ने कुछ कहा क्या “?बब्ली रोती हुयी –“मम्मी ।कोचिंग के सर आज मुझे क्लास के अन्दर जाने नहीं दिया। वे सब कहते है कि, तुम्हारे पापा बाहर से आए है। हो सकता है वह कोरोना के चपेट ... »

पुरानी बड़गद (रहस्य रोमांच)

यह घटना बिहार जिले में स्थित समस्तीपुर की है। बैशाख का महीना था। गाँव के लोग गर्मी से व्याकुल थे। उसी गाँव के ३५ वर्ष के युवक महेश गर्मी से परेशान हो कर रात के बिछावन आंगन में बिछा कर सो गया। अगल बगल के लोग भी सोए हुए थे। अचानक महेश की आंखे रात के दो बजे खुल गयी। वह उठ कर चारो तरफ देखा। चांदनी रात पूरी अपनी जवानी पर थी। दूर दूर के पेंड़ पौधे साफ साफ दिखाई दे रहा था। चांदनी( 🌙) रात सुनसान की आगोश स... »

जेष्ठ की तपती धूप

जेष्ठ की तपती धूप में, एक माँ अपने छह महीने के बेटे को अपनी पीठ में बांध कर मजदूरी कर रही थी। बच्चा भूख व गर्मी से तड़प रहा था। वह जोर जोर से चिल्ला रहा था। वहाँ के मुंशी जी का कहना था कि,कोई मजदूर मेरे मौजूदगी में अगर बैठा पाया गया तो ,उसकी उस दिन की हाजरी काट दिया जाएगा। यही सोच कर माँ अपने बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ थी। वह बच्चा रो रो कर व्याकुल था। बच्चे की तड़प और पसीने से भीगी दुखियारी म... »

सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार (भाग -२)

(आपने अगले पेज में पढा कि, अमित अपनी उलफत की दास्तां अपने दोस्त सुरेश को सुनाया। क्योंकि, अनिता के प्यार में वह पागल हो गया था। सुरेश अमित को किस तरह सही रास्ते पर ला कर खड़ा किया। आगे पढिए—-) ——————————– सुरेश -“वह तुम्हारा अमानत नहीं है। अपने को संभालो अमित। इस संसार में लड़कियां उसे ही चाहती है जिसके पास दौलत और गुण ह... »

कॉलेज का पहला दिन(भाग-2)

…नंबर अच्छे आये।) अब आगे… एक दिन मैने उससे पूँछा कोई ज़िंदगी में है तुम्हारी? उसने कहा नहीं । मुझे पता था की वो किससे प्यार करता है ।वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त बन गया । हम दोनों सब कुछ शेयर कर लेते थे । एक दिन उसकी गर्लफ्रेंड ने कहा-मुझसे बात ना किया करे ।मैने भी कहा जब उसे बुरा लगता है है तो मुझसे बात ना किया करो। पर उसने कहा मैं सबको छोड़ सकता हूँ पर तुमको नहीं ।मैने पूछा ऐसा क्या है?उसन... »

अंधा और लंगड़ा

एक था अंधा एक था लंगड़ा । दोनों का याराना हो गया तगड़ा।। आग लगी जब गाँव में । सब भागने लगे शीतल छाँव में।। कोई बता न पाया अंधा को। कोई भगा न पाया लंगड़ा कै।। अंधे का सहारा लंगड़ा और लंगडे का सहारा अंधा। राह बतावे लंगड़ा चढ़ ऊपर अंधे का कंधा।। बचाव हुआ दोनों का और बन गए एक मिसाल। ‘विनयचंद ‘जो नेक भाव हो सब रहे सदा खुशहल।। »

कॉलेज का पहला दिन !!(भाग1)

कॉलेज का पहला दिन था थोड़ी देर से गई क्लास में जाकर बैठी,शिक्षाशास्त्र पढ़ाई जा रही थी । सब मुझे देख के अचंभित थे।बहुत सवाल थे सबके मन में..टीचर के जाते ही सबने मुझे आ घेरा।बारी- बारी से सवाल पूंछने लगे। मुझे लाज़ आ रही थी,इतने लोगों के बीच। मैने किसी से दोस्ती नहीं की,सब मुझे बहुत पसंद कर रहे थे। एक लड़का देखते ही जा रहे था कुछ बोल नहीं रहा था ।मेरी निगाहें कई बार उस पर गई।वो पढ़ने में बहुत अच्छा था,ह... »

सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार(भाग-१)

अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा रंग ही चुराया था। चंचल स्वभाव के कारण ही अमित उसे कब कहाँ क्यों और कैसे दिल दे दिया पता तक नहीं चला। वह हमेशा अमित के संग हंसी मजाक, लड़ाई झगडा कर लिया करती थी। कभी कभी एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। दो तीन दिन बाद फिर एक दूसर... »

ओ बीते दिन

ओ बीते दिन ये उन दिनों की बात है,जब बेरोजगारी का आलम पूरे तन मन मे माधव के दीमक में घोर कर गया था,घर की परिस्थिति भी उतना अच्छा नही था कि वे निठल्ला घूम सके……. …क्योंकि बाबू जी कृषि मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण पोषण कर अपने फर्ज को निभा रहे थे । और इधर माधव गाँव मे ही रह कर पढ़ाई के साथ-साथ अपने माँ के साथ घर के हर कामो में हाथ बटाते.और इसी तरह उन्होंने हायर सेकेंडरी स्तर तक कि ... »

दूरी

मैं खिड़की पर खड़ा था और वह दरवाजे पर खिड़की से दरवाजे कि ये दूरी तब भी थी जब वह मेरे पास आ रही थी और अब भी है जब वह मुझे छोड़ कर जा रही है। »

मौकापरस्त मोहरे

वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की चाल भी बदल गयी थी, घोड़ा तिरछा चल रहा था, हाथी और ऊंट आपस में स्थान बदल रहे थे, वज़ीर रेंग रहा था, बादशाह ने प्यादे का मुखौटा लगा लिया था और प्यादे अलग अलग वर्गों में बिखर रहे थे। वह चिल्लाया, “तुम सब मेरे मोहरे हो, ये बिसात मैनें बिछाई है, तुम ... »

चिट्ठी

प्यारी गौरैया! आज तुम्हें इतने दिनों बाद अपनी छत पर देख अपने बचपन के दिन याद आ गए ,तब तुम संख्या में हमसे बहुत ज्यादा थीं, आज हम हैं ज्यादा नहीं पर कुछ पेड़ हैं लेकिन तुम सब अब पता नहीं कहां चली गईं। शायद हमारे घरों ने तुम्हारे घर छीन लिए लेकिन सच कहूं गौरैया! जब हमारा नया घर बना था तो तुम्हारी याद ही नहीं आयी , आज जो आंसू आए वो शायद उस समय आते तो कुछ करती मैं तुम्हारे लिए क्योंकि, मुझे याद है जब ... »

दोस्ती से ज्यादा

hello friends, कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी करते और कहानी शुरू करते है        आज मै बहुत खुश हू और वजह भी जायज है यार आखिर इतने वक्त बाद घर वापिस जो जा रही हू  5 साल बाद अपने देश India वापिस जा रही हू, हाँ क्यों India मेरा घर नही हो सकता क्या मेरे लिए तो India ही मेरा पहला घ... »

मिनी पेट्रोल पंप

मिनी पैट्रोल पम्प समर अपनी नयी बाइक से फर्राटे भरते हुये घर से निकला।वह अपनी किराने की दुकान का सामान लेने लालपुर जा रहा था।रास्ते मे उसकी बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया।वहाँ कोई पैट्रोल पम्प नही था।पूछने पर पता चला कि यही धरमपुर मे गुप्ता जी के वहाँ पैट्रोल मिल जाता है। फिर क्या था?समर अपनी बाइक घसीटता हुआ पहुँचा और आवाज लगायी,गुप्ता जी!पैट्रोल दे देना। तभी गुप्ता जी की लड़की मिनी आयी और समर से बोली,... »

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994” किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान सकें ,करीब से देख   अच्छाई ग्रहण  सकें तथा अपनी संस्कृति सभ्यता से प्रभावित कर सकें | अखिल – भारतीय सद्भावना संगठन द्वारा आयोजित गाठ छ: अगस्त से बाइस अगस्त तक ‘काशी से कश्म... »

गांव की बेटी

दिन की शुरुआत अंगीठी के उठते धुएं से शुरू होती पकाती परिवार के लिए रोटी फिर भी सुने समाज की खरी-खोटी थक जाए कितना भी तू फिर भी आराम ना लेती देख तुझे मैं यही कहती कैसे यह सब है करती मेरे गांव की तू बेटी. मीलो चलती पानी भरकर लाती रख घड़ा जमी पर फिर से दोपहर का खाना बनाती रख गमछे में प्याज और चार रोटी फिर से खेत की तरफ रवाना होती खिलाकर रोटी पिलाकर पानी पति की प्यास बुझाती ले हसिया हाथ में कटाई में ल... »

बच्चा

एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही. जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही. ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही. ख्वाब उसके टूट चुके थे रिवायत ये बचपन से ही चलती रही. वह तो कई साल पहले ही मर गया था पर लाश पचपन तक चलती रही. »

सच्चाई

मुंह में राम बगल में छुरा लिए आते हो अपनी गंदी राजनीति से सबको लड़वाते हो क्या फर्क पड़ता है कि तुम हिंदू हो या मुसलमान अपने उन्ही मेले हाथों से शांति के कबूतर उड़ाते हो अल्लाह के बंदे, भगवान की रचना है हम क्यों अयोध्या को आधा-आधा कटवाते हो अगर सच्चे इंसान हैं हम तो फिर क्यों तुम घबराते हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि तुम नमाज पढ़ते हो या फिर दिए जलाते हो. »

सात चिड़ियों का बसेरा

एक बाग में था पेड़ हरियाणा विशालकाय, सुंदर, मतवाला बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला. जागृत हो जाता होते ही सवेरा जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा खाकर फल उसके चिड़ियों ने बीजों को जग में जा बखेरा. किसी चिड़िया का पहली डाल पर बसेरा किसी का था ऊंची अटारी पर डेरा सुंदर चिड़ियों का परिवार बढा पेड़ दिखने लगा और भी घनेरा. बीत गए कई साल खुशी से उड़कर आकर बैठती बस उसी ... »

हैप्पी बर्थडे सांध्या

इतने सालो से अपने कंधो पे जिम्मेदारी माँ की ले रखी है माँ की तू बेटी है घर की तू तरक्की है अनपढ़ माँ की अब तू इकलौती कलम और तख्ती है किस तरहा सुधर गया जीवन दुनिया हक्की बक्की है. जो तेरे कर्म मे था परिश्रम तूने गहन किया कई मुश्किलें सर आन पड़ी सभी को तूने सहन किया गरीबी मे साथ दिया माँ का फटे कपड़ो को भी पहन लिया छोड़ना ना कभी जो माँ का हाथ थाम लिया आज के दिन तूने जन्म लिया हैप्पी बर्थडे मेरी बहन संध्... »

दलित

इस आजाद भारत में आज भी मेरी वही दशा है. छुआ – छूत का फंदा आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है. मै हूँ दलित गरीब भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है. मै तिल तिल कर जी रहा समाज मेरे बुरे हाल पर हंस रहा है. ये मत भूलो, जिस घर में तुम हो रहते वो मेरी दिहाड़ी मजदूरी से ही बना है. फसल उपजाऊ सबकी भूख मिटाऊँ पर खुद भूख से मै ही लड़ता हूँ. साथ चलने का हक़ भी मै ना पाऊं पर सबके उठने से पहले सड़के साफ मै ही... »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

गाँव की एक रात

काली आधी रात में, दुनिया देख रही थी सपने | आलस का आलम था चहु ओर रात भी लग रही थी ऊंघने | तब मैंने छत से देखा, बतखो के झुण्ड को तलाब में | ठंडी हवा भी चलने लगी, रात के आखरी पहर मे | मछलिया खूब उछाल रही थी, फड़ फाड़ा रही थी इधर उधर | सोचा हाथ लगाउ उनको, पर ना जाने गई किधर | तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान में, बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति में | जैसे वो सब मस्त है आजादी में, मैंने भी आजादी महसूस की उन सबकी ... »

ठंड

******** ठंड******** ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे डाल लेता है ।धुप अच्छी निकली रहती है वह पतले कपडे पहने ही अपने माँ को बस स्टेशन छोडने के लिए जौनपुर बस डिपो गया । वहा चीनू अपने माँ का हाल देखकर अपने माँ को वाराणसी स्टेशन से ट्रेन पकडाने का निर्णय कर निकल जाता है। और वहा पहुंच कर अपने माँ को... »

लघुकथा

आत्मकथा दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते थे ।उस समय घर पर मैं कलम खरिदने के लिए पैसे मांगे तो मुझे नही मिला मेरी माँ बोली बेटा एक दो दिन चलाओ इसके बाद दिला दुगी । मैं दुसरे दिन स्कूल चला गया और बिना होम वर्क किये स्कूल में मेरा पीटाई हुआ ।और मैं घर आकर बोला मैं कल स्कूल नही जाऊंगा । ... »

मेरा राजा बेटा

खुशियों का एहसास लाया, जब तू मेरी जिंदगी मे आया छू ना पाए तुझे मुश्किलों का साया, बीड़ा मैंने यही उठाया. दुख तुझपर कोई ना आए, इसी जिद्द पर मै अडी हूँ जब तू खुद को निराश पाए, हमेशा साय की तरहा, ” तेरे पीछे ही मै खड़ी हूँ ” खून का रिश्ता तुझसे गहरा और पक्का है, तुझपर है भरोसा एक तू ही लगता मुझको सच्चा है, बार-बार कहती यही “मेरा राजा बेटा सबसे अच्छा है, तू कितना भी बड़ा हो जाये “... »

लघुकथा

( लघुकथा ) एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा करके कुछ खाने कि चीजे लाती थी उसमें भी खाना सिर्फ दो लोगो को होता कभी माँ भूखी सो जाती थी तो कभी बेटा यह बोलकर सो जाता था कि माँ आज मुझे बिल्कुल भूख नहीं हैं | जैसे तैसे गरीब महिला का घर चल रहा था एक दिन रात को बहुत ही भयंकर ऑधी तूफान आया उसमें गरीब ... »