लघुकथा

मिनी पेट्रोल पंप

मिनी पैट्रोल पम्प समर अपनी नयी बाइक से फर्राटे भरते हुये घर से निकला।वह अपनी किराने की दुकान का सामान लेने लालपुर जा रहा था।रास्ते मे उसकी बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया।वहाँ कोई पैट्रोल पम्प नही था।पूछने पर पता चला कि यही धरमपुर मे गुप्ता जी के वहाँ पैट्रोल मिल जाता है। फिर क्या था?समर अपनी बाइक घसीटता हुआ पहुँचा और आवाज लगायी,गुप्ता जी!पैट्रोल दे देना। तभी गुप्ता जी की लड़की मिनी आयी और समर से बोली,... »

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994” किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान सकें ,करीब से देख   अच्छाई ग्रहण  सकें तथा अपनी संस्कृति सभ्यता से प्रभावित कर सकें | अखिल – भारतीय सद्भावना संगठन द्वारा आयोजित गाठ छ: अगस्त से बाइस अगस्त तक ‘काशी से कश्म... »

गांव की बेटी

दिन की शुरुआत अंगीठी के उठते धुएं से शुरू होती पकाती परिवार के लिए रोटी फिर भी सुने समाज की खरी-खोटी थक जाए कितना भी तू फिर भी आराम ना लेती देख तुझे मैं यही कहती कैसे यह सब है करती मेरे गांव की तू बेटी. मीलो चलती पानी भरकर लाती रख घड़ा जमी पर फिर से दोपहर का खाना बनाती रख गमछे में प्याज और चार रोटी फिर से खेत की तरफ रवाना होती खिलाकर रोटी पिलाकर पानी पति की प्यास बुझाती ले हसिया हाथ में कटाई में ल... »

बच्चा

एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही. जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही. ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही. ख्वाब उसके टूट चुके थे रिवायत ये बचपन से ही चलती रही. वह तो कई साल पहले ही मर गया था पर लाश पचपन तक चलती रही. »

सच्चाई

मुंह में राम बगल में छुरा लिए आते हो अपनी गंदी राजनीति से सबको लड़वाते हो क्या फर्क पड़ता है कि तुम हिंदू हो या मुसलमान अपने उन्ही मेले हाथों से शांति के कबूतर उड़ाते हो अल्लाह के बंदे, भगवान की रचना है हम क्यों अयोध्या को आधा-आधा कटवाते हो अगर सच्चे इंसान हैं हम तो फिर क्यों तुम घबराते हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि तुम नमाज पढ़ते हो या फिर दिए जलाते हो. »

सात चिड़ियों का बसेरा

एक बाग में था पेड़ हरियाणा विशालकाय, सुंदर, मतवाला बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला. जागृत हो जाता होते ही सवेरा जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा खाकर फल उसके चिड़ियों ने बीजों को जग में जा बखेरा. किसी चिड़िया का पहली डाल पर बसेरा किसी का था ऊंची अटारी पर डेरा सुंदर चिड़ियों का परिवार बढा पेड़ दिखने लगा और भी घनेरा. बीत गए कई साल खुशी से उड़कर आकर बैठती बस उसी ... »

हैप्पी बर्थडे सांध्या

इतने सालो से अपने कंधो पे जिम्मेदारी माँ की ले रखी है माँ की तू बेटी है घर की तू तरक्की है अनपढ़ माँ की अब तू इकलौती कलम और तख्ती है किस तरहा सुधर गया जीवन दुनिया हक्की बक्की है. जो तेरे कर्म मे था परिश्रम तूने गहन किया कई मुश्किलें सर आन पड़ी सभी को तूने सहन किया गरीबी मे साथ दिया माँ का फटे कपड़ो को भी पहन लिया छोड़ना ना कभी जो माँ का हाथ थाम लिया आज के दिन तूने जन्म लिया हैप्पी बर्थडे मेरी बहन संध्... »

दलित

इस आजाद भारत में आज भी मेरी वही दशा है. छुआ – छूत का फंदा आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है. मै हूँ दलित गरीब भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है. मै तिल तिल कर जी रहा समाज मेरे बुरे हाल पर हंस रहा है. ये मत भूलो, जिस घर में तुम हो रहते वो मेरी दिहाड़ी मजदूरी से ही बना है. फसल उपजाऊ सबकी भूख मिटाऊँ पर खुद भूख से मै ही लड़ता हूँ. साथ चलने का हक़ भी मै ना पाऊं पर सबके उठने से पहले सड़के साफ मै ही... »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव गोपी सम्वाद

उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो। गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो । तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो। बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो । मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो । »

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