प्रकृति

प्रकृति का कत्ल करकर, जो जीने की आस रखते है।
कुदरत को मारकर, जो धार्मिक लिबास रखते है।
दिल में नफरत बढ़कर, मुँह पे मिठास रखते है।
खून से हाथ रंगकर भी, ये भगवन में विश्वास रखते है।

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8 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 10, 2019, 12:54 pm

    बहुत खूब

  2. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 1:05 pm

    Touching

  3. Poonam singh - September 10, 2019, 2:01 pm

    Nice

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 5:36 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  5. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 8:54 pm

    Sir g kamal kar dita

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