बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है,
चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।।
राही (अंजाना)
बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

Comments
8 responses to “बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है”
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Very good bhai
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धन्यवाद bhai
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Super
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Thank you
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nice
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thanks
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Waah sir
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Thank you
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