भारतीय रेल

#भारतीय_रेल

लोहे की खिड़की पे सिर रखकर,
सपनो को करीब से देखा है,

पहियों के रफ़्तार से,
अनुभव को भरपूर जीता है

इस तरह यादें समेटे सफर चलता जा रहा,
भारतीय रेल का ये साथ अनूठा
अब हमसे न भूला जा रहा,

-मनीष

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close