मानवता

मानव मानवता सीखो
मत होड़ करो तुम बढ़ने की

मत काव्य का अपमान करो
देश हित काव्य सृजन करो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Comments

5 responses to “मानवता”

  1. Vinita Shrivastava Avatar
    Vinita Shrivastava

    बहुत बहुत आभार आपका

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