मुकम्मल जिंदगी

मुकम्मल जिंदगी की खातिर
क्या क्या न किया जिंदगीभर हमने
मगर इक अधूरापन ही मिला
जिसे साथ लिए घूमता रहता हूं मैं|


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Panna.....Ek Khayal...Pathraya Sa!

2 Comments

  1. Ajay Nawal - April 27, 2016, 11:34 pm

    nice

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 8, 2019, 5:11 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

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