मुक्तक

सरिता पावन हो गई स्निग्ध खुश्बू सी वन में छाई है
तु कौन रमणिका जल क्रिडा को चली कहां से आई है!
सारा उपवन नतमस्तक हो सादर अभिनंदन करता है
तन मन की तपन बढ गई तुने पानी में आग लगाई है!!
उपाध्याय…


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1 Comment

  1. Chandra Prakash - July 28, 2016, 12:43 pm

    बहुत अच्छा मनोज जी

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